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यूपी: एनआरआई महिला ने अमेरिका में साइंटिस्ट पति की मौत के बाद संपत्ति कब्जाने के लिए बनवाया फर्जी प्रमाण पत्र
Sat, 09 Oct 2021 10:20 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 09 Oct 2021 10:20 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
समाज कल्याण विभाग की योजनाओं में हुए घोटाले के बाद एक और मामला सामने आया है। अमेरिका में रहने वाली 77 वर्षीय वृद्धा ने अपने अमेरिकी साइंटिस्ट पति की मौत के बाद गोरखपुर में उनकी संपत्ति पर कब्जा जमाने के लिए फर्जीवाड़ा कर कानपुर से पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र जारी करवा लिया।
फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर जांच के नाम पर अफसर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं और वृद्धा अमेरिका लौट गई। गोरखपुर निवासी ज्ञानेश्वर प्रसाद खरे और कानपुर के स्वरूप नगर की रहने वाली कामिनी खरे का वर्ष 1969 में कानपुर में विवाह हुआ। इसके बाद दोनों अमेरिका में जाकर रहने लगे।
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फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर जांच के नाम पर अफसर एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं और वृद्धा अमेरिका लौट गई। गोरखपुर निवासी ज्ञानेश्वर प्रसाद खरे और कानपुर के स्वरूप नगर की रहने वाली कामिनी खरे का वर्ष 1969 में कानपुर में विवाह हुआ। इसके बाद दोनों अमेरिका में जाकर रहने लगे।
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दोनों के एक बेटा समीर कुमार खरे और एक बेटी मोनिका खरे है। मनमुटाव के चलते वर्ष 1990 में सुपीरियर कोर्ट ऑफ कैलिफोर्निया, काउंटी ऑफ ऑरेंज से उनका तलाक हो गया। वर्ष 2018 में ज्ञानेश्वर की मौत हो गई। गोरखपुर में ज्ञानेश्वर की संपत्ति पर कब्जे की नीयत से कामिनी भारत आई और गोरखपुर में पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन लेखपाल ने तलाक होने और स्थानीय निवासी न होने के आधार पर रिपोर्ट लगाकर आवेदन खारिज कर दिया।
इसके बाद कामिनी स्वरूप नगर के बाबू विहार में रहने वाले अपने भाई गोविंद के घर आईं और इसी पते से आधार कार्ड बनवा लिया। आधार कार्ड की मदद से एसडीएम के यहां पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। शपथपत्र में खुद को ज्ञानेश्वर की पत्नी, समीर को पुत्र व मोनिका को पुत्री दिखाया।
मृत्यु प्रमाण पत्र से तलाक शब्द को मिटा दिया गया। यहां सेटिंग काम कर गई और लेखपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जुलाई 2020 को तलाकशुदा पत्नी कामिनी के नाम पर पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर की कुछ संपत्ति बेच भी दी।
इसके बाद कामिनी स्वरूप नगर के बाबू विहार में रहने वाले अपने भाई गोविंद के घर आईं और इसी पते से आधार कार्ड बनवा लिया। आधार कार्ड की मदद से एसडीएम के यहां पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। शपथपत्र में खुद को ज्ञानेश्वर की पत्नी, समीर को पुत्र व मोनिका को पुत्री दिखाया।
मृत्यु प्रमाण पत्र से तलाक शब्द को मिटा दिया गया। यहां सेटिंग काम कर गई और लेखपाल की जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जुलाई 2020 को तलाकशुदा पत्नी कामिनी के नाम पर पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर की कुछ संपत्ति बेच भी दी।