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Kanpur News: जिंदगी और गणित दोनों में बड़े काम का जीरो

Sun, 25 Oct 2026 02:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:38 AM IST
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Zero is highly valuable in both life and mathematics.
शास्त्री भवन में अनुकृति रंगमंडल एंव संस्कृति निदेशालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय - फोटो : संवाद
कानपुर। राष्ट्रीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन मंचित नाटक जीरो बन गया हीरो ने दर्शकों को गुदगुदाने के साथ गंभीर संदेश भी दिया। इसमें शून्य की अहमियत को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। अनुकृति रंगमंडल की ओर से संस्कृति मंत्रालय और प्रदेश के संस्कृति निदेशालय के सहयोग से शास्त्री भवन में आयोजित समारोह में जयपुर के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। कहानी में कुछ छात्र गणित से परेशान हैं। परीक्षा परिणाम आने पर कुछ छात्रों को सात और आठ अंक मिलते हैं, लेकिन प्रतिशत नहीं निकलता। तभी अक्षय बताता है कि दुनिया से शून्य गायब हो गया है। छात्र शून्य के आविष्कारक आर्यभट्ट को बुलाते हैं।
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तब पता चलता है कि एक तांत्रिक ने शून्य चुरा लिया है। तांत्रिक से जीरो वापस मिलते ही सभी के अंकों का प्रतिशत निकलने लगता है। नाटक संदेश देता है कि शून्य के बिना गणित और जीवन अधूरा है। नाटक में अक्षय, मृत्युंजय, मोहित, अथर्व, मिघांश, वरालिका, दीक्षा, मान्या, लवी और समर्थ ने अभिनय किया। निर्देशन समर्थ शांडिल्य ने किया, जबकि तकनीकी ओवरऑल डायरेक्शन गगन मिश्रा का रहा। मौके पर डॉ. इंद्रमोहन रोहतगी, वरिष्ठ रंगकर्मी राधेश्याम दीक्षित, अनुकृति के संस्थापक सचिव डॉ. ओमेंद्र कुमार, सुभाष गुप्ता, आकाश शर्मा, विजय कुमार और रोशन आदि मौजूद रहे।
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मास्टर क्लास में सिखाए लाइट्स के गुर

नाट्य समारोह के अंतिम दिन मंचन से पहले दोपहर में एसएनए अवार्डी और जयपुर के रंगकर्मी गगन मिश्रा ने शास्त्री भवन में मास्टर क्लास आयोजित की। उन्होंने प्रतिभागियों को रंगमंच पर प्रकाश व्यवस्था की बारीकियां समझाईं और विभिन्न प्रकार की लाइट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी।
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प्रेम और कटुता के बीच हावी हुआ जहर

राष्ट्रीय नाट्य समारोह में दूसरे नाटक जहर का भी मंचन किया गया। इसमें प्रेम विवाह करने वाले युगल के जीवन की जटिलताओं और पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट को दिखाया गया। कहानी में एक व्यक्ति दुखों से परेशान होकर पत्नी की हत्या की योजना बनाता है। वह इंटरनेट पर खोजबीन कर जहर बनाने वाले केमिस्ट तक पहुंचता है। केमिस्ट उससे जहर मांगने का कारण पूछकर पूरी कहानी जान लेता है और चालाकी से उसी व्यक्ति को जहर पिला देता है। केमिस्ट के बहरेपन से नाटक में हास्य भी पैदा होता है। नाटक के लेखक पंकज सोनी और निर्देशक प्रवीन कुमार अरोड़ा हैं। अरोड़ा ने केमिस्ट, जबकि कामेश सेठी ने व्यक्ति की भूमिका निभाई। प्रकाश संचालन दिलीप सिंह, संगीत कुलदीप मिश्रा और प्रस्तुति प्रबंधन शैली अरोड़ा का रहा। नाटक ने रिश्तों में सम्मान और संवाद का संदेश दिया।
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