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‘सौभाग्य’ से नहीं रोशन हो सके घर, अब रकम हड़पने की तैयारी
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‘सौभाग्य’ से नहीं रोशन हो सके घर
1688 मजरों में विद्युतीकरण व कनेक्शन देने का दिया गया था लक्ष्य
लक्ष्य के सापेक्ष काम नहीं पूरा कर सकी संस्था, अब भुगतान कराने की हो रही तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। सौभाग्य योजना से जिले में कराए गए विद्युतीकरण के नाम पर बडे़ पैमाने पर खेल किया गया है। जितने गांवों में विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया। वह भले ही पूरे नहीं हो सके हों, लेकिन आधे-अधूरे काम के बीच फाइनल एमबी कराने की तैयारी की जा रही है।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय और सौभाग्य योजना से जिले के गांवों में विद्युतीकरण कराया गया है। पंडित दीन दयाल योजना से करीब 1310 गांवों में विद्युतीकरण करना था। इसी तरह सौभाग्य योजना से जिले के करीब 1688 मजरों में विद्युतीकरण कराने के साथ ही लोगों को मुफ्त में कनेक्शन दिया जाना था। बिजली विभाग का दावा है कि सौभाग्य योजना से 50 हजार लोगों को कनेक्शन दिया गया। बताया जाता है कि दोनों योजनाओं के तहत शासन से मिले 167 करोड़ के बजट को भी कार्यदाई संस्था मेसर्स विश्वनाथ व एल एंड टी खर्च नहीं कर सकी। 31 मार्च तक एल एंड टी ने 1375 मजरों में ही काम कराए जाने का दावा किया। जिसमें कंपनी की तरफ से आठ सौ मीटर तार और पांच सौ नए ट्रांसफार्मर लगाने का दावा किया गया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी किसी भी गांव में काम पूरा नहीं कर सकी है। एल एंड टी के डिस्ट्रिक इंचार्ज रूपेश कुमार का कहना है कि अब तक उन्होंने जो भी काम कराए हैं, विभाग ने उसका भुगतान नहीं किया। सिर्फ 25 लाख का भुगतान किया गया है। इसके कारण काम पूरा नहीं हो सका। इनका कहना है कि जिले के 1375 मजरों में काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी बिजली विभाग भुगतान नहीं कर सका।
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ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई
मंझनपुर। विभागीयअफसर अब सरकारी खजाने को चूना लगाने की जुगत में हैं। उदाहरण के तौर पर मुख्यालय से सटे सेलहरा पूरब गांव को लिया जा सकता है। यहां एलएंडटी ने विद्युतीकरण कराया, लेकिन ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई। जिसके कारण दो महीने में तीन बार ओवरलोड होने से ट्रांसफार्मर फुंक गया। नियम के मुताबिक विद्युतीकरण कराने वाली संस्था को यहां 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाना था, लेकिन 31 मार्च को बजट में लगी पाबंदी के बाद नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया जा सका। इस पर बिजली बिभाग के अफसरों ने बिजनेस प्लान के तहत सरकारी खजाने से ट्रांसफार्मर लगवाने का फैसला लिया, लेकिन मीडिया में खबर छपने के बाद अब संस्था पर दबाव बनाकर ट्रांसफार्मर लगवाया जा रहा है।
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अलवारा के लिए दुर्भाग्य बना ‘सौभाग्य’
मंझनपुर। सदर तहसील के अलवारा गांव में पहले विद्युतीकरण किया गया था। गांव के फकीराबाद, चक, सहित चार मजरों को सौभाग्य योजना से जोड़कर वहां विद्युतीकरण कराया गया। गांव के नारायण केसरवानी, आदित्य सिंह, हेमंत तिवारी, अनंत कुमार, अशोक कुमार, कमलेश आदि का कहना है कि कार्यदाई संस्था ने कुछ खंभे खड़े करके अधूरी लाइन खींची है। सौ के करीब नए कनेक्शन दिए गए। गांव में पुराने तार व पोल से बिजली का कार्य कराया गया। पखवाड़े भर पहले चार पोल टूट गए। इन्हें संस्था के लोग बदलने नहीं आ रहे हैं। गांव के जिन घरों में मीटर लगाया गया, उसे भी अब तक मेन लाइन से जोड़ा नहीं जा सका।
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इनका कहना है
यह बात सही है कि कार्यदाई संस्था पूरा बजट खर्च नहीं कर सकी। जिन गांवों में कार्य पूरा होने की रिपोर्ट आई है वहां जांच कराई जाएगी। तीन स्तर पर जांच होना है। जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।-सुशील कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता
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1688 मजरों में विद्युतीकरण व कनेक्शन देने का दिया गया था लक्ष्य
लक्ष्य के सापेक्ष काम नहीं पूरा कर सकी संस्था, अब भुगतान कराने की हो रही तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। सौभाग्य योजना से जिले में कराए गए विद्युतीकरण के नाम पर बडे़ पैमाने पर खेल किया गया है। जितने गांवों में विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा गया। वह भले ही पूरे नहीं हो सके हों, लेकिन आधे-अधूरे काम के बीच फाइनल एमबी कराने की तैयारी की जा रही है।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय और सौभाग्य योजना से जिले के गांवों में विद्युतीकरण कराया गया है। पंडित दीन दयाल योजना से करीब 1310 गांवों में विद्युतीकरण करना था। इसी तरह सौभाग्य योजना से जिले के करीब 1688 मजरों में विद्युतीकरण कराने के साथ ही लोगों को मुफ्त में कनेक्शन दिया जाना था। बिजली विभाग का दावा है कि सौभाग्य योजना से 50 हजार लोगों को कनेक्शन दिया गया। बताया जाता है कि दोनों योजनाओं के तहत शासन से मिले 167 करोड़ के बजट को भी कार्यदाई संस्था मेसर्स विश्वनाथ व एल एंड टी खर्च नहीं कर सकी। 31 मार्च तक एल एंड टी ने 1375 मजरों में ही काम कराए जाने का दावा किया। जिसमें कंपनी की तरफ से आठ सौ मीटर तार और पांच सौ नए ट्रांसफार्मर लगाने का दावा किया गया, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी किसी भी गांव में काम पूरा नहीं कर सकी है। एल एंड टी के डिस्ट्रिक इंचार्ज रूपेश कुमार का कहना है कि अब तक उन्होंने जो भी काम कराए हैं, विभाग ने उसका भुगतान नहीं किया। सिर्फ 25 लाख का भुगतान किया गया है। इसके कारण काम पूरा नहीं हो सका। इनका कहना है कि जिले के 1375 मजरों में काम पूरा हो चुका है। इसके बाद भी बिजली विभाग भुगतान नहीं कर सका।
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ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई
मंझनपुर। विभागीयअफसर अब सरकारी खजाने को चूना लगाने की जुगत में हैं। उदाहरण के तौर पर मुख्यालय से सटे सेलहरा पूरब गांव को लिया जा सकता है। यहां एलएंडटी ने विद्युतीकरण कराया, लेकिन ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ाई। जिसके कारण दो महीने में तीन बार ओवरलोड होने से ट्रांसफार्मर फुंक गया। नियम के मुताबिक विद्युतीकरण कराने वाली संस्था को यहां 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाना था, लेकिन 31 मार्च को बजट में लगी पाबंदी के बाद नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया जा सका। इस पर बिजली बिभाग के अफसरों ने बिजनेस प्लान के तहत सरकारी खजाने से ट्रांसफार्मर लगवाने का फैसला लिया, लेकिन मीडिया में खबर छपने के बाद अब संस्था पर दबाव बनाकर ट्रांसफार्मर लगवाया जा रहा है।
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अलवारा के लिए दुर्भाग्य बना ‘सौभाग्य’
मंझनपुर। सदर तहसील के अलवारा गांव में पहले विद्युतीकरण किया गया था। गांव के फकीराबाद, चक, सहित चार मजरों को सौभाग्य योजना से जोड़कर वहां विद्युतीकरण कराया गया। गांव के नारायण केसरवानी, आदित्य सिंह, हेमंत तिवारी, अनंत कुमार, अशोक कुमार, कमलेश आदि का कहना है कि कार्यदाई संस्था ने कुछ खंभे खड़े करके अधूरी लाइन खींची है। सौ के करीब नए कनेक्शन दिए गए। गांव में पुराने तार व पोल से बिजली का कार्य कराया गया। पखवाड़े भर पहले चार पोल टूट गए। इन्हें संस्था के लोग बदलने नहीं आ रहे हैं। गांव के जिन घरों में मीटर लगाया गया, उसे भी अब तक मेन लाइन से जोड़ा नहीं जा सका।
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इनका कहना है
यह बात सही है कि कार्यदाई संस्था पूरा बजट खर्च नहीं कर सकी। जिन गांवों में कार्य पूरा होने की रिपोर्ट आई है वहां जांच कराई जाएगी। तीन स्तर पर जांच होना है। जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।-सुशील कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता