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यूपी: गर्भवती को ऑटो में हुआ प्रसव घंटों बाद भी नहीं पहुंची एंबूलेंस, परिजनों ने काटा हंगामा
Tue, 06 Aug 2019 08:54 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 06 Aug 2019 08:54 PM IST
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एंबूलेंस न पहुंचने से महिला ने ऑटो में दिया बच्चे को जन्म
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के हरदोई जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक और बड़ा मामला सामने आया है। मंगलवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र टड़ियावां ले जाते समय गर्भवती का प्रसव ऑटो में हो गया। सीएचसी पहुंचने पर जच्चा-बच्चा को भर्ती करने के नाम पर वसूली किए जाने का आरोप लगाकर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
प्रसूता के परिजनों ने स्थिति ठीक न होने और रुपये न देने के कारण डिस्चार्ज करने का भी आरोप लगाया है। टड़ियावां थाना क्षेत्र के ग्राम सिकंदरपुर के मजरा बंजरिया निवासी अजीज की पत्नी सम्मू गर्भवती थी। मंगलवार सुबह उसे प्रसव पीड़ा हुई तो पति अजीज ने एंबुलेंस सेवा के लिए टोल फ्री नंबर मिलाया, लेकिन नंबर नहीं लगा।
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प्रसूता के परिजनों ने स्थिति ठीक न होने और रुपये न देने के कारण डिस्चार्ज करने का भी आरोप लगाया है। टड़ियावां थाना क्षेत्र के ग्राम सिकंदरपुर के मजरा बंजरिया निवासी अजीज की पत्नी सम्मू गर्भवती थी। मंगलवार सुबह उसे प्रसव पीड़ा हुई तो पति अजीज ने एंबुलेंस सेवा के लिए टोल फ्री नंबर मिलाया, लेकिन नंबर नहीं लगा।
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इस पर जैसे-तैसे उसने ऑटो की व्यवस्था की। आटो से पत्नी सम्मो को सीएचसी टड़ियावां ले जाते समय रास्ते में ही प्रसव हो गया। सीएचसी पहुंचने पर सुबह छह बजे वहां मौजूद स्टाफ ने जच्चा-बच्चा को भर्ती कर एक हजार रुपये की मांग की। रुपये न देने पर दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिए जाने की बात कही।
इस पर अजीज ने 500 रुपये दे दिए। सुबह आठ बजे स्टाफ ने डिस्चार्ज लेटर बनाकर जच्चा-बच्चा को घर ले जाने के लिए कहा। इस पर अजीज ने कहा कि अभी जच्चा-बच्चा की स्थिति ठीक नहीं है। इसको लेकर स्टाफ और प्रसूता के परिजनों के बीच जमकर बहस हुई।
परिजनों का आरोप है कि एक हजार रुपये न देने के कारण छुट्टी कर दी गई। इस बारे में जब सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनु शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। फिर भी भर्ती कराए गए मरीजों का ब्योरा निकलवाकर मामले की जांच करेंगे।
इस पर अजीज ने 500 रुपये दे दिए। सुबह आठ बजे स्टाफ ने डिस्चार्ज लेटर बनाकर जच्चा-बच्चा को घर ले जाने के लिए कहा। इस पर अजीज ने कहा कि अभी जच्चा-बच्चा की स्थिति ठीक नहीं है। इसको लेकर स्टाफ और प्रसूता के परिजनों के बीच जमकर बहस हुई।
परिजनों का आरोप है कि एक हजार रुपये न देने के कारण छुट्टी कर दी गई। इस बारे में जब सीएचसी अधीक्षक डॉ. मनु शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है। फिर भी भर्ती कराए गए मरीजों का ब्योरा निकलवाकर मामले की जांच करेंगे।