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Kanpur News: नर्सिंगहोम से भेजे गए सेप्टीसीमिया के दो रोगियों की मौत
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कानपुर। बर्रा और कल्याणपुर से रेफर होकर हैलट भेजे गए सेप्टीसीमिया के दो रोगियों की मौत हो गई। रोगियों की हालत बिगड़ने पर नर्सिंगहोम वालों ने रोगियों को हैलट भेज दिया। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला का कहना है कि औसत 10 रोगी रोज अति गंभीर हालत में नर्सिंगहोमों से हैलट भेजे जाते हैं। उनके पास यूजर्स चार्ज का भी पैसा नहीं होता।
बर्रा के एक नर्सिंगहोम से नौबस्ता के रहने वाले राजकुमार (55) और कल्याणपुर न्यू शिवली रोड के नर्सिंगहोम से चौबेपुर के विनोद गुप्ता (42) को रेफर किया गया। परिजनों ने बताया कि रास्ते में उनकी मौत हो गई। इलाज संबंधी अभिलेखों पर सेप्टीसीमिया लिखा हुआ था। परिजनों ने बताया कि उनका एक लाख से अधिक खर्च आया है। अब पैसा नहीं बचा। गुरुवार शाम तक नर्सिंगहोमों से आठ रोगी रेफर होकर इमरजेंसी आए।
डॉक्टरों का कहना था कि रोगी एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) और सेप्टीसीमिया की स्थिति में आते हैं। प्राचार्य डॉ. काला ने बताया कि नर्सिंगहोम से आने वाले रोगियों का सारा पैसा खर्च हो चुका होता है। यूजर्स चार्ज का पैसा नहीं दे पाते। उनके लिए लोगों की सिफारिश आने लगती है। कई रोगियों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर रोगी शुरू में ही हैलट आ जाएं तो बेहतर इलाज मिलेगा।
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बर्रा के एक नर्सिंगहोम से नौबस्ता के रहने वाले राजकुमार (55) और कल्याणपुर न्यू शिवली रोड के नर्सिंगहोम से चौबेपुर के विनोद गुप्ता (42) को रेफर किया गया। परिजनों ने बताया कि रास्ते में उनकी मौत हो गई। इलाज संबंधी अभिलेखों पर सेप्टीसीमिया लिखा हुआ था। परिजनों ने बताया कि उनका एक लाख से अधिक खर्च आया है। अब पैसा नहीं बचा। गुरुवार शाम तक नर्सिंगहोमों से आठ रोगी रेफर होकर इमरजेंसी आए।
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डॉक्टरों का कहना था कि रोगी एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) और सेप्टीसीमिया की स्थिति में आते हैं। प्राचार्य डॉ. काला ने बताया कि नर्सिंगहोम से आने वाले रोगियों का सारा पैसा खर्च हो चुका होता है। यूजर्स चार्ज का पैसा नहीं दे पाते। उनके लिए लोगों की सिफारिश आने लगती है। कई रोगियों को वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर रोगी शुरू में ही हैलट आ जाएं तो बेहतर इलाज मिलेगा।
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