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कानपुर के पूर्व सीएमओ के खिलाफ विजिलेंस जांच, आय से अधिक संपत्ति व भ्रष्टाचार का है आरोप
Thu, 21 Jan 2021 12:36 PM IST
शिखा पांडेय
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 21 Jan 2021 12:36 PM IST
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शासन के आदेश पर कानपुर में सीएमओ रहे डॉ. अशोक मिश्रा के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हुई है। उन पर आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का आरोप है। कानपुर यूनिट ने कार्रवाई शुरू की है। वर्तमान में डॉ. अशोक मिश्र रिटायर्ड हैं।
विजिलेंस टीम ने उनको पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। डॉ. मिश्रा का कानपुर में कार्यकाल 25 अगस्त 2009 से 7 अप्रैल 2011 तक रहा। विजिलेंस के सूत्रों के मुताबिक उसी दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। विभागीय जांच हुई तो उसमें आरोपों के संबंध में साक्ष्य मिले।
ये भी खुलासा हुआ कि उनके पास आय से अधिक संपत्ति रही। विभागीय जांच समेत अन्य विभागीय कार्रवाई होने के बाद मामला शासन तक पहुंचा। शासन की संस्तुति के बाद मामले की जांच कुछ दिन पहले कानपुर विजिलेंस शाखा को सौंप दी गई है। विजिलेंस में तैनात एक इंस्पेक्टर को जांच अधिकारी तय किया गया है। शुरुआती कार्रवाई शुरू हो गई है।
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तथ्यों का होगा सत्यापन, फिर पूछताछ
विजिलेंस टीम को डॉ. मिश्रा की पुरानी जांच रिपोर्ट भी सौंपी गई है। उसमें तमाम दस्तावेज और साक्ष्य हैं। विजिलेंस की टीम इन तथ्यों का सत्यापन करने के साथ सुबूतों की पुष्टि करेगी। आरोपी सीएमओ से पूछताछ कर बयान लेगी। जिन संपत्तियों का जिक्र है, उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा। गवाह भी विजिलेंस खोजेगी।
एफआईआर दर्ज होने में लग सकते हैं 5-6 महीने
विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में अगर पर्याप्त साक्ष्य होंगे तब शासन एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देगा। पांच से छह महीने या फिर इससे अधिक का वक्त लग सकता है।
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विजिलेंस टीम ने उनको पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। डॉ. मिश्रा का कानपुर में कार्यकाल 25 अगस्त 2009 से 7 अप्रैल 2011 तक रहा। विजिलेंस के सूत्रों के मुताबिक उसी दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। विभागीय जांच हुई तो उसमें आरोपों के संबंध में साक्ष्य मिले।
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ये भी खुलासा हुआ कि उनके पास आय से अधिक संपत्ति रही। विभागीय जांच समेत अन्य विभागीय कार्रवाई होने के बाद मामला शासन तक पहुंचा। शासन की संस्तुति के बाद मामले की जांच कुछ दिन पहले कानपुर विजिलेंस शाखा को सौंप दी गई है। विजिलेंस में तैनात एक इंस्पेक्टर को जांच अधिकारी तय किया गया है। शुरुआती कार्रवाई शुरू हो गई है।
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तथ्यों का होगा सत्यापन, फिर पूछताछ
विजिलेंस टीम को डॉ. मिश्रा की पुरानी जांच रिपोर्ट भी सौंपी गई है। उसमें तमाम दस्तावेज और साक्ष्य हैं। विजिलेंस की टीम इन तथ्यों का सत्यापन करने के साथ सुबूतों की पुष्टि करेगी। आरोपी सीएमओ से पूछताछ कर बयान लेगी। जिन संपत्तियों का जिक्र है, उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा। गवाह भी विजिलेंस खोजेगी।
एफआईआर दर्ज होने में लग सकते हैं 5-6 महीने
विजिलेंस की जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में अगर पर्याप्त साक्ष्य होंगे तब शासन एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देगा। पांच से छह महीने या फिर इससे अधिक का वक्त लग सकता है।