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Kanpur News: किस्तों वाले लैपटॉप से कमा रहा था डॉलर और क्रिप्टो

Fri, 30 Oct 2026 02:14 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 02:14 AM IST
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Was earning dollars and crypto using a laptop bought on installments
कानपुर। भोली सी सूरत, साधारण पहनावा और एक कमरे के फ्लैट में रहने वाले अंकित को देखकर किसी को नहीं लगता था कि वह आतंकियों से जुड़ा स्लीपर मॉड्यूल भी हो सकता है। इस बात का पता जब उसके घरवालों को चला तो उनके पैरों से भी जमीन खिसक गई।
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रिक्शा चलाने वाले पिता प्रहलाद मानने को तैयार नहीं हैं कि किस्तों पर पुराना लैपटॉप खरीदकर उसे चलाने वाले अंकित की कमाई डॉलर और क्रिप्टो में हो रही थी। एटीएस को अंकित के एक अकाउंट में 6000 क्रिप्टो करेंसी भी मिली है। पिता ने बताया कि छह माह पहले ही अंकित ने गोविंदनगर से एक पुराना लैपटॉप किस्तों में खरीदा था जिसे वह रात-रात भर चलाया करता था। यह किसी को नहीं पता कि वह वीडियो गेम खेल रहा था कि देश के साथ आतंकी खेल। कानपुर में अंकित की तरह पहले भी कई बार स्लीपर मॉड्यूल एटीएस और एसटीएफ के हत्थे चढ़ चुके हैं।
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सूत्रों के अनुसार, अंकित सुबह आठ बजे सोकर उठता और नौ बजे से मोबाइल पकड़ लेता था। कभी फ्लैट के दरवाजे पर तो कभी सड़क पर आकर वह अपने लोकल कनेक्शन से दोपहर तीन बजे तक बातें किया करता था। किसी को शक न हो इसलिए अंकित बीच-बीच में मजदूरी करने भी चला जाता था। पड़ोसियों का कहना है कि अच्छा ही था कि हमेशा शांत दिखने वाले अंकित ने किसी को मोहल्ले में अपना साथी नहीं बनाया वरना न जाने कितने लड़के उसके चक्कर में फंस जाते।
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इन बिंदुओं की होनी है जांच

अंकित ने गोविंदनगर की किस दुकान से लैपटॉप खरीदा था।

अंकित के बैंक अकाउंट कानपुर के अलावा किन-किन शहरों में हैं।

दहेली सुजानपुर में अंकित के साथी कौन-कौन हैं।

बर्रा में किस दोस्त पर परिजन उंगली उठा रहे हैं।

अंकित जब कभी कानपुर से बाहर नहीं गया तो उसे ई-मेल बनाने का प्रशिक्षण किसने दिया।

पाकिस्तान और बांग्लादेश से अंकित का कनेक्शन कराने वाला आका कौन है। किनसे उसकी चैट होती थी।

अंकित 2021 से ई-मेल आईडी बना रहा था इस काम में मददगार कौन-कौन लोग थे।

हाथ में कलावा देख आतंकियों ने मारी थी गोली

साल 2016 में दहेली सुजानपुर और चकेरी से सटे इलाके में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रमेश बाबू शुक्ला की गोली मारकर हत्या की गई थी। हत्याकांड मामले में इस्लामिक स्टेट के आतंकी आतिफ मुजफ्फर और मोहम्मद फैसल को पकड़ा गया और कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा के साथ ही पांच-पांच लाख का जुर्माना भी लगाया था। मामले में चकेरी के रहने वाले अक्षय शुक्ला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अभियुक्तों इस्लामिक स्टेट के खलीफा अबु बकर अल बगदादी के नाम की बैत (शपथ) लेकर भारत में दहशत व राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने एवं काफिरों को जान से मारने की नियत से सेवानिवृत्त शिक्षक रमेश बाबू शुक्ला को उनके हाथ में बंधे लाल-पीले धागे व माथे पर लगे तिलक से उनकी हिंदू पहचान सुनिश्चित करके उनकी हत्या कर दी थी।

वर्जन,,,,

एटीएस के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। इसके अलावा आरोपी के कानपुर के और कौन-कौन कनेक्शन हो सकते हैं इसके लिए संबंधित थानों को जांच के लिए कहा गया है। - रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर


खरीदो और बेचो ग्रुप से जुड़े साइबर ठगों के तार

कानपुर। यूपी एटीएस के सूत्रों के अनुसार, अंकित अपने मोबाइल और लैपटॉप पर खरीदो और बेचो (बाय एंड सेल) नाम का व्हाट्सअप ग्रुप भी चलाता था। इसी के माध्यम से वह देश-विदेश में बैठे लोगों में से अपने ग्राहक भी तलाशता था। इन ग्राहकों में कुछ आतंकी तो कुछ साइबर ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड उससे जुड़ते थे और फर्जी ई-मेल आईडी व पासवर्ड खरीदते थे। कानपुर में साइबर ठगी के कई मामले पकड़े गए हैं इनमें सबसे बड़ी साइबर ठगी 5600 करोड़ तक की शामिल है। इनके मास्टरमाइंड राजवीर सिंह, सुल्तान मिर्जा, महफूज उर्फ पप्पू छुरी जैसे महाठग रहे हैं। कानपुर पुलिस अब एटीएस से संपर्क उस ग्रुप का डाटा मांगेगी, जिससे कि साइबर ठगों के नेटवर्क का भी खुलासा होने की संभावना है। पुलिस का मानना है कि दुबई और थाईलैंड से बैठकर साइबर ठगी करने वालों के नाम भी ग्रुप में मिल सकते हैं।
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