{"_id":"148-49016","slug":"Kasganj-49016-148","type":"story","status":"publish","title_hn":"60 ईंट भट्ठों पर कभी भी गाज गिर सकती ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
60 ईंट भट्ठों पर कभी भी गाज गिर सकती
Kasganj
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
कासगंज। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के बगैर अनापत्ति प्रमाणपत्र के जिले में करीब 60 ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। प्रशासन इन भट्ठों पर कभी भी कार्रवाई कर सकता है। प्रशासन अभी तक इन्हें नजरअंदाज किए हुए हैं। इसी वजह से इनका अभी तक संचालन होना बताया जा रहा है।
जिले में करीब 160 ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। ये कासगंज के अलावा बिलराम, ढोलना, नदरई सहावर, अमांपुर, गंजडुडवारा, पटियाली, भरगैन आदि इलाके में संचालित हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशाें के अनुरूप खनन करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति का होना आवश्यक है। यह आदेश मिट्टी खनन पर भी लागू है। भट्ठा संचालकों के द्वारा मिट्टी का खनन करर्के इंट की पताई कराई जाती है। जिले में किसी भी ईंट भट्ठा संचालक के द्वारा अभी तक पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति प्राप्त नहीं की है। जिला प्रशासन के द्वारा भी इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करके बिना अनापत्ति के भट्टा संचालन पर रोक लगाई है, लेकिन इस रोग का असर तमाम नहीं है। अभी भी जिले में करीब पांच दर्जन भट्ठे ऐसे हैं जहां बिना अनापत्ति के ही संचालन किया जा रहा है। एवं कुछ भट्ठे के संचालकों द्वारा अपने भट्ठे स्वत: ही बंद कर दिए हैं एवं वे अनापत्ति आदेश को निरस्त करने को शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। ईट निर्माता संघ के अध्यक्ष नवल किशोर अग्रवाल एवं मंत्री सुभाष गर्ग का कहना है कि प्रशासन के रूख के बाद काफी भट्ठा संचालकों ने अपने भट्ठे का संचालन बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि अनापत्ति प्रमाण पत्र की वाध्यता उचित नहीं है।
अनापत्ति जरूरी: एडीएम
कासगंज (ब्यूरो)। अपर जिलाधिकारी बाल मंयक मिश्रा का इस संबध में कहना है कि जिला प्रशासन के द्वारा पहले से ही बिना केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति के ईट भट्ठ संचालक पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के द्वारा इस संबंध में जांच पड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी रोक के बावजूद बिना अनापत्ति के भट्टा का संचालन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में करीब 160 ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। ये कासगंज के अलावा बिलराम, ढोलना, नदरई सहावर, अमांपुर, गंजडुडवारा, पटियाली, भरगैन आदि इलाके में संचालित हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशाें के अनुरूप खनन करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति का होना आवश्यक है। यह आदेश मिट्टी खनन पर भी लागू है। भट्ठा संचालकों के द्वारा मिट्टी का खनन करर्के इंट की पताई कराई जाती है। जिले में किसी भी ईंट भट्ठा संचालक के द्वारा अभी तक पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति प्राप्त नहीं की है। जिला प्रशासन के द्वारा भी इस संबंध में दिशा निर्देश जारी करके बिना अनापत्ति के भट्टा संचालन पर रोक लगाई है, लेकिन इस रोग का असर तमाम नहीं है। अभी भी जिले में करीब पांच दर्जन भट्ठे ऐसे हैं जहां बिना अनापत्ति के ही संचालन किया जा रहा है। एवं कुछ भट्ठे के संचालकों द्वारा अपने भट्ठे स्वत: ही बंद कर दिए हैं एवं वे अनापत्ति आदेश को निरस्त करने को शासन प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। ईट निर्माता संघ के अध्यक्ष नवल किशोर अग्रवाल एवं मंत्री सुभाष गर्ग का कहना है कि प्रशासन के रूख के बाद काफी भट्ठा संचालकों ने अपने भट्ठे का संचालन बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि अनापत्ति प्रमाण पत्र की वाध्यता उचित नहीं है।
विज्ञापन
अनापत्ति जरूरी: एडीएम
कासगंज (ब्यूरो)। अपर जिलाधिकारी बाल मंयक मिश्रा का इस संबध में कहना है कि जिला प्रशासन के द्वारा पहले से ही बिना केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनापत्ति के ईट भट्ठ संचालक पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के द्वारा इस संबंध में जांच पड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी रोक के बावजूद बिना अनापत्ति के भट्टा का संचालन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन