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बिकरू कांड: विकास के करीबी इन कोटेदारों पर मेहरबान थे दो निरीक्षक, एसआईटी की जांच में पाए गए दोषी, कार्रवाई शुरू
Wed, 07 Jul 2021 11:10 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 07 Jul 2021 11:10 AM IST
सार
बिकरू में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद जब व्यापक जांच शुरू हुई, तब यह मामला सामने आया। जिला आपूर्ति अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट में दोषी पाए गए बिल्हौर में तैनात आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप मिश्र को घाटमपुर भेज दिया गया है, जबकि प्रशांत सिंह का ट्रांसफर बांदा कर दिया गया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कुख्यात अपराधी विकास दुबे के गांव बिकरू और उसके पड़ोसी गांव भीटी के कोटेदारों पर जिला आपूर्ति कार्यालय के दो निरीक्षकों की मेहरबानी उजागर हो गई है। बिकरू कांड की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट में आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप मिश्र और प्रशांत सिंह दोषी पाए गए हैं।
निरीक्षकों पर आरोप था कि ये विकास दुबे के इशारों पर काम करते थे। उसके भय से इन्होंने बिकरू और भीटी गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी सरकारी राशन की दुकानों पर जांच नहीं की। साधन संपन्न व्यक्तियों के राशन कार्ड अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी में बनाए गए।
एसआईटी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला आपूर्ति अधिकारी ने इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। बिकरू गांव में सरकारी राशन की दुकान विकास दुबे के नौकर के नाम पर थी। इस पर पूरा आधिपत्य विकास दुबे का ही था। यही स्थिति पड़ोसी गांव भीटी की थी।
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यहां विकास दुबे की मर्जी से ही राशन बंटता था। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन-चार महीने में एक बार राशन मिल जाए तो बड़ी बात। उसमें भी अपनी मर्जी के लोगों को ही राशन देता था। आपूर्ति कार्यालय से लेकर डीएम, कमिश्नर तक शिकायत करने पर भी उसका कुछ नहीं बिगड़ता था।
कागजों पर जांच पूरी हो जाती थी। ग्रामीणों का पक्ष लेने कभी कोई आता ही नहीं था। बिकरू में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद जब व्यापक जांच शुरू हुई, तब यह मामला सामने आया। जिला आपूर्ति अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट में दोषी पाए गए बिल्हौर में तैनात आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप मिश्र को घाटमपुर भेज दिया गया है, जबकि प्रशांत सिंह का ट्रांसफर बांदा कर दिया गया है।
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निरीक्षकों पर आरोप था कि ये विकास दुबे के इशारों पर काम करते थे। उसके भय से इन्होंने बिकरू और भीटी गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी सरकारी राशन की दुकानों पर जांच नहीं की। साधन संपन्न व्यक्तियों के राशन कार्ड अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी में बनाए गए।
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एसआईटी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला आपूर्ति अधिकारी ने इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। बिकरू गांव में सरकारी राशन की दुकान विकास दुबे के नौकर के नाम पर थी। इस पर पूरा आधिपत्य विकास दुबे का ही था। यही स्थिति पड़ोसी गांव भीटी की थी।
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यहां विकास दुबे की मर्जी से ही राशन बंटता था। ग्रामीणों का आरोप है कि तीन-चार महीने में एक बार राशन मिल जाए तो बड़ी बात। उसमें भी अपनी मर्जी के लोगों को ही राशन देता था। आपूर्ति कार्यालय से लेकर डीएम, कमिश्नर तक शिकायत करने पर भी उसका कुछ नहीं बिगड़ता था।
कागजों पर जांच पूरी हो जाती थी। ग्रामीणों का पक्ष लेने कभी कोई आता ही नहीं था। बिकरू में आठ पुलिस कर्मियों की हत्या के बाद जब व्यापक जांच शुरू हुई, तब यह मामला सामने आया। जिला आपूर्ति अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट में दोषी पाए गए बिल्हौर में तैनात आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप मिश्र को घाटमपुर भेज दिया गया है, जबकि प्रशांत सिंह का ट्रांसफर बांदा कर दिया गया है।