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गठबंधन की डोर जोड़ने के लिए बसपा के स्टार प्रचारकों का संकट

Sun, 21 Apr 2019 08:58 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2019 08:58 PM IST
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गठबंधन की डोर जोड़ने के लिए बसपा के स्टार प्रचारकों का संकट
गठबंधन की डोर जोड़ने के लिए बसपा के स्टार प्रचारकों का संकट
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सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी से दूरी बनाए दिख रहे बसपा नेता
बसपा की तरफ से अब तक इंद्रजीत के सर्मथन में किसी नेता के आने का संकेत नहीं
अमर उजाला ब्यरो
मंझनपुर। दिल्ली दूर नहीं...। इस मंसूबे को लेकर 24 साल बाद एक दूसरे के धुर विरोधी रहे बसपा और सपा ने भले ही गठबंधन किया हो लेकिन कौशाम्बी संसदीय सीट पर इसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत के साथ वही चेहरे दिख रहे हैं जो बसपा के दिनों में उनके काफी करीबी माने जाते थे।

सपा और बसपा में गठबंधन होने के बाद जिले की सीट को लेकर कयास लगाए जाने लगे। तीन साल सत्ता से बाहर रही सपा कौशाम्बी में अपना प्रत्याशी चाहती थी तो बसपा खेमा भी खुद को काफी दिनों से राजनैतिक उपेक्षित मान रहा था। बाद में यह सीट सपा-बसपा के गठबंधन होने के बाद सपा के खेमे में आई। बसपा से कबीना मंत्री रहे इंद्रजीत सरोज पार्टी का दामन छोड़कर सपा में शामिल हुए और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव का दर्जा दिया गया। सपा ने कौशाम्बी से इंद्रजीत सरोज को ही प्रत्याशी बनाया। इसे लेकर सपा कार्यकर्ताओं के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। यह खुशी इस बात की थी कि उन्हें सपा के अलावा बसपा का भी अपार सर्मथन मिलेगा और वह इंद्रजीत सरोज को सांसद बनाने में कामयाब होंगे। सपा नेताओं को उस वक्त मायूसी हाथ लगी जब इंद्रजीत के नामांकन के दौरान लाल टोपी वाले सपाई तो दिखे लेकिन बसपा नीली टोपी लगभग गायब थी। खुद इंद्रजीत सरोज के साथ बसपा के जिलाध्यक्ष महेंद्र गौतम नामांकन कक्ष में नहीं जा पाए। अब बसपा नेताओं की जमात पार्टी सुप्रीमो मायावती की तरफ से स्टार प्रचारक के रूप में अपने भेजे जाने वाले दूत पर लगी है। माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो इंद्रजीत के समर्थन में प्रचार के लिए नहीं आएंगी। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आने का संकेत तो मिला लेकिन उनके साथ या अलग बसपा का कौन कद्दावर आ रहा है, इस बाबत गठबंधन से जुड़े लोग खामोश हैं।
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