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ताजमहल, तीन तलाक और अदालतों पर उसामा का बड़ा बयान, मीडिया पर कुछ इस कदर बरसे

Sat, 07 Oct 2017 08:16 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 07 Oct 2017 08:16 AM IST
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Usama big statements on the courts,Taj Mahal, divorce
मौलाना मतीनुल हक उसामा, ताजमहल(डेमो पिक)
जमीयत उलेमा के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक उसामा ने ताजमहल और तीन तलाक पर बिना किसी का नाम लिए बड़ा हमला किया। इस दौरान उन्होने कुछ नसीहतें भी दे डालीं। जानें क्या है पूरा मामला...
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ताजमहल पर बुरी नजर रखने वाले मानसिक रोगी हैं

Usama big statements on the courts,Taj Mahal, divorce
डेमो पिक
हरदोई जिले के पिहानी में जमीयत उलेमा यूपी के अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक उसामा ने कहा है कि दुनिया भर में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मशहूर पर्यटन स्थल ताजमहल पर बुरी नजर रखने वाले लोग मानसिक रोगी हैं। ऐसे लोगों को इसकी कद्र करनी चाहिए। यह बेशकीमती है इसकी  हिफाजत करें। 

 
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जज इस्लाम के दुश्मन नहीं हैं

Usama big statements on the courts,Taj Mahal, divorce
डेमो पिक
कानपुर के काजी-ए-शहर मौलाना उसामा ने तीन तलाक पर कहा हमें समझना होगा कि अदालतों में बैठे जज इस्लाम के दुश्मन नहीं हैं। हां, राजनैतिक लोगों की मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी जरूर फर्जी है। अगर हमदर्दी ही दिखानी है तो तलाक के साथ और भी कई मसलें हैं, जिन में हस्तक्षेप करना जरूरी है। उन्होने कहा कि सभी इस्लामी कानून रहमत हैं, जहमत नहीं। दूसरे हमसे  सीख कर अपनी बेहतरी करने में कामयाब हो गए, लेकिन हमने खुद अपने माहौल में बिगाड़ पैदा कर लिया।

 
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अदालतें संविधान से प्रदत्त अधिकारों पर अतिक्रमण न करें

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डेमो पिक
मौलाना ने कहा कि अदालतों को संविधान में प्रदत्त हमारे बुनियादी हुकूक पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। तलाक का मसला मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सुपुर्द होना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीवी पर होने वाली बहसों में उसी को हिस्सा लेना चाहिए जिसे इस्लामी शरीयत, भारतीय कानून और मुल्क के हालात का पूरा ज्ञान हो। पुख्ता इल्म वाले बहस करें, कच्चे लोग बहस से दूर रहें। इससे इस्लाम की अधूरी शिक्षा को मीडिया पूर्व नियोजित ढंग से अपने मुताबिक गढ़ कर फैला रही है।


उसामा ने कहा कि एक खास एजेंडे के तहत जो हालात बनाये जा रहे हैं, वो बदलेंगे। मकसद में नाकाम लोग मजहबी जज्बात का सहारा ले रहे हैं। ऐसी कामयाबी क्षणिक होती है। कहा कि सब्र से काम लें, बुजदिली से नहीं। किरदार और अमल से इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें।

 
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