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दोआबा के छुटभैया नेताओं पर चढ़ी वीआईपी कल्चर
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दोआबा के छुटभैया नेताओं पर चढ़ी वीआईपी कल्चर
- सांसद व विधायक प्रतिनिधि लिखाकर सड़कों पर भरते हैं फर्राटा
- जानकारी के बाद भी कार्रवाई के कतरा रही पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी के छुटभैया नेताओं पर वीआईपी कल्चर चढ़ चुका है। बिना किसी से पूछे वह अपने चार पहिया वाहनों में सांसद या विधायक प्रतिनिधि लिखवाकर रौब गालिब कर रहे हैं। वाहन चेकिंग करने वाली पुलिस उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। यह वाहन बालू लदे वाहनों को भी पास कराने में इस्तेमाल किए जाते हैं।
कौशाम्बी में भाजपा के तीन विधायक व एक सांसद हैं। इन नेताओं को भी शायद नहीं पता होगा कि कौन कार्यकर्ता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा है। जिले में करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसे चार पहिया वाहन है जिन पर सांसद या विधायक प्रतिनिधि लिखा गया है। सांसद व विधायक तो बड़े शब्दों में लिखा जाता है लेकिन प्रतिनिधि बहुत की बारीक लाइन में लिखवाया जाता है। वाहनों में हूटर भी लगाया गया है। यह वाहन चालक बेखौफ होकर सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। पिछले दिनों कोखराज इलाके के एक ढाबे में हुई मारपीट के मामले में ऐसा ही वाहन चर्चा में आया था। ऐसे वाहनों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। वाहन चालक पुलिस की चेकिंग को भी तरजीह नहीं देते हैं। वाहनों पर काली फिल्म कभी किसी अपराधी को जिले से बाहर निकालने में काम आ सकती है। इस बाबत पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि माननीयों की छोटी सी भी शिकायत पर अफसर बिना जांच के कार्रवाई कर देते हैं। वह लोग नौकरी करने के लिए आए हैं। बिना मतलब का झमेला लेने से क्या फायदा।
इनका कहना है
हूटर, काली फिल्म आदि के बाबत समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई कराई जाती है। प्रेस, पुलिस लिखी गाड़ियों को भी चेक किया जाता है। यातायात पुलिस को निर्देश दिया जाएगा कि वह माननीय के नाम का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों की भी जांच करें।
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अशोक कुमार, एएसपी
चायल तहसील के अफसर बेलगाम, परेशान हुए फरियादी
- सुबह 11 बजे तक तहसील में नहीं पहुंचे थे एक भी अफसर
फोटो नं-12,13
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। चायल तहसील में गुरुवार को सन्नाटा छाया रहा। एसडीएम के अवकाश पर होने के कारण अन्य अफसर भी दफ्तर नहीं पहुंचे। इसे लेकर फरियादियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दोपहर बाद कार्यालय पहुंची तहसीलदार कल्पना चौहान का दावा है कि उन्होंने जनता के शिकायती पत्रों को सुना।
चायल के एसडीएम घनश्याम दो दिन के अवकाश पर गए हैं। एसडीएम के अवकाश पर होने के कारण यहां पर तैनात अफसर भी लापरवाह हो गए। गुरुवार को तहसील में तहसीलदार व नायब तहसीलदार सुबह 11 बजे तक नहीं पहुंचे थे। किसी का वरासत का काम था तो कोई आय-जाति प्रमाण पत्र में रिपोर्ट लगवाने के लिए भटक रहा था। अफसरों के नहीं होने से कर्मचारी भी अपने काम में व्यस्त रहे। हालात यह रहा कि चपरासी ने दफ्तरों का ताला तक नहीं खोला। नायब तहसीलदार पदमेश श्रीवास्तव का भी कोई अता-पता नहीं था। फरियादियों को किसी ने यह भी बताने की जहमत नहीं समझी कि अफसर दफ्तर में आएंगे भी या नहीं। इस बाबत तहसीलदार कल्पना चौहान ने स्वीकार किया कि वह दफ्तर देरी से पहुंची थी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में एक काउंटर दाखिल करना था। इस वजह से दफ्तर पहुंचने में देरी हुई। दोपहर में वह कार्यालय पहुंची और लोगों की समस्या सुन उनका निदान किया।
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- सांसद व विधायक प्रतिनिधि लिखाकर सड़कों पर भरते हैं फर्राटा
- जानकारी के बाद भी कार्रवाई के कतरा रही पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी के छुटभैया नेताओं पर वीआईपी कल्चर चढ़ चुका है। बिना किसी से पूछे वह अपने चार पहिया वाहनों में सांसद या विधायक प्रतिनिधि लिखवाकर रौब गालिब कर रहे हैं। वाहन चेकिंग करने वाली पुलिस उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। यह वाहन बालू लदे वाहनों को भी पास कराने में इस्तेमाल किए जाते हैं।
कौशाम्बी में भाजपा के तीन विधायक व एक सांसद हैं। इन नेताओं को भी शायद नहीं पता होगा कि कौन कार्यकर्ता उनके नाम का इस्तेमाल कर रहा है। जिले में करीब दो दर्जन से ज्यादा ऐसे चार पहिया वाहन है जिन पर सांसद या विधायक प्रतिनिधि लिखा गया है। सांसद व विधायक तो बड़े शब्दों में लिखा जाता है लेकिन प्रतिनिधि बहुत की बारीक लाइन में लिखवाया जाता है। वाहनों में हूटर भी लगाया गया है। यह वाहन चालक बेखौफ होकर सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। पिछले दिनों कोखराज इलाके के एक ढाबे में हुई मारपीट के मामले में ऐसा ही वाहन चर्चा में आया था। ऐसे वाहनों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। वाहन चालक पुलिस की चेकिंग को भी तरजीह नहीं देते हैं। वाहनों पर काली फिल्म कभी किसी अपराधी को जिले से बाहर निकालने में काम आ सकती है। इस बाबत पुलिस विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि माननीयों की छोटी सी भी शिकायत पर अफसर बिना जांच के कार्रवाई कर देते हैं। वह लोग नौकरी करने के लिए आए हैं। बिना मतलब का झमेला लेने से क्या फायदा।
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इनका कहना है
हूटर, काली फिल्म आदि के बाबत समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई कराई जाती है। प्रेस, पुलिस लिखी गाड़ियों को भी चेक किया जाता है। यातायात पुलिस को निर्देश दिया जाएगा कि वह माननीय के नाम का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों की भी जांच करें।
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अशोक कुमार, एएसपी
चायल तहसील के अफसर बेलगाम, परेशान हुए फरियादी
- सुबह 11 बजे तक तहसील में नहीं पहुंचे थे एक भी अफसर
फोटो नं-12,13
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। चायल तहसील में गुरुवार को सन्नाटा छाया रहा। एसडीएम के अवकाश पर होने के कारण अन्य अफसर भी दफ्तर नहीं पहुंचे। इसे लेकर फरियादियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दोपहर बाद कार्यालय पहुंची तहसीलदार कल्पना चौहान का दावा है कि उन्होंने जनता के शिकायती पत्रों को सुना।
चायल के एसडीएम घनश्याम दो दिन के अवकाश पर गए हैं। एसडीएम के अवकाश पर होने के कारण यहां पर तैनात अफसर भी लापरवाह हो गए। गुरुवार को तहसील में तहसीलदार व नायब तहसीलदार सुबह 11 बजे तक नहीं पहुंचे थे। किसी का वरासत का काम था तो कोई आय-जाति प्रमाण पत्र में रिपोर्ट लगवाने के लिए भटक रहा था। अफसरों के नहीं होने से कर्मचारी भी अपने काम में व्यस्त रहे। हालात यह रहा कि चपरासी ने दफ्तरों का ताला तक नहीं खोला। नायब तहसीलदार पदमेश श्रीवास्तव का भी कोई अता-पता नहीं था। फरियादियों को किसी ने यह भी बताने की जहमत नहीं समझी कि अफसर दफ्तर में आएंगे भी या नहीं। इस बाबत तहसीलदार कल्पना चौहान ने स्वीकार किया कि वह दफ्तर देरी से पहुंची थी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में एक काउंटर दाखिल करना था। इस वजह से दफ्तर पहुंचने में देरी हुई। दोपहर में वह कार्यालय पहुंची और लोगों की समस्या सुन उनका निदान किया।