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Kasganj News: शिक्षक... जिन्होंने शिक्षा की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दीं
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फोटो 30 - मनोज कुमार शिक्षक। स्रोत : संवाद
कासगंज। शिक्षक वह दीपक है जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को आलाेकित करता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर ऐसे चार समर्पित और नवाचारी शिक्षकों के योगदान को नमन है। जिन्होंने अपनी लगन, अनुशासन और अनूठे प्रयासों से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा दोनों बदल दी हैं।
1. मनोज कुमार (प्रधानाचार्य, कंपोजिट विद्यालय दोकेली)
आर्थिक तंगी में बने प्रतिभाओं के ''छात्रवृत्ति सारथी'': ग्रामीण अंचल के गरीब बच्चों के लिए प्रधानाचार्य मनोज कुमार वरदान साबित हो रहे हैं। उनके सटीक मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि बीते पांच वर्षों में उनके विद्यालय के 44 बच्चों ने राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा पास की है। चयनित प्रत्येक छात्र को केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति मिल रही है जिससे आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटती।
2. सुनील कुमार आर्य (इंचार्ज प्रधानाचार्य, जूनियर हाईस्कूल अभयपुरा, अमांपुर)
राज्य शिक्षक पुरस्कार सम्मानित, खेल और विज्ञान में गाड़े झंडे: अमांपुर के अभयपुरा स्कूल में तैनात सुनील आर्य नवाचार की जीती-जागती मिसाल हैं। उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2020 में राज्य शिक्षक पुरस्कार मिल चुका है। उनके मार्गदर्शन में बच्चों ने पीटी घोस और इंस्पायर अवॉर्ड में अपनी वैज्ञानिक सोच का लोहा मनवाया है जबकि उनके तराशे तीन छात्र खेलकूद में राज्य स्तर तक कासगंज का नाम रोशन कर चुके हैं।
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3. धनंजय लोधी (प्रधानाचार्य, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला)
सलेमपुर को बनाया निपुण विद्यालय : प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला के प्रधानाचार्य धनंजय लोधी ने निपुण भारत मिशन को जमीन पर उतारा है। खेल-खेल में पढ़ाने की उनकी कला का असर है कि मूल्यांकन में स्कूल के 80 प्रतिशत बच्चे निपुण पाए गए। आज इस स्कूल की पढ़ाई का स्तर प्राइवेट कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। इस वर्ष उनका चयन राज्य पुरस्कार के लिए हुआ है।
4. समीक्षा सिंह जादौन (जिला क्रीड़ा प्रभारी, माध्यमिक शिक्षा)
ग्रामीण माटी से तराश रहीं राज्य स्तरीय विजेता: माध्यमिक शिक्षा की जिला क्रीड़ा प्रभारी समीक्षा सिंह जादौन सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी स्कूलों की छिपी खेल प्रतिभाओं को निखार रही हैं। उनके मार्गदर्शन में कासगंज के कई प्रतिभावान छात्र-छात्राएं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीत रहे हैं।
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1. मनोज कुमार (प्रधानाचार्य, कंपोजिट विद्यालय दोकेली)
आर्थिक तंगी में बने प्रतिभाओं के ''छात्रवृत्ति सारथी'': ग्रामीण अंचल के गरीब बच्चों के लिए प्रधानाचार्य मनोज कुमार वरदान साबित हो रहे हैं। उनके सटीक मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि बीते पांच वर्षों में उनके विद्यालय के 44 बच्चों ने राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा पास की है। चयनित प्रत्येक छात्र को केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष 12,000 रुपये की छात्रवृत्ति मिल रही है जिससे आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटती।
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2. सुनील कुमार आर्य (इंचार्ज प्रधानाचार्य, जूनियर हाईस्कूल अभयपुरा, अमांपुर)
राज्य शिक्षक पुरस्कार सम्मानित, खेल और विज्ञान में गाड़े झंडे: अमांपुर के अभयपुरा स्कूल में तैनात सुनील आर्य नवाचार की जीती-जागती मिसाल हैं। उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2020 में राज्य शिक्षक पुरस्कार मिल चुका है। उनके मार्गदर्शन में बच्चों ने पीटी घोस और इंस्पायर अवॉर्ड में अपनी वैज्ञानिक सोच का लोहा मनवाया है जबकि उनके तराशे तीन छात्र खेलकूद में राज्य स्तर तक कासगंज का नाम रोशन कर चुके हैं।
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3. धनंजय लोधी (प्रधानाचार्य, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला)
सलेमपुर को बनाया निपुण विद्यालय : प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला के प्रधानाचार्य धनंजय लोधी ने निपुण भारत मिशन को जमीन पर उतारा है। खेल-खेल में पढ़ाने की उनकी कला का असर है कि मूल्यांकन में स्कूल के 80 प्रतिशत बच्चे निपुण पाए गए। आज इस स्कूल की पढ़ाई का स्तर प्राइवेट कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। इस वर्ष उनका चयन राज्य पुरस्कार के लिए हुआ है।
4. समीक्षा सिंह जादौन (जिला क्रीड़ा प्रभारी, माध्यमिक शिक्षा)
ग्रामीण माटी से तराश रहीं राज्य स्तरीय विजेता: माध्यमिक शिक्षा की जिला क्रीड़ा प्रभारी समीक्षा सिंह जादौन सीमित संसाधनों के बावजूद सरकारी स्कूलों की छिपी खेल प्रतिभाओं को निखार रही हैं। उनके मार्गदर्शन में कासगंज के कई प्रतिभावान छात्र-छात्राएं राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीत रहे हैं।

फोटो 30 - मनोज कुमार शिक्षक। स्रोत : संवाद

फोटो 30 - मनोज कुमार शिक्षक। स्रोत : संवाद

फोटो 30 - मनोज कुमार शिक्षक। स्रोत : संवाद