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दो विभागों ने किया सड़क का सत्यानाश

Sun, 17 Apr 2016 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 17 Apr 2016 01:23 AM IST
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The two departments have annihilated street
रातों रात बनी ज्वालादेवी स्कूल वाली रोड। - फोटो : amarujala
मनोज चौरसिया
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कानपुर। विकास कार्यों की ओवरऑल रैंकिंग में डी-ग्रेड मिलने और प्रदेश के 75 जिलों में 35वां स्थान पाने वाले कानपुर का ये हाल तो होना ही था। आखिर अफसर आंख-कान बंद करके काम जो कर रहे हैं और जिले की नाक कटवा रहे हैं। पब्लिक के पैसे की बर्बादी और दो सरकारी महकमों के बीच तालमेल के अभाव का ताजा उदाहरण पीरोड ज्वाला देवी मार्ग है। इसे बनाने के लिए पीडब्लूडी और नगर निगम दोनों ने ही टेंडर कर दिए। नगर निगम ने फुटपाथ, नालियां बनाकर बाकी सड़क का काम इसलिए छोड़ दिया कि वहां पाइप लाइन पड़नी है। इस बीच पीडब्लूडी ने नगर निगम से एनओसी लिए बिना रातों रात लगभग 40 लाख रुपये से यह सड़क बनवा दी। जाहिर है अब पाइप लाइन डालने के लिए सड़क फिर खोदी जाएगी। पीडब्लूडी इस पूरे मामले में लीपापोती की कोशिश कर रहा है।
बता दें दो दिन पहले प्रदेश सरकार की ओर से जिलों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया गया था। 109 तरह के विकास कार्यों की समीक्षा शासन करता है। साल भर में जो काम पूरे होते हैं, उस पर 100 फीसदी मार्क्स दिए जाते हैं। फिसड्डी पर जीरो मिलते हैं। इसके आधार पर कानपुर जिले को डी ग्रेड (खराब काम) मिला था। ये खराब काम कौन से हैं, इन पर नजर डाली गई तो एक और ताजा मामला नाक कटवाने वाला।
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लापरवाही-1
पीडब्लूडी ने 2013-14 में 1.20 करोड़ रुपये से सीसामऊ चौराहे से कानपुर टेनरी तक और लेनिन पार्क चौराहा से संगीत टाकीज तक 1.85 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने का ठेका डेल्टा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया। ठेकेदार ने फरवरी 2014 में सीसामऊ चौराहे से कानपुर टेनरी तक और संगीत से ज्वाला देवी चौराहे तक 80 लाख रुपये से सड़क बनवाई, पर अफसरों ने वहां से पीरोड तक 300 मीटर लंबी सड़क का निर्माण रुकवा दिया था क्योंकि वहां जल निगम को पाइप लाइन बिछानी थी। पर, पाइप लाइन नहीं डाली गई। छूटे कार्य की लागत लगभग 40 लाख रुपये थी।
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लापरवाही-2
फरवरी 2016 में उच्च स्तरीय समिति ने अवस्थापना निधि से नगर निगम को 300 मीटर शेष रोड पर सड़क, फुटपाथ, नालियां बनाने का आदेश दिया। उस समय पीडब्लूडी और जल निगम ने नहीं बताया कि अभी यहां पाइप लाइन डाली जानी है। इस बीच नगर निगम ने दो महीने पहले 54 लाख से इस कार्य के लिए टेंडर कराए, पारसनाथ बिल्डर्स को ठेका दिया और 300 मीटर रोड पर फुटपाथ-नालियां बनवा दीं।
लापरवाही-3
एडीएम सिटी ने बिना सभी विभागों से पूछेताछे 4 मार्च को जल निगम को भी वहां पाइप लाइन डालने के लिए खुदाई की अनुमति दे दी। इसकी सूचना नगर निगम, पीडब्लूडी को दी गई। नगर निगम ने तो काम रुकवा दिया, पर पीडब्लूडी ने 7-8 अप्रैल को उसी ठेकेदार से रातोंरात यह सड़क बनवा दी। इस कार्य की लागत लगभग 40 लाख रुपये है। अब यह सड़क पाइप लाइन डालने के लिए फिर खोदी जाएगी और जनता के  ये पैसे बर्बाद हो जाएंगे।
ये है अवस्थापना निधि संबंधी समिति
अवस्थापना निधि संबंधी उच्च स्तरीय समिति में महापौर, कमिश्नर, डीएम, केडीए वीसी, नगर आयुक्त, पीडब्लूडी के अधीक्षण अभियंता शामिल हैं। इस निधि से होने वाले कार्यों में सबकी सहमति रहती है लेकिन इस मामले में सब अन्जान बने रहे।


ये है श्रमदान
मानकों के विपरीत या गलत तरीके से कराए गए विकास कार्य को अफसर श्रमदान घोषित कर सकते हैं। ऐसा होने पर ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जाता या वही कार्य उसी धनराशि में दोबारा करना पड़ता है।
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