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'जेल के अंदर का VIP खेल', सजा काट कर आए इस शख्स ने CM को लिखा पत्र
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 23 Apr 2018 08:38 AM IST
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जिला उप कारागार महोबा में पैसे खर्च करने वाले कैदी वीआईपी सुविधा काट रहे है। उन्हे सुबह-शाम अलग से ताजा भोजन दिया जाता है। वहीं गरीब कैदियों को दी जाने वाली दाल में पानी के अलावा कुछ नजर नहीं आता है। जेल से छूटकर आए महोबा के गांधीनगर निवासी मनीष त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री समेत उच्चाधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में जिला उप कारागार में की जा रही अनियमितताओं और घपलेबाजी को उजागर किया।
उन्होंने बताया कि जेल में पहुंचते ही कैदी से पहले दिन 2500 रुपये कमान कटाई के नाम पर लिए जाते हैं। कमान कटाने वालों को एक माह तक झाडू़, बर्तन व अन्य कार्य नहीं करने पड़ते हैं। हर माह 2500 रुपये देने वाले कैदी कामकाज से मुक्त रहते हैं जबकि कमान न कटाने वाले कैदियों से आटा माढ़ने के साथ साथ रोटी बनाने तक की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके बाद झाडू़ और साफ सफाई भी करवाई जाती है।
मिलाई के नाम पर 100 रुपये लिए जाते है। दो कैदियों से मिलाई करने पर 200 रुपये दिए जाते हैं। पैसे वाले लोग जेल के अंदर चल रही कैंटीन में पैसा देकर खाना खाते हैं जबकि कुछ पैसे वाले कैदियों के लिए अलग से भोजन बनवाया जाता है और उन्हें बात करने के लिए मोबाइल सुविधाएं तक दी जाती है।
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जेल में नए कैदियों के साथ अभद्रता भी की जाती है। दाल में पानी के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता है पूरी तरह उबला खाना दिया जाता है। जिससे मजबूरन लोगों को खाना पड़ता है। जेलर हरीश कुमार का कहना है कि सभी कैदियों को अच्छा भोजन दिया जाता है और किसी भी कैदी से पैसा नहीं लिया जाता है।
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उन्होंने बताया कि जेल में पहुंचते ही कैदी से पहले दिन 2500 रुपये कमान कटाई के नाम पर लिए जाते हैं। कमान कटाने वालों को एक माह तक झाडू़, बर्तन व अन्य कार्य नहीं करने पड़ते हैं। हर माह 2500 रुपये देने वाले कैदी कामकाज से मुक्त रहते हैं जबकि कमान न कटाने वाले कैदियों से आटा माढ़ने के साथ साथ रोटी बनाने तक की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके बाद झाडू़ और साफ सफाई भी करवाई जाती है।
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मिलाई के नाम पर 100 रुपये लिए जाते है। दो कैदियों से मिलाई करने पर 200 रुपये दिए जाते हैं। पैसे वाले लोग जेल के अंदर चल रही कैंटीन में पैसा देकर खाना खाते हैं जबकि कुछ पैसे वाले कैदियों के लिए अलग से भोजन बनवाया जाता है और उन्हें बात करने के लिए मोबाइल सुविधाएं तक दी जाती है।
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जेल में नए कैदियों के साथ अभद्रता भी की जाती है। दाल में पानी के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता है पूरी तरह उबला खाना दिया जाता है। जिससे मजबूरन लोगों को खाना पड़ता है। जेलर हरीश कुमार का कहना है कि सभी कैदियों को अच्छा भोजन दिया जाता है और किसी भी कैदी से पैसा नहीं लिया जाता है।