{"_id":"5caba14fbdec22142c5cc1ec","slug":"151554751823-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुलसीदास ज्योति और रत्नावली बाती: मोरारी बापू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तुलसीदास ज्योति और रत्नावली बाती: मोरारी बापू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो नं-
तुलसीदास ज्योति और रत्नावली दीपक : मोरारी बापू
सोमवार को रत्नावली धाम में कथा सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। संत मोरारी बापू ने कहा कि दीपक के बगैर ज्योति और ज्योति के बिना दीपक का कोई मूल्य नहीं होता है। तुलसीदास अखंड ज्योति और रत्नावली दीपक का प्रतिरूप हैं। यदि ये दीया नहीं होता तो ज्योति नहीं जलती और रामचरित मानस का उजाला जग में नहीं फैलता। सोमवार को रत्नावली धाम में कथा सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से महेवा घाट पर आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने मानस रत्नावली के प्रसंग की महत्ता बताई। कहा कि रत्नावली मां में यथार्थ दर्शन है। रत्नावली शैलपुत्री हैं क्योंकि उनके पिता दीनबंधु से कोई शास्त्रार्थ नहीं कर सकता था। रत्नावली एक अचल, अटल बाप की बेटी थीं। रत्नावली ब्रह्मचारिणी हैं। रत्नावली चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्धमाता भी हैं। जिसने हम सबको परम धर्म सिखाया। रत्नावली भ्रम से दूर करती हैं। कालरात्रि के रूप में मृत्यु के भय का निवारण करती हैं। उन्होंने कहा कि व्यासपीठ किसी को सिद्ध करने नहीं बल्कि मैं स्वयं को शुद्ध करने आया हूं। मेरी कल्पना में कोई रुचि नहीं है। लेकिन शिव रूपी संकल्पना बहुत जरूरी है। इस दौरान कथा के मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, रविंद्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल आदि ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
----
ईश्वर की प्रमाणिकता में संदेह नहीं करना चाहिए
मंझनपुर। रामकथा का अधिकार प्राप्त करने के लिए शिव चरित्र का दर्शन करना होगा। हनुमान प्रभु शिव का विग्रह यानी अवतार हैं। जिनके हृदय से ही राम के दर्शन होते हैं। शिव चेतना वाले ही बार-बार कथा में जाते हैं। ईश्वर की प्रमाणिकता में संदेह नही करना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास की पूरी साधना हरिनाम पर आधारित है। भगवान का नाम स्मरण प्रमुख है और नाम स्मरण के कारण शरीर पुण्यमय बनता है।
विज्ञापन
-----------
राम नाम श्वास है
कथाओं का रूप समय के हिसाब से बदलता रहता है। लेकिन स्वरूप नहीं बदलता है। राम का नाम श्वास की तरह होता है। समय आने पर ही फल मिलता है। इसलिए राम का नाम जपना कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए। कथा से सबको प्रसन्नता प्राप्त होती है। अन्न का बिगाड़ ब्रह्म का अपमान है। हमें संत का क्षण और अन्न का कण कभी भी बिगाड़ना नहीं चाहिए।
------------
विपत्ति प्रकट होने के कई कारण
संपत्ति और विपत्ति दोनों ही अचानक आती है। हमारे कर्म और नासमझी विपत्ति प्रकट होने के कई कारणों में से एक हो सकते हैं। विपत्ति के बीज को यदि हम स्थान ना दें तो वह अपने आप खत्म हो जाएगी। यदि अज्ञानतावश वह बीज हमने बो भी दिया तो उसे सींचो मत, आदर मत दो। दु:ख हमारे जीवन यात्रा का स्वभाव है। भगवान का नाम स्मरण करने की आदत लग गई तो दुख की तीव्रता स्वत: कम हो जाती है।
------------
कुमार विश्वास के नगमों से आज गुलजार होगा रत्नावली धाम
पश्चिमशरीरा। महेवा घाट में मंगलवार शाम को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें कवि डॉ. कुमार विश्वास, सरदार मंजीत सिंह, योगिता चौहान, बुद्धिप्रकाश दधीच आदि कवि मोरारी बापू के सामने अपनी रचनाएं सुनाएंगे।
---------
चारो और राम रेला
मोरारी बापू की महेवा घाट में आयोजित रामकथा में सोमवार को श्रोताओं की आस्था और प्रगाढ़ता में वृद्धि देखने को मिली। पांडाल, भोजनशाला, सड़कें और गांव चारों ओर राम-राम जपते श्रोताओं की टोलियां आ-जा रही थी। कहीं विश्राम, कहीं भोजन तो कहीं कीर्तन में डूबें श्रोता आनंदोत्सव का आभास करा रहे थे। आसपास के गांव में भी राम का रेला दिखाई दे रहा है।
-----------
पहली बार देखे झूले चकरी
पश्चिमशरीरा। मोरारी बापू ने व्यास पीठ से रामकथा के साथ ही यहां के बच्चों के लिए झूला चकरी की नि:शुल्क व्यवस्था की इच्छा जाहिर की। आयोजक संत कृपा सनातन संस्था की ओर से कथा के तीसरे दिन सोमवार से यहां बच्चों के लिए नि:शुल्क झूले चकरी प्रारंभ कर दिए गए। पहली बार गांव में लगे झूला चकरी को देखकर बच्चों के साथ ही बडे़-बूढ़ों में भी उत्साह रहा।
-----------
मानस मसान का विमोचन
पश्चिमशरीरा। वाराणसी में आयोजित मोरारी बापू की 800 वीं रामकथा मानस मसान का सोमवार को विमोचन किया गया। उदयपुर राजस्थान निवासी रेखा सोनी ने गत वर्ष वाराणसी में आयोजित मानस मसान को संकलित किया था। इसका महेवा घाट रत्नावली में आयोजित रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को बापू ने व्यासपीठ से विमोचन किया।
विज्ञापन
तुलसीदास ज्योति और रत्नावली दीपक : मोरारी बापू
सोमवार को रत्नावली धाम में कथा सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। संत मोरारी बापू ने कहा कि दीपक के बगैर ज्योति और ज्योति के बिना दीपक का कोई मूल्य नहीं होता है। तुलसीदास अखंड ज्योति और रत्नावली दीपक का प्रतिरूप हैं। यदि ये दीया नहीं होता तो ज्योति नहीं जलती और रामचरित मानस का उजाला जग में नहीं फैलता। सोमवार को रत्नावली धाम में कथा सुनने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।
संत कृपा सनातन संस्थान की ओर से महेवा घाट पर आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को मोरारी बापू ने मानस रत्नावली के प्रसंग की महत्ता बताई। कहा कि रत्नावली मां में यथार्थ दर्शन है। रत्नावली शैलपुत्री हैं क्योंकि उनके पिता दीनबंधु से कोई शास्त्रार्थ नहीं कर सकता था। रत्नावली एक अचल, अटल बाप की बेटी थीं। रत्नावली ब्रह्मचारिणी हैं। रत्नावली चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्धमाता भी हैं। जिसने हम सबको परम धर्म सिखाया। रत्नावली भ्रम से दूर करती हैं। कालरात्रि के रूप में मृत्यु के भय का निवारण करती हैं। उन्होंने कहा कि व्यासपीठ किसी को सिद्ध करने नहीं बल्कि मैं स्वयं को शुद्ध करने आया हूं। मेरी कल्पना में कोई रुचि नहीं है। लेकिन शिव रूपी संकल्पना बहुत जरूरी है। इस दौरान कथा के मुख्य आयोजनकर्ता मदन पालीवाल, ट्रस्टी प्रकाश पुरोहित, रविंद्र जोशी, रूपेश व्यास, विकास पुरोहित, मंत्रराज पालीवाल आदि ने व्यासपीठ पर पुष्प अर्पित कर कथा श्रवण का लाभ लिया।
विज्ञापन
----
ईश्वर की प्रमाणिकता में संदेह नहीं करना चाहिए
मंझनपुर। रामकथा का अधिकार प्राप्त करने के लिए शिव चरित्र का दर्शन करना होगा। हनुमान प्रभु शिव का विग्रह यानी अवतार हैं। जिनके हृदय से ही राम के दर्शन होते हैं। शिव चेतना वाले ही बार-बार कथा में जाते हैं। ईश्वर की प्रमाणिकता में संदेह नही करना चाहिए। गोस्वामी तुलसीदास की पूरी साधना हरिनाम पर आधारित है। भगवान का नाम स्मरण प्रमुख है और नाम स्मरण के कारण शरीर पुण्यमय बनता है।
विज्ञापन
-----------
राम नाम श्वास है
कथाओं का रूप समय के हिसाब से बदलता रहता है। लेकिन स्वरूप नहीं बदलता है। राम का नाम श्वास की तरह होता है। समय आने पर ही फल मिलता है। इसलिए राम का नाम जपना कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए। कथा से सबको प्रसन्नता प्राप्त होती है। अन्न का बिगाड़ ब्रह्म का अपमान है। हमें संत का क्षण और अन्न का कण कभी भी बिगाड़ना नहीं चाहिए।
------------
विपत्ति प्रकट होने के कई कारण
संपत्ति और विपत्ति दोनों ही अचानक आती है। हमारे कर्म और नासमझी विपत्ति प्रकट होने के कई कारणों में से एक हो सकते हैं। विपत्ति के बीज को यदि हम स्थान ना दें तो वह अपने आप खत्म हो जाएगी। यदि अज्ञानतावश वह बीज हमने बो भी दिया तो उसे सींचो मत, आदर मत दो। दु:ख हमारे जीवन यात्रा का स्वभाव है। भगवान का नाम स्मरण करने की आदत लग गई तो दुख की तीव्रता स्वत: कम हो जाती है।
------------
कुमार विश्वास के नगमों से आज गुलजार होगा रत्नावली धाम
पश्चिमशरीरा। महेवा घाट में मंगलवार शाम को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसमें कवि डॉ. कुमार विश्वास, सरदार मंजीत सिंह, योगिता चौहान, बुद्धिप्रकाश दधीच आदि कवि मोरारी बापू के सामने अपनी रचनाएं सुनाएंगे।
---------
चारो और राम रेला
मोरारी बापू की महेवा घाट में आयोजित रामकथा में सोमवार को श्रोताओं की आस्था और प्रगाढ़ता में वृद्धि देखने को मिली। पांडाल, भोजनशाला, सड़कें और गांव चारों ओर राम-राम जपते श्रोताओं की टोलियां आ-जा रही थी। कहीं विश्राम, कहीं भोजन तो कहीं कीर्तन में डूबें श्रोता आनंदोत्सव का आभास करा रहे थे। आसपास के गांव में भी राम का रेला दिखाई दे रहा है।
-----------
पहली बार देखे झूले चकरी
पश्चिमशरीरा। मोरारी बापू ने व्यास पीठ से रामकथा के साथ ही यहां के बच्चों के लिए झूला चकरी की नि:शुल्क व्यवस्था की इच्छा जाहिर की। आयोजक संत कृपा सनातन संस्था की ओर से कथा के तीसरे दिन सोमवार से यहां बच्चों के लिए नि:शुल्क झूले चकरी प्रारंभ कर दिए गए। पहली बार गांव में लगे झूला चकरी को देखकर बच्चों के साथ ही बडे़-बूढ़ों में भी उत्साह रहा।
-----------
मानस मसान का विमोचन
पश्चिमशरीरा। वाराणसी में आयोजित मोरारी बापू की 800 वीं रामकथा मानस मसान का सोमवार को विमोचन किया गया। उदयपुर राजस्थान निवासी रेखा सोनी ने गत वर्ष वाराणसी में आयोजित मानस मसान को संकलित किया था। इसका महेवा घाट रत्नावली में आयोजित रामकथा के तीसरे दिन सोमवार को बापू ने व्यासपीठ से विमोचन किया।