Ursala Case: 1.23 मिनट में जड़े 12 थप्पड़, स्टॉफ बोला- नशे में धूत थे सर्जन, डॉक्टर बोले- मैंने माफी मांग ली
Kanpur News: रविंद्र का आरोप है कि हमने डॉ. कटियार से कहा कि आप रुक जाइए फर्श गीला है, फिसल सकते हैं। इतना सुनते ही सर्जन नाराज हो गए और उन्होंने गालियां देते हुए अमित को पीटना शुरू कर दिया। अमित उनके पैरों में गिर पड़ा फिर भी वह नहीं माने।
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कानपुर में फर्श गीला होने पर अंदर आने से रोकने पर उर्सला अस्पताल के सर्जन डॉ. बीकेएस कटियार ने आउटसोर्स पर तैनात सफाई कर्मचारी को 1 मिनट 23 सेकेंड के दौरान 12 थप्पड़ मार दिए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मारपीट के दौरान उन्होंने कर्मी को गालियां भी दी।
वीडियो सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। अस्पताल के निदेशक ने मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी तीन दिन में रिपोर्ट देगी। परमट निवासी रविंद्र उर्सला अस्पताल में आउटसोर्स पर हाउस कीपिंग का कार्य करते हैं।
कहा था- आप रुक जाइए फर्श गीला है
उनके मुताबिक बुधवार की रात करीब 10:30 बजे निदेशक कार्यालय के पास सफाई करा रहे थे। उनके साथ सफाईकर्मी अमित और राहुल भी थे। इसी बीच सर्जन डॉ. बीकेएस कटियार वहां पर आए। अमित और राहुल ने उन्हें रोक दिया। कहा कि आप रुक जाइए फर्श गीला है, फिसल सकते हैं।
मरीज व तीमारदारों के बीचबचाव के बाद डॉक्टर रुके
रविंद्र का आरोप है कि इतना सुनते ही सर्जन नाराज हो गए और उन्होंने गालियां देते हुए अमित को पीटना शुरू कर दिया। अमित उनके पैरों में गिर पड़ा फिर भी वह नहीं माने। मरीज व तीमारदारों के बीचबचाव के बाद डॉक्टर रुके। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
निदेशक ने सर्जन को लगाई फटकार
गुरुवार को घटना का पता चलने पर निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने सर्जन को फटकार लगाई। उन्होंने मामले की जांच के लिए डॉ. शैलेंद्र तिवारी, डॉ. धीर सिंह और डॉ. जीएन द्विवेदी की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। कोतवाली इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद पांडेय ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच चल रही है।
अब तक लिखित शिकायत नहीं आई है, लेकिन वीडियो का संज्ञान लेकर जांच समिति गठित कर दी है। मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एचडी अग्रवाल, निदेशक उर्सला
मैंने माफी मांग ली: डॉ. कटियार
बुधवार रात एक तीमारदार का फोन आया कि रोगी की तबीयत खराब है। मैं रात 10:30 बजे अस्पताल पहुंचा। मुख्य द्वार पर ही एक अनधिकृत व्यक्ति ने रोक दिया। परिचय देने के बावजूद उसने अभद्रता की। मरीज परेशान था और आवेश में आकर ऐसा कर दिया। हालांकि मैंने बाद में इस बात की माफी मांगी। मैं कभी शराब नहीं पीता हूं। कर्मचारी यूनीफार्म में नहीं था इसलिए कर्मचारी को पहचान नहीं सका। -डॉ. बीकेएस कटियार