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23 की मौत: बेयरिंग टूटने से 23 जिंदगियों की सांसों पर ‘फुलस्टॉप’, ट्रैक्टर के ब्रेक पेडल का भी नहीं लगा था लॉक
Sun, 25 Feb 2024 02:06 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कासगंज
अमर उजाला नेटवर्क, कासगंज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 25 Feb 2024 02:06 PM IST
सार
Kasganj Tractor Trolley Accident: कासगंज में दर्दनाक हादसा हुआ। माघ पूर्णिमा पर एटा के कसा गांव से बच्चे का मुंडन संस्कार कराने के लिए कासगंज के कादरगंज गंगा घाट जा रहे लोगों की ट्रैक्टर ट्रॉली बेयरिंग टूटने से तालाब में पलट गई। हादसे में आठ बच्चे, आठ महिलाओं समेत 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हो गए।
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Kasganj Accident
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ट्रैक्टर-ट्रॉली का सफर कितना खतरनाक होता है, यह शनिवार को कासगंज में हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली की दुर्घटना से स्पष्ट हो गया। ट्रैक्टर के साथ जुड़ी ट्रॉली के एक पहिये के बेयरिंग का टूटना और चालक के द्वारा ब्रेक लगाया जाना 23 जिंदगियों की सांसों पर ‘फुलस्टॉप’ लगा गया। स्वयं ट्रैक्टर के चालक सतेंद्र ने हादसे की यह वजह बताई।
सतेंद्र उस बच्चे सिद्दू के बाबा है जिसका मुंडन कादरगंज गंगाघाट पर होना था। बताया गया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली दरियावगंज की ओर से पटियाली की ओर जा रही थी। ककराला के पास पहुंचते ही ट्रॉली के पहिये का बेयरिंग टूट गया। बेयरिंग, टूटते ही ट्रॉली में झटका लगा।
चालक सतेंद्र को इसका अहसास हुआ तो उसने तुरंत ही ट्रैक्टर के ब्रेक लगाए, लेकिन ब्रेक के पैडल का लॉक निकला हुआ था। जिससे एक पहिये का ही ब्रेक लगा और ट्रैक्टर सड़क पर घूमते हुए तालाब में गिरकर पलट गया। यदि ट्रॉली का बेयरिंग सही होता तो नहीं टूटता और ब्रेक भी नहीं लगाने पड़ते। बेयरिंग टूटने पर ब्रेक लगाना ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के अनियंत्रित होने का कारण बन गया और 23 लोगों की जिंदगी काल के मुंह में समा गईं।
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देखते ही देखते घटनास्थल पर कोहराम और चीत्कार का मंजर बन गया। ट्रैक्टर ट्रॉली को तालाब से बाहर निकाला गया तब ब्रेक पैडल का लॉक खुला होने की जानकारी सामने आई। ट्रैक्टर के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों का कहना रहा कि ब्रेक पैडल का लॉक लगा होता तो शायद ट्रैक्टर अनियंत्रित नहीं होता। जब लॉक लगता है तो एक साथ पूरा ब्रेक आता है।
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सतेंद्र उस बच्चे सिद्दू के बाबा है जिसका मुंडन कादरगंज गंगाघाट पर होना था। बताया गया कि ट्रैक्टर-ट्रॉली दरियावगंज की ओर से पटियाली की ओर जा रही थी। ककराला के पास पहुंचते ही ट्रॉली के पहिये का बेयरिंग टूट गया। बेयरिंग, टूटते ही ट्रॉली में झटका लगा।
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चालक सतेंद्र को इसका अहसास हुआ तो उसने तुरंत ही ट्रैक्टर के ब्रेक लगाए, लेकिन ब्रेक के पैडल का लॉक निकला हुआ था। जिससे एक पहिये का ही ब्रेक लगा और ट्रैक्टर सड़क पर घूमते हुए तालाब में गिरकर पलट गया। यदि ट्रॉली का बेयरिंग सही होता तो नहीं टूटता और ब्रेक भी नहीं लगाने पड़ते। बेयरिंग टूटने पर ब्रेक लगाना ही ट्रैक्टर-ट्रॉली के अनियंत्रित होने का कारण बन गया और 23 लोगों की जिंदगी काल के मुंह में समा गईं।
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देखते ही देखते घटनास्थल पर कोहराम और चीत्कार का मंजर बन गया। ट्रैक्टर ट्रॉली को तालाब से बाहर निकाला गया तब ब्रेक पैडल का लॉक खुला होने की जानकारी सामने आई। ट्रैक्टर के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों का कहना रहा कि ब्रेक पैडल का लॉक लगा होता तो शायद ट्रैक्टर अनियंत्रित नहीं होता। जब लॉक लगता है तो एक साथ पूरा ब्रेक आता है।
ब्रेक का लॉक खोलकर केवल जोताई का काम किया जाता है। ट्रैक्टर के बारे में जानकारी रखने वाले राम खिलाड़ी ने बताया कि दोनों पहियों के अलग-अलग ब्रेक होते हैं। सड़क पर ब्रेक पैडल का लॉक लगाकर ही ट्रैक्टर चलाया जाता है।
ककराला का आदर्श तालाब बन गया खूनी तालाब
पटियाली-दरियावगंज मार्ग पर ककराला के जिस तालाब पर अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से भीषण हादसा हुआ उस तालाब को ग्रामीण अब खूनी तालाब बताने लगे हैं। तालाब का निर्माण बारिश का जल संचय करने, भूजल स्तर में सुधार करने के लिए कराया गया था। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन इसमें इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे के बाद ककराला स्थित यह तालाब काफी सुर्खियों में आ गया। तालाब में 4-5 फुट तक पानी है।
पटियाली-दरियावगंज मार्ग पर ककराला के जिस तालाब पर अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से भीषण हादसा हुआ उस तालाब को ग्रामीण अब खूनी तालाब बताने लगे हैं। तालाब का निर्माण बारिश का जल संचय करने, भूजल स्तर में सुधार करने के लिए कराया गया था। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक दिन इसमें इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे के बाद ककराला स्थित यह तालाब काफी सुर्खियों में आ गया। तालाब में 4-5 फुट तक पानी है।
ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने के बाद इस तालाब के पानी में 22 लोगों की दम घुट गई और उनकी मौत हो गई। मौके पर मौजूद ग्रामीण महिपाल अचानक बोलने लगे यह तालाब तो अब खूनी तालाब हो गया है। आसपास के लोग जब भी इस तालाब को देखेंगे तो इस हादसे को याद करेंगे। इस तालाब के सामने सड़क के दूसरी ओर भी एक तालाब बना हुआ है। यह ऐसा आदर्श तालाब है जिसमें न बैरिकेडिंग बनी है और न ही तालाब की ओर जाने का कोई एप्रोच रोड बना है।
तालाब के किनारे सड़क पर नहीं थी पटरी
ककराला का यह तालाब ठीक सड़क के किनारे बना हुआ है। सड़क के बाद तालाब की ओर सड़क की कोई पटरी नहीं है। सड़क के ठीक बाद ही तालाब की ओर ढलान और गड्ढे हैं। जिसकी वजह से अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राली सहित सीधा तालाब में गिरता चला गया। यदि पटरी होती तो शायद ट्रैक्टर चालक को ट्रैक्टर संभालने का मौका मिल पाता। घटनास्थल का यह दृश्य निर्माण विभाग और ग्राम विकास विभाग की लापरवाही को भी दर्शा रहा था।
ककराला का यह तालाब ठीक सड़क के किनारे बना हुआ है। सड़क के बाद तालाब की ओर सड़क की कोई पटरी नहीं है। सड़क के ठीक बाद ही तालाब की ओर ढलान और गड्ढे हैं। जिसकी वजह से अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्राली सहित सीधा तालाब में गिरता चला गया। यदि पटरी होती तो शायद ट्रैक्टर चालक को ट्रैक्टर संभालने का मौका मिल पाता। घटनास्थल का यह दृश्य निर्माण विभाग और ग्राम विकास विभाग की लापरवाही को भी दर्शा रहा था।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में नहीं हुई कोई क्षति
इतने बड़े हादसे का कारण बनी ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे के बाद तालाब से बाहर निकाली गई, लेकिन इस दुर्घटना में ट्रैक्टर और ट्रॉली क्षतिग्रस्त नहीं हुई। घटनास्थल पर पहुंचने वाले लोग भी ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखते नजर आ रहे थे और अपने-अपने तरीकों से घटना के बारे में चर्चा कर रहे थे।
इतने बड़े हादसे का कारण बनी ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे के बाद तालाब से बाहर निकाली गई, लेकिन इस दुर्घटना में ट्रैक्टर और ट्रॉली क्षतिग्रस्त नहीं हुई। घटनास्थल पर पहुंचने वाले लोग भी ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखते नजर आ रहे थे और अपने-अपने तरीकों से घटना के बारे में चर्चा कर रहे थे।