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Kasganj News: हत्या के दोषी पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा
Thu, 05 Feb 2026 02:36 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Thu, 05 Feb 2026 02:36 AM IST
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कासगंज। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने एक गंभीर हत्या प्रकरण में दोषी पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर 1. 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। जबकि एक अन्य पुत्र व पत्नी को दोष मुक्त कर दिया।
गंजडुंडवारा निवासी मदन गोपाल ने तहरीर में बताया था कि 29 मार्च 2024 की रात 9:30 बजे अभियुक्त रत्नेश, बृजेश, दिनेश, आशीष, अतुल, अंकुश, आनंद, विशाल और ज्ञान देवी लाठी-डंडा, सरिया और तेज धारदार हथियार लेकर उसके घर में घुस आए। गालियां देते हुए पुत्र अभिषेक गौतम और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला किया।
आशीष और रत्नेश ने अभिषेक के सिर पर सरिया से प्रहार किया, जिससे वह बेहोश हो गया। अभियुक्तों ने घरवालों के साथ मारपीट की। चीख-पुकार पर पहुंचे पड़ोसियों ने उन्हें बचाया। अभिषेक को 108 एम्बुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गंजडुंडवारा भेजा गया। उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस की विवेचना में ब्रजेश, विशाल, दिनेश, आनंद की नामजदगी गलत पाई गई। रत्नेश, आशीष, अतुल, अंकुश व ज्ञान देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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कोर्ट ने अंकुश की पत्रावली अलग कर दी। कोर्ट में रत्नेश व आशीष का धारा 302 में दोष सिद्ध हो गया। प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। धारा 452/34 के तहत प्रत्येक को दो-दो वर्ष के कारावास एवं पांंच-पांच हजार रुपये के जुर्माने तथा धारा 323 में तीन-तीन माह की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ चलेंगी। अतुल व ज्ञान देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
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गंजडुंडवारा निवासी मदन गोपाल ने तहरीर में बताया था कि 29 मार्च 2024 की रात 9:30 बजे अभियुक्त रत्नेश, बृजेश, दिनेश, आशीष, अतुल, अंकुश, आनंद, विशाल और ज्ञान देवी लाठी-डंडा, सरिया और तेज धारदार हथियार लेकर उसके घर में घुस आए। गालियां देते हुए पुत्र अभिषेक गौतम और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला किया।
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आशीष और रत्नेश ने अभिषेक के सिर पर सरिया से प्रहार किया, जिससे वह बेहोश हो गया। अभियुक्तों ने घरवालों के साथ मारपीट की। चीख-पुकार पर पहुंचे पड़ोसियों ने उन्हें बचाया। अभिषेक को 108 एम्बुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गंजडुंडवारा भेजा गया। उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस की विवेचना में ब्रजेश, विशाल, दिनेश, आनंद की नामजदगी गलत पाई गई। रत्नेश, आशीष, अतुल, अंकुश व ज्ञान देवी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
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कोर्ट ने अंकुश की पत्रावली अलग कर दी। कोर्ट में रत्नेश व आशीष का धारा 302 में दोष सिद्ध हो गया। प्रत्येक को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। धारा 452/34 के तहत प्रत्येक को दो-दो वर्ष के कारावास एवं पांंच-पांच हजार रुपये के जुर्माने तथा धारा 323 में तीन-तीन माह की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ चलेंगी। अतुल व ज्ञान देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।