बेमिसाल: आंखों की रोशनी नहीं पर नेट जेआरएफ में चमके आर्जव, इतिहास विषय में 98.92 फीसदी अंक लाकर पाई सफलता
कानपुर के आर्जव ने इतिहास विषय से नेट जेआरएफ क्वालीफाई कर लिया है। आर्जव ने बताया कि दृष्टिबाधितों के लिए यूजीसी ने जॉस एक्सेस विद स्पीच सॉफ्टवेयर की व्यवस्था की है। इसमें हर प्रश्न सुनाई देता है, फिर चार ऑप्शन में आपको एक बोल देना होता है, इसके बाद फिर अगला प्रश्न आ जाता है।
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खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे कि बता तेरी रजा क्या है...ये पंक्तियां कानपुर के आर्जव जैन पर सटीक बैठती हैं। जन्म से दृष्टिबाधित आर्जव ने इतिहास विषय से नेट जेआरएफ क्वालीफाई कर लिया है। उन्होंने 98.92 फीसदी अंक पाए हैं। जेएनयू से पीएचडी कर रहे विकासनगर निवासी आर्जव के पिता राजीव जैन सीएसजेएमयू में अधिकारी और मां प्रज्ञा जय नारायण विद्या मंदिर में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता हैं।
राजीव बताते हैं कि जन्म के तीन माह के अंदर ही समझ आ गया था कि आर्जव देख नहीं सकता है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इकलौती संतान आर्जव ने भी माता-पिता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। आर्जव ने डीपीएस आजादनगर से 12वीं करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक, परास्नातक किया। इसके बाद जेएनयू से पीएचडी कर रहे हैं।
आर्जव बताते हैं कि खुद को किसी से कम न समझूं, इसलिए बगैर माता-पिता के 12वीं के बाद से स्टीफेंस कॉलेज के हॉस्टल में रहता हूं। उनको इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च से स्कॉलरशिप मिल रही है। वह शिक्षक बनना चाहते हैं।
ऐसे दी परीक्षा
आर्जव ने बताया कि दृष्टिबाधितों के लिए यूजीसी ने जॉस एक्सेस विद स्पीच सॉफ्टवेयर की व्यवस्था की है। इसमें हर प्रश्न सुनाई देता है, फिर चार ऑप्शन में आपको एक बोल देना होता है, इसके बाद फिर अगला प्रश्न आ जाता है।
पढ़ाई के अलावा आर्जव संगीत के भी महारथी रहे हैं। बचपन में बालश्री, क्लासिकल संगीत के लिए यंग आर्टिस्ट का खिताब जीत चुके आर्जव को सांस्कृतिक मंत्रालय से स्कॉलरशिप मिली है। आर्जव बताते हैं कि दो बार नेट की परीक्षा दी थी, पहली बार मेें ही नेट क्वालीफाई किया था, लेकिन दूसरी बार में जेआरएफ के साथ नेट क्वालीफाई किया।