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Kasganj News: कीलों वाली बैरिंग ट्रॉली पर दंडौती करते हुए निकले शिवभक्त
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फोटो 19- कीलों के तख्ते पर लेटकर गंगाजल ले जाते हुए कांवड़िए। स्रोत संवाद
सोरोंजी। पवित्र श्रावण मास में भोले की साधना के एक से बढ़कर एक अनूठे नजारे तीर्थनगरी में देखने को मिल रहे हैं। शिव की भक्ति में सराबोर कांवड़िए बाबा को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत कठिन साधना का मार्ग चुन रहे हैं। ऐसा ही सोमवार को हाथरस के मेंडू से आए तीन शिवभक्तों की कठिन साधना का हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया, जहां ये कांवड़िए कीलों से भरी बैरिंग ट्रॉली पर दंडौती करते हुए अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर रहे हैं।
लहरा घाट से मेंडू तक का यह सफर लगभग 75 किलोमीटर लंबा है। चुभती हुई कीलों की सेज पर लेटकर ''बम-बम भोले'' के जयकारे लगाते हुए इन श्रद्धालुओं के आगे बढ़ने का जज्बा हर किसी को अचंभित कर रहा है। हाथरस के मेंडू निवासी कुणाल गोस्वामी, सागर गोस्वामी और अजय गोस्वामी जब इस अनोखी दंडौती कांवड़ के साथ निकले तो उनके चेहरे पर अद्भुत उत्साह और अटूट श्रद्धा नजर आई।
जब उनसे इस बेहद कठिन मार्ग को चुनने का कारण पूछा गया, तो उनका कहना था कि यह सब भोलेनाथ की ही प्रेरणा और शक्ति है। उनका विश्वास है कि संकटों को दूर करने वाले भोले ही उनके इस कठिन रास्ते को आसान बना रहे हैं। तीर्थनगरी और मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति की निगाहें इस अद्भुत कांवड़ यात्रा पर टिकी रहीं और सभी इनकी निष्ठा की सराहना करते दिखे।
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लहरा घाट से मेंडू तक का यह सफर लगभग 75 किलोमीटर लंबा है। चुभती हुई कीलों की सेज पर लेटकर ''बम-बम भोले'' के जयकारे लगाते हुए इन श्रद्धालुओं के आगे बढ़ने का जज्बा हर किसी को अचंभित कर रहा है। हाथरस के मेंडू निवासी कुणाल गोस्वामी, सागर गोस्वामी और अजय गोस्वामी जब इस अनोखी दंडौती कांवड़ के साथ निकले तो उनके चेहरे पर अद्भुत उत्साह और अटूट श्रद्धा नजर आई।
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जब उनसे इस बेहद कठिन मार्ग को चुनने का कारण पूछा गया, तो उनका कहना था कि यह सब भोलेनाथ की ही प्रेरणा और शक्ति है। उनका विश्वास है कि संकटों को दूर करने वाले भोले ही उनके इस कठिन रास्ते को आसान बना रहे हैं। तीर्थनगरी और मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति की निगाहें इस अद्भुत कांवड़ यात्रा पर टिकी रहीं और सभी इनकी निष्ठा की सराहना करते दिखे।
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