{"_id":"5fa50ed28ebc3e9bd266e908","slug":"up-cyber-lab-in-kanpur-traffic-line-it-will-be-easy-to-solve-complex-cases-of-cybercrime","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: कानपुर ट्रैफिक लाइन में साइबर लैब, साइबर अपराध के जटिल मामलों को सुलझाने में आसानी होगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: कानपुर ट्रैफिक लाइन में साइबर लैब, साइबर अपराध के जटिल मामलों को सुलझाने में आसानी होगी
Fri, 06 Nov 2020 02:39 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 06 Nov 2020 02:39 PM IST
विज्ञापन
साइबर फोरेंसिक लैब
- फोटो : social media
उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर लैब बनाने को लेकर काम शुरू हो गया है। इसका निर्माण ट्रैफिक पुलिस लाइन में होगा। इससे साइबर अपराध के जटिल से जटिल मामलों को सुलझाने में आसानी होगी। यहां बीटेक पास पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
जिले में बढ़ते साइबर अपराध पर नकेल कसने की जिम्मेदारी फिलहाल साइबर सेल के पांच-छह कर्मचारियाें पर है। इस हाईटेक लैब में कानपुर रेंज के सभी थानों में दर्ज साइबर मामले सुलझाए जाएंगे। यहां लापता लोगों की खोजबीन के लिए अलग से टीम रखी जाएगी।
विज्ञापन
जिले में बढ़ते साइबर अपराध पर नकेल कसने की जिम्मेदारी फिलहाल साइबर सेल के पांच-छह कर्मचारियाें पर है। इस हाईटेक लैब में कानपुर रेंज के सभी थानों में दर्ज साइबर मामले सुलझाए जाएंगे। यहां लापता लोगों की खोजबीन के लिए अलग से टीम रखी जाएगी।
विज्ञापन
Trending Videos
एनएएफएस की भूमिका रहेगी अहम
साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए फॉरेंसिक टीम का मजबूत होना जरूरी है। अभी तक कानपुर रेंज के नमूने जांच के लिए आगरा, नोएडा, लखनऊ या मेरठ भेजे जाते हैं। जहां लोड अधिक होने से पड़े-पड़े ये नमूने अक्सर नष्ट हो जाते है। रिपोर्ट आने में भी अधिक समय लगता है। इससे अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर होते जाते हैं। ऐसे में सिस्टम का डिजिटलाइजेशन होने और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट सिस्टम (एनएएफएस) एक्टिव होने से अपराध पर लगाम लगेगी।
इन साइबर अपराधों पर कसेगी नकेल
- सोशल मीडिया पर मिलने वाली धमकियां
- फर्जीवाड़ा कर बैंक खातों से रुपये निकालना
- सोशल मीडिया फ्रॉड
- फर्जी कॉल सेंटरों के जरिये फोन कर विभिन्न प्रकार की ठगी
- ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी
- टॉवर लगवाने के नाम पर रुपये हड़पना
- फोन के जरिये धमकी देकर फिरौती मांगना
- ई कॉमर्स, फेक ट्वीटर हैंडिल, लॉटरी फ्रॉड, डाटा थेफ्ट जैसे जटिल अपराध
शासन की संस्तुति के बाद ट्रैफिक पुलिस लाइन में साइबर लैब बनाने के आदेश दिए गए हैैं। इससे जटिल से जटिल मामलों की जांच में आसानी होगी।
डॉ. प्रीतिंदर सिंह, डीआईजी/एसएसपी
साइबर अपराधियों की धरपकड़ के लिए फॉरेंसिक टीम का मजबूत होना जरूरी है। अभी तक कानपुर रेंज के नमूने जांच के लिए आगरा, नोएडा, लखनऊ या मेरठ भेजे जाते हैं। जहां लोड अधिक होने से पड़े-पड़े ये नमूने अक्सर नष्ट हो जाते है। रिपोर्ट आने में भी अधिक समय लगता है। इससे अपराधी पुलिस की पकड़ से दूर होते जाते हैं। ऐसे में सिस्टम का डिजिटलाइजेशन होने और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट सिस्टम (एनएएफएस) एक्टिव होने से अपराध पर लगाम लगेगी।
इन साइबर अपराधों पर कसेगी नकेल
- सोशल मीडिया पर मिलने वाली धमकियां
- फर्जीवाड़ा कर बैंक खातों से रुपये निकालना
- सोशल मीडिया फ्रॉड
- फर्जी कॉल सेंटरों के जरिये फोन कर विभिन्न प्रकार की ठगी
- ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी
- टॉवर लगवाने के नाम पर रुपये हड़पना
- फोन के जरिये धमकी देकर फिरौती मांगना
- ई कॉमर्स, फेक ट्वीटर हैंडिल, लॉटरी फ्रॉड, डाटा थेफ्ट जैसे जटिल अपराध
शासन की संस्तुति के बाद ट्रैफिक पुलिस लाइन में साइबर लैब बनाने के आदेश दिए गए हैैं। इससे जटिल से जटिल मामलों की जांच में आसानी होगी।
डॉ. प्रीतिंदर सिंह, डीआईजी/एसएसपी