पढ़ें: कैसे रोटोमैक पेन किंग से 'कर्ज किंग' बन गए विक्रम कोठारी
- इंडियन ओवरसीज बैंक से लिया था 1400 करोड़ का कर्ज
- बैंक ने की कार्रवाई, अभी भी 750 करोड़ रुपये बकाया
- बकाया कर्ज की वसूली के लिए डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल जाएगा बैंक
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विस्तार
'बाबूजी' के नाम से मशहूर कानपुर के उद्योगपति की औलाद हैं विक्रम कोठारी
विक्रम कोठारी के भाई का पान पराग
विक्रम कोठारी मशहूर उद्योगपति एमएम कोठारी की औलाद हैं। 'बाबूजी' के नाम से मशहूर कानपुर के उद्योगपति और पान पराग के संस्थापक मनसुख लाल महादेव भाई कोठारी का नाम तो सब जानते ही हैं। एमएम कोठारी का जन्म एक छोटे से गांव निराली में पैदा हुए मनसुख अपने आठ भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। मामूली सी नौकरी से अपने कॅरियर का आगाज करने वाले मनसुख भाई ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया और इसमें वह काफी सफल भी रहे। समाज की तरक्की के लिए उन्होंने स्कूलों समेत कई संस्थानों की शुरुआत की। आगे बढ़ने की सोच और उनकी मेहनत करने की चाह कभी न खत्म हुई और न ही कभी धीमी ही हुई। यही वजह थी कि वह पान मसाले के कारोबार में एक बड़ा नाम बनकर सामने आए।
90 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया। मनसुख के दो पुत्र विक्रम और दीपक व एक पुत्री रीता हैं। इसके बाद इतने बड़े उद्योग का दारोमदार दो कंधों को संभालना था। दीपक और विक्रम दोनों भाइयों ने बिजनेस को आपस में बांट लिया।
विक्रम कोठारी ने स्टेशनरी बिजनेस को अपनाया तो वहीं दीपक ने पान मसाला बिजनेस को संभाले रखा। ऐसा नहीं है कि विक्रम कोठारी को सबकुछ संपत्ति के बतौर मिला हो। उन्होंने बराबर मेहनत की और अपनी कंपनी रोटोमैक ग्रुप को बड़ा नाम दिया। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें सम्मानित भी किया। सम्मान के ऐसे कई मौके उनके जीवन में भी आए।
विक्रम कोठारी के भाई का पान पराग
दूसरी तरफ भाई दीपक कोठारी पान पराग की बदौलत दिन दौगुनी रात चौगुनी तरक्की करते गए। 'पान पराग' आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ऐसे एक तरफ दीपक बिजनेस की दुनिया में बड़ा नाम बनता चला गया और दूसरी तरफ विक्रम इसी दुनिया में डूबता चला गया।
18 अगस्त 1973 में शुरू हुआ पान पराग के बारे में उस वक्त कोई नहीं जानता था कि यह एक बड़ा ब्रांड बन जाएगा। लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही। अस्सी के दशक में इस ब्रांड ने तहलका मचा दिया था और यह हरदिल अजीज हो गया था।
एम एम कोठारी ने 18 अगस्त 1973 को "पान पराग" पान मसाला कंपनी का शुभारंभ किया था। 1983 में कोठारी प्रोडक्ट्स प्राइवेट के रूप में शुरुआत हुई। 1983 से1987 के बीच "पान पराग" एकल सबसे बड़ा टीवी पर विज्ञापनदाता और मेघाब्रांड कंपनी बन गई। उस समय कंपनी की टक्कर में इतनी बड़ी विज्ञापन दाता कोई कंपनी नहीं थी।
पान पराग ने इतना नाम कमाया कि 1987 में कंपनी को राष्ट्रीय पुरस्कार से भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया गया।तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी द्वारा राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार से श्री मनसुख भाई कोठारी को सम्मानित किया गया।कोठारी ग्रुप ने साल 2005 में शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा और नोएडा में कोठारी इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की गई। महज चार साल में उत्कृष्टता का प्रमाण पत्र भी मिल गया।
कैसे हुआ कोठारी ब्रदर्स के बीच बटवारा
दीपक कोठारी ने कोठारी प्रोडक्ट्स फ्लैगशिप में 22.5 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी ली। दीपक ने इसके लिए भाई विक्रम को शेयर के पैसे दे दिए। इसके बाद विक्रम कोठारी ने रोटोमैक इंडस्ट्री में कदम जमाया जिसमें उन्होंने पेन, स्टेशनरी और ग्रीटिंग्स कार्ड्स इत्यादी बनाने चालू किए।
एमएम कोठारी हालांकि यह तय कर गए थे कि कोठारी प्रोड्क्टस में दोनों भाई बराबर के चेयरमेन रहेंगे लेकन विक्रम कोठारी समेत उनकी पत्नी
साधना कोठरी ने बोर्ड छोड़ दिया। उस समय एक अंग्रेजी अखबार को उन्होंने कहा था कि यह फैसला उन्होंने आपसी सहमति से लिया है।
अब तक कुल कर्ज बैंक कर्जा
विक्रम कोठारी की रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का एक लोन एकाउंट माल रोड स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में भी है। वर्ष 2010 में यह लोन एकाउंट महज 150 करोड़ का था। चार साल में ही यह 1400 करोड़ तक पहुंच गया। समय पर लोन की किस्तें अदा न हो पाने पर जून 2016 में यह एकाउंट एनपीए घोषित कर दिया गया था।
बैंक ने कई नोटिस भेजे, लेकिन निर्धारित समय पर निर्धारित रकम जमा न होने पर बैंक ने लोन की सिक्योरिटी के लिए बंधक डिपॉजिट जब्त कर लिए। सभी डिपॉजिट करीब 650 करोड़ के ही निकले। बैंक अब अपने 750 करोड़ रुपये की वसूली के लिए परेशान है। बैंक ने इनके बकाये लोन पर अब ब्याज लगाना बंद कर दिया है।
बैंकिंग सेक्टर से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इंडियन ओवरसीज बैंक का सेंट्रल ऑफिस जल्द ही बकाया कर्ज की वसूली के लिए डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल में केस करेगा।
अब तक कुल कर्ज बैंक कर्जा
इंडियन ओवरसीज बैंक- 1400 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया- 1395 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा- 600 करोड़
इलाहाबाद बैंक- 352 करोड़