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यूपी: कानपुर की कुरिया चौकी में 36 साल पहले भी हुआ था बवाल, डीआईजी ने बंद करा दी है चौकी
Mon, 01 Feb 2021 12:41 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 01 Feb 2021 12:41 AM IST
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खनन में लगे डंपर से कुचलकर हुई थी महिला की मौत, पुलिस पर हमला कर फूंके गए थे चौकी डंपर
- फोटो : amar ujala
महिला की मौत पर हुए बवाल के बाद शनिवार को खत्म की गई बिधनू थाने की कुरिया चौकी में 36 साल पहले भी बवाल हुआ था। तत्कालीन चौकी प्रभारी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के साथ मारपीट करने के बाद भड़की भीड़ ने चौकी पर हमला बोल दिया था।
चौकी इंचार्ज और सिपाहियों को पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया था। करौली गांव निवासी 85 वर्षीय जगपाल सिंह भदौरिया बताते हैं कि 1980 के करीब कुरिया चौकी की स्थापना हुई थी। चार साल बाद होली की परेवा पर बारादेवी के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रभूषण तिवारी करौली स्थित अपनी ससुराल आ रहे थे।
तत्कालीन कुरिया चौकी इंचार्ज पीपी सिंह ने रोककर उनकी तलाशी ली। शराब की बोतल मिलने पर चौकी इंचार्ज से कहासुनी हुई तो चौकी इंचार्ज ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के सिर पर कांच की बोतल दे मारी। इससे वे लहूलुहान हो गए। इसकी सूचना पर करौली गांव के लोगों ने चौकी पर हमला बोल दिया था। नए चौकी इंचार्ज आरके सिंह सिपाहियों के साथ करौली गांव दबिश देने पहुंचे तो उन्हें भी पीटा गया था।
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बदमाश शौकत अली का था आतंक
70 के दशक में जरकला गांव निवासी बदमाश शौकत अली का इलाके में आतंक था। क्षेत्र में लूट, रंगदारी, चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। ग्रामीणों की मांग पर 1980 में कुरिया चौकी एक छप्पर के नीचे खोली गई थी। इसके बाद शौकत अली ने अपना इलाका बदल दिया था। 1982 में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।
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चौकी इंचार्ज और सिपाहियों को पीट-पीटकर मरणासन्न कर दिया था। करौली गांव निवासी 85 वर्षीय जगपाल सिंह भदौरिया बताते हैं कि 1980 के करीब कुरिया चौकी की स्थापना हुई थी। चार साल बाद होली की परेवा पर बारादेवी के रहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंद्रभूषण तिवारी करौली स्थित अपनी ससुराल आ रहे थे।
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तत्कालीन कुरिया चौकी इंचार्ज पीपी सिंह ने रोककर उनकी तलाशी ली। शराब की बोतल मिलने पर चौकी इंचार्ज से कहासुनी हुई तो चौकी इंचार्ज ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के सिर पर कांच की बोतल दे मारी। इससे वे लहूलुहान हो गए। इसकी सूचना पर करौली गांव के लोगों ने चौकी पर हमला बोल दिया था। नए चौकी इंचार्ज आरके सिंह सिपाहियों के साथ करौली गांव दबिश देने पहुंचे तो उन्हें भी पीटा गया था।
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बदमाश शौकत अली का था आतंक
70 के दशक में जरकला गांव निवासी बदमाश शौकत अली का इलाके में आतंक था। क्षेत्र में लूट, रंगदारी, चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। ग्रामीणों की मांग पर 1980 में कुरिया चौकी एक छप्पर के नीचे खोली गई थी। इसके बाद शौकत अली ने अपना इलाका बदल दिया था। 1982 में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था।