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भूकंप के आगे सब छोड़-छाड़ भागे
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 27 Oct 2015 01:57 AM IST
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भूकंप का तेज झटका सोमवार को शहर में भी महसूस किया गया। इससे सहमे शहरवासी घर, दफ्तर छोड़कर सड़कों पर आ गए। खुले मैदान में खड़े रहे और ऊंची इमारतों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। कुछ इलाकों में झटकों के बाद सूचना पहुंची तो लोग अप्रैल में आए दो भूकंपों को याद कर चर्चा करने लगे।
दोपहर बाद 2.40 बजे अचानक उर्सला के डेंगू वार्ड में मौजूद फतेहपुर के रामसजीवन भूकंप-भूकंप चिल्लाते हुए नीचे की तरफ भागे। लोगों ने उन्हें भागते हुए देखा तो कुछ समझ नहीं पाए। इसी बीच कुछ और लोगों ने धरती डोलने का अनुभव किया और लोगों को सतर्क करते हुए दौड़े। स्वरूप नगर में जॉब करने वाली स्वाति शुक्ला ने बताया कि वह आफिस से नीचे आई थी कि चक्कर महसूस हुआ। कुछ लोगों को भागते देखा तो माजरा समझ में आ गया। स्वरूपनगर में मो. आरिफ, उस्मान, मीरा पाल भी काफी देर तक दहशत में रहे।
अपार्टमेंट और इसके दक्षिण की तरफ स्थित 10 मंजिले गुलमोहर -2, दूसरी तरफ नौ मंजिले गुलमोहर-1 और आसपास स्थित रतन स्तुति, आनंद लक्ष्मी अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों की भीड़ गेट के बाहर लगी थी। उनके चेहरे में दहशत नजर आ रही थी। कोई हाफ पैंट, तो कोई बरमूडा में ही ऊपर से नीचे उतर आया था। परिवार को लेकर महिलाएं अपार्टमेंटों से बाहर आ चुकी थीं। बच्चे कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या। सभी दोबारा झटके आने के डर से घर लौटने से डर रहे थे।
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नौ मंजिला यूपीएसआईडीसी के दफ्तर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इससे हड़कंप मचा और आनन-फानन में लिफ्ट बंद की गई। अधिकारी, कर्मचारी एक साथ सीढ़ियों से नीचे की ओर भागे। नौंवीं मंजिल से छठवीं मंजिल तक पहुंचते ही अफसर, कर्मचारी हांफने लगे। कुछ अधिकारी छठी मंजिल पर बने सीयूजीएल के दफ्तर में ही रुक गए और कहने लगे कि जो होना होगा, वह होकर रहेगा, अब उतरा नहीं जाता।
तमाम अधिकारी, कर्मचारी भागकर नीचे पहुंचे। डरे, सहमे घंटों खड़े रहे। दोबारा ऊपर जाने से कतराने लगे। जो लोग खाने की टिफिन लेकर आए थे, वह बिना खाना खाए चले गए। कहा कि अब मंगलवार को दफ्तर आएंगे।
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दोपहर बाद 2.40 बजे अचानक उर्सला के डेंगू वार्ड में मौजूद फतेहपुर के रामसजीवन भूकंप-भूकंप चिल्लाते हुए नीचे की तरफ भागे। लोगों ने उन्हें भागते हुए देखा तो कुछ समझ नहीं पाए। इसी बीच कुछ और लोगों ने धरती डोलने का अनुभव किया और लोगों को सतर्क करते हुए दौड़े। स्वरूप नगर में जॉब करने वाली स्वाति शुक्ला ने बताया कि वह आफिस से नीचे आई थी कि चक्कर महसूस हुआ। कुछ लोगों को भागते देखा तो माजरा समझ में आ गया। स्वरूपनगर में मो. आरिफ, उस्मान, मीरा पाल भी काफी देर तक दहशत में रहे।
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अपार्टमेंट और इसके दक्षिण की तरफ स्थित 10 मंजिले गुलमोहर -2, दूसरी तरफ नौ मंजिले गुलमोहर-1 और आसपास स्थित रतन स्तुति, आनंद लक्ष्मी अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों की भीड़ गेट के बाहर लगी थी। उनके चेहरे में दहशत नजर आ रही थी। कोई हाफ पैंट, तो कोई बरमूडा में ही ऊपर से नीचे उतर आया था। परिवार को लेकर महिलाएं अपार्टमेंटों से बाहर आ चुकी थीं। बच्चे कुछ समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर हुआ क्या। सभी दोबारा झटके आने के डर से घर लौटने से डर रहे थे।
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नौ मंजिला यूपीएसआईडीसी के दफ्तर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। इससे हड़कंप मचा और आनन-फानन में लिफ्ट बंद की गई। अधिकारी, कर्मचारी एक साथ सीढ़ियों से नीचे की ओर भागे। नौंवीं मंजिल से छठवीं मंजिल तक पहुंचते ही अफसर, कर्मचारी हांफने लगे। कुछ अधिकारी छठी मंजिल पर बने सीयूजीएल के दफ्तर में ही रुक गए और कहने लगे कि जो होना होगा, वह होकर रहेगा, अब उतरा नहीं जाता।
तमाम अधिकारी, कर्मचारी भागकर नीचे पहुंचे। डरे, सहमे घंटों खड़े रहे। दोबारा ऊपर जाने से कतराने लगे। जो लोग खाने की टिफिन लेकर आए थे, वह बिना खाना खाए चले गए। कहा कि अब मंगलवार को दफ्तर आएंगे।