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Kasganj News: उर्स में उमड़ा जायरीनों का सैलाब, गूंजा भाईचारे का पैगाम
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फोटो05पटियाली में आयोजित मुकाबला ए कब्बाली कार्यक्रम में कब्बाली पेश करते कलाकार। संवाद
पटियाली। स्टेशन रोड स्थित हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक मानी जाने वाली दरगाह हजरत हाजी बजरुद्दीन शाह बाबा का दो दिवसीय उर्स अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ। सोमवार को कव्वाली के मुकाबले, जायरीनों का सैलाब और भाईचारे का संदेश माहौल में घुला रहा।
सोमवार रात नमाज-ए-ईशा के बाद शुरू हुए उर्स का मुख्य आकर्षण सूफियाना मुकाबला-ए-कव्वाली रहा, जिसने पूरी रात समां बांधे रखा। उर्स की शुरुआत से ही दरगाह परिसर में जायरीनों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न कोनों से आए अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर फूल और चादर पेश कर अपनी मन्नतें मांगीं और मुल्क में अमन-चैन की दुआ की।
उर्स के दौरान लगे मेले में लोगों ने मीना बाजार और खेल-खिलौनों की दुकानों पर जमकर खरीदारी का आनंद लिया। जायरीनों की सेवा के लिए जगह-जगह लंगर के इंतजाम किए गए थे। वहीं उर्स कमेटी की ओर से भी एक विशाल लंगर का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने मिलकर प्रसाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष भूरा राइन, अल्लानूर राइन, मनोज, सज्जादानशीन एसएम फौजी बाबा, हिकमत फारूखी, शाहिद सेडो, मुन्ना मदारी, नोशाद आढ़तिया आदि मौजूद रहे।
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कव्वाली के मुकाबलों ने बांधा समां
कार्यक्रम में लखनऊ से आईं प्रसिद्ध कव्वाला जोया वारसी ने अपनी आवाज में जब, ''मस्जिद हो या मंदिर, चाहे गिरजाघर गुरुद्वारा, करम पिता तो एक ही है हमारा तुम्हारा'', यह कलाम पढ़ा तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
वहीं, मुरादाबाद से आए कव्वाल तजम्मिल मुजम्मिल सावरी ने अपनी रूहानी गायकी से लोगों को भाईचारे का संदेश देते हुए कहा, ''यूं मंदिरों मस्जिदों के मसाइल में न उलझो, घर-घर तो जाके देखो परेशान कौन है।'' इन सूफियाना कलामों को सुनकर जायरीन झूमने पर मजबूर हो गए और यह सिलसिला सुबह तक अनवरत चलता रहा।
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सोमवार रात नमाज-ए-ईशा के बाद शुरू हुए उर्स का मुख्य आकर्षण सूफियाना मुकाबला-ए-कव्वाली रहा, जिसने पूरी रात समां बांधे रखा। उर्स की शुरुआत से ही दरगाह परिसर में जायरीनों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न कोनों से आए अकीदतमंदों ने बाबा की मजार पर फूल और चादर पेश कर अपनी मन्नतें मांगीं और मुल्क में अमन-चैन की दुआ की।
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उर्स के दौरान लगे मेले में लोगों ने मीना बाजार और खेल-खिलौनों की दुकानों पर जमकर खरीदारी का आनंद लिया। जायरीनों की सेवा के लिए जगह-जगह लंगर के इंतजाम किए गए थे। वहीं उर्स कमेटी की ओर से भी एक विशाल लंगर का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने मिलकर प्रसाद ग्रहण किया।
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इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष भूरा राइन, अल्लानूर राइन, मनोज, सज्जादानशीन एसएम फौजी बाबा, हिकमत फारूखी, शाहिद सेडो, मुन्ना मदारी, नोशाद आढ़तिया आदि मौजूद रहे।
कव्वाली के मुकाबलों ने बांधा समां
कार्यक्रम में लखनऊ से आईं प्रसिद्ध कव्वाला जोया वारसी ने अपनी आवाज में जब, ''मस्जिद हो या मंदिर, चाहे गिरजाघर गुरुद्वारा, करम पिता तो एक ही है हमारा तुम्हारा'', यह कलाम पढ़ा तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
वहीं, मुरादाबाद से आए कव्वाल तजम्मिल मुजम्मिल सावरी ने अपनी रूहानी गायकी से लोगों को भाईचारे का संदेश देते हुए कहा, ''यूं मंदिरों मस्जिदों के मसाइल में न उलझो, घर-घर तो जाके देखो परेशान कौन है।'' इन सूफियाना कलामों को सुनकर जायरीन झूमने पर मजबूर हो गए और यह सिलसिला सुबह तक अनवरत चलता रहा।