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यूपी बोर्ड: मजदूर की बिटिया ने हौसले से लांघा अंकों का पहाड़, दसवीं में मिले 94.6 फीसदी अंक, पढ़ें संघर्ष की कहानी
Sun, 01 Aug 2021 01:02 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 01 Aug 2021 01:02 AM IST
सार
संध्या कहती हैं कि काफी तंगहाली देखी है, इसलिए हर हाल में पढ़ना चाहती थी ताकि पापा का सहयोग कर सकूं। अभी तक की पढ़ाई में स्कूल ने फीस माफ रखी। जो किताब मैंने चाही वो तक मिली।
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यूपी बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्थिक तंगी से मजबूर मजदूर पिता से बेटी ने आगे पढ़ने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। किसी तरह उनको मनाया। स्कूल आने-जाने में रोज 24 किमी साइकिल चलानी पड़ी पर हिम्मत न हारी और अब दसवीं में 94.6 फीसदी अंक पाकर सबका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
हम बात कर रहे हैं ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज की छात्रा संध्या निषाद की। शंकरपुर कटरी की रहने वाली संध्या ने आठवीं तक की पढ़ाई वहीं के प्राइमरी स्कूल से की है। पिता सुंदरलाल मजदूरी करते हैं। माता श्यामकली गृहिणी हैं। संध्या के तीन भाई और तीन बहन हैं।
परिवार में वह और उनका छोटा भाई ही पढ़ाई कर रहा है। संध्या ने बताया कि पापा से आठवीं के बाद आगे पढ़ने की बात की थी तो उन्होंने कहा कि चुप कर घर में बैठो। टेस्ट भी नहीं देने दिया तो उनको बताया कि पढ़ाई का खर्च स्कूल उठाएगा।
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इस पर उन्होंने शर्त रखी कि रोज स्कूल से घर आओगी, हॉस्टल में नहीं रुकोगी तो ही पढ़ने दूंगा। उसने बताया कि घर से स्कूल 12 किमी दूर था। ऐसे में रोज 24 किमी साइकिल चलाकर आना-जाना पड़ता था। डेढ़ से दो घंटे तो इसी में लग जाते थे।
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हम बात कर रहे हैं ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज की छात्रा संध्या निषाद की। शंकरपुर कटरी की रहने वाली संध्या ने आठवीं तक की पढ़ाई वहीं के प्राइमरी स्कूल से की है। पिता सुंदरलाल मजदूरी करते हैं। माता श्यामकली गृहिणी हैं। संध्या के तीन भाई और तीन बहन हैं।
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परिवार में वह और उनका छोटा भाई ही पढ़ाई कर रहा है। संध्या ने बताया कि पापा से आठवीं के बाद आगे पढ़ने की बात की थी तो उन्होंने कहा कि चुप कर घर में बैठो। टेस्ट भी नहीं देने दिया तो उनको बताया कि पढ़ाई का खर्च स्कूल उठाएगा।
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इस पर उन्होंने शर्त रखी कि रोज स्कूल से घर आओगी, हॉस्टल में नहीं रुकोगी तो ही पढ़ने दूंगा। उसने बताया कि घर से स्कूल 12 किमी दूर था। ऐसे में रोज 24 किमी साइकिल चलाकर आना-जाना पड़ता था। डेढ़ से दो घंटे तो इसी में लग जाते थे।
स्कूल ने दीं किताबें, फीस की माफ
संध्या कहती हैं कि काफी तंगहाली देखी है, इसलिए हर हाल में पढ़ना चाहती थी ताकि पापा का सहयोग कर सकूं। अभी तक की पढ़ाई में स्कूल ने फीस माफ रखी। जो किताब मैंने चाही वो तक मिली। शिक्षकों ने हमेशा सहयोग किया। परिणाम से खुश संध्या कहती हैं कि परीक्षाएं होतीं तो नंबरों में फर्क पड़ता।
10वीं के यूपी टॉपर को 12वीं में मिले 92.20 फीसदी अंक
यूपी बोर्ड में 10वीं के टॉपर रहे ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज के छात्र गौतम रघुवंशी को 12वीं में मात्र 92.20 फीसदी अंकों से संतोष करना पड़ा। हालांकि वह इस बार भी सिटी टॉपर बने हैं। अपने अंकों से निराश गौतम का कहना है कि 10वीं के बोर्ड के अंक (97.71 फीसदी), 11वीं के फाइनल के अंक और प्री बोर्ड के अंक मिलाकर भी 97 फीसदी से ऊपर के अंक आए हैं।
फिर भी बोर्ड ने 12वीं में केवल 92.20 फीसदी अंक दिए हैं। गौतम कहते हैं कि अंक किस आधार पर दिए गए हैं, यह समझ से परे हैं। विजय नगर में रहने वाले गौतम के पिता धीरज रघुवंशी केडीए में लिपिक हैं और मां निर्मला गृहिणी हैं। गौतम कहते हैं कि हिंदी में 87 और केमिस्ट्री में मात्र 88 फीसदी अंक ही दिए गए हैं। गौतम कहते हैं कि परीक्षा देते तो तस्वीर कुछ अलग होती। जेईई मेंस में उनके 97 पर्सेंटाइल हैं। गौतम आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
संध्या कहती हैं कि काफी तंगहाली देखी है, इसलिए हर हाल में पढ़ना चाहती थी ताकि पापा का सहयोग कर सकूं। अभी तक की पढ़ाई में स्कूल ने फीस माफ रखी। जो किताब मैंने चाही वो तक मिली। शिक्षकों ने हमेशा सहयोग किया। परिणाम से खुश संध्या कहती हैं कि परीक्षाएं होतीं तो नंबरों में फर्क पड़ता।
10वीं के यूपी टॉपर को 12वीं में मिले 92.20 फीसदी अंक
यूपी बोर्ड में 10वीं के टॉपर रहे ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज के छात्र गौतम रघुवंशी को 12वीं में मात्र 92.20 फीसदी अंकों से संतोष करना पड़ा। हालांकि वह इस बार भी सिटी टॉपर बने हैं। अपने अंकों से निराश गौतम का कहना है कि 10वीं के बोर्ड के अंक (97.71 फीसदी), 11वीं के फाइनल के अंक और प्री बोर्ड के अंक मिलाकर भी 97 फीसदी से ऊपर के अंक आए हैं।
फिर भी बोर्ड ने 12वीं में केवल 92.20 फीसदी अंक दिए हैं। गौतम कहते हैं कि अंक किस आधार पर दिए गए हैं, यह समझ से परे हैं। विजय नगर में रहने वाले गौतम के पिता धीरज रघुवंशी केडीए में लिपिक हैं और मां निर्मला गृहिणी हैं। गौतम कहते हैं कि हिंदी में 87 और केमिस्ट्री में मात्र 88 फीसदी अंक ही दिए गए हैं। गौतम कहते हैं कि परीक्षा देते तो तस्वीर कुछ अलग होती। जेईई मेंस में उनके 97 पर्सेंटाइल हैं। गौतम आईआईटी से इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।