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जनधन योजना के 1.85 लाख बैंक खाते बंद

Sat, 20 Apr 2019 06:06 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2019 06:06 PM IST
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जनधन योजना के 1.85 लाख बैंक खाते बंद
जनधन योजना के 1.85 लाख बैंक खाते बंद
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जीरो बैलेंस पर जिले भर में खुले थे 2.75 लाख अकाउंट
छह महीने तक कोई लेनदेन नहीं करने की वजह सेे बेकार हुए खाते
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर/चायल। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर खोले गए खाते अब बैंकों के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जनपद में महज 90 हजार उपभोक्ता ही इन खातों का उपयोग पैसा निकालने व जमा करने के लिए कर रहे हैं। जबकि शेष बचे 1.85 लाख उपभोक्ता पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। जागरुकता के तमाम प्रयास के बावजूद इन उपभोक्ताओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। नतीजतन बैंकों ने इन खातों को खराब मानते हुए बंद कर दिया है।
समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बैंकों से जोड़ने के लिए पांच साल पहले 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनधन योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत विभिन्न बैंकों में हर आय-वर्ग के परिवारों के खाते जीरो बैलेंस पर खुलवाकर एटीएम सहित सभी प्रकार की उपयोगी सामग्री प्रदान की गई थी। 31 मार्च 2019 तक जिले भर में लगभग 2.75 लाख खाते खोले जा चुके थे। मार्च 2019 तक छह महीने के दौरान जिन उपभोक्ताओं के खातों में लेनदेन नहीं हुआ था। उन खातों को बैंक ने बंद कर दिया है। इस समय कौशाम्बी जनपद में लगभग 65 प्रतिशत जनधन खाते निष्क्त्रिस्य हैं। हर तीसरे साल जन-धन खातों की समीक्षा होती रहती है। इस दौरान जिन खातों में लेनदेन नहीं होगा। उस खाते को बंद कर दिया जाएगा। सभी खाता धारकों से खातों में कुछ न कुछ राशि जमा कर बैंक से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने का प्रयास किया गया था। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में स्थित कियोस्क संचालकों की मदद ली जा रही थी। जबकि शहरी इलाकों में स्थित बैंकों में बैनर-पोस्टर लगाने के साथ ही उपभोक्ताओं के बीच पहुंचकर बैंकों की योजनाओं व पैसों की बचत से होने वाले लाभों के बारे में ये भी बताया गया था। पर, उपभोक्ताओं को जागरूक करने का प्रयास सफल नहीं हो सका। अधिकांश परिवारों की बेहतर आय नहीं होने से वह नियमित रुप से खातों में पैसा नहीं जमा कर पा रहे हैं। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं जिन्होंने एक बार खाता खोलने के ही समय बैंक का मुंह देखा है। खाता खोलने के बाद दोबारा बैंक जाने की जरूरत ही नहीं समझी।
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अधिकांश खाता धारक निम्न आय वर्गीय
जन-धन खाता के सम्बंध में एक बैंक अधिकारी ने बताया कि हमारे देश के मध्यम एवं उच्च आय वर्ग के परिवारों के किसी न किसी सरकारी व प्राइवेट बैंकों में हमेशा से खाते रहे हैं। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं जिनके कई बैंकों में खाते हैं और वह नियमित रुप से लेनदेन भी करते रहते हैं। मगर पटरी पर बैठकर सब्जी, गुमटी, अनाज, अंडे, चाय और चाट-पकौ?ा आदि की दुकान लगाने वाले निम्न आय वर्गीय परिवार लम्बे समय तक बैंक में अकाउंट खुलवाने से अछूते रहे हैं। इन्हीं परिवारों के द्वारा जन-धन योजना के अंतर्गत सर्वाधिक संख्या में खाते खोले गए थे। मौजूदा समय में इन्हें ही लेनदेन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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बैंक में अब बोझ से कम नहीं जनधन खाते
मंझनपुर। बैंक के जानकारों की मानें तो ऐसे उपभोक्ता जोकि योजना की शुरुआत से लेकर अभी तक खाते में लेनदेन नहीं किए हैं। वह कुछ हद तक बैंक कें लिए बोझ बन गए हैं। क्योंकि उनके नामों के खाते तो जरुर हैं। लेकिन, उनमें किसी भी प्रकार का कोष बैंकों को प्राप्त नहीं हो रहा है।
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50 फीसदी ने एटीएम तक नहीं कराया एक्टीवेट
मंझनपुर। जनधन योजना के तहत अधिकांश लोगों ने खाता तो बैंकों में खुलवा लिया है। पर, वह अब बैंक की तरफ जाने से कतरा रहे हैं। गढ़ी के रामबहादुर, औंधन के रामदीन, दिनेश नंदा का पुरवा के सुखऊ आदि उपभोक्ताओं का कहना है कि दिनभर मजदूरी करके जो भी रुपया मिलता है उससे बच्चों के पेट पालते हैं। बैंक में जमा करने के लिए कुछ बचता ही नहीं है तो खाता कैसे चलाएं। बैंक कर्मचारियों की मानें तो 50 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने अपना एटीएम कार्ड अभी तक एक्टीवेट भी नहीं कराया है।

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इनका कहना है
जनधन योजना के तहत जिले के विभिन्न बैंकों में 2.75 लाख खाते खोले जा चुके हैैं। छह महीने तक लेनदेन नहीं करने के कारण इनमें से 1.85 लाख खाते खराब हो गए हैं। अब इन्हें बंद कर दिया गया है।
दिनेश कुमार मिश्रा, एलडीएम
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