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Kanpur News: पहले उपचार और फिर रिपोर्ट के लिए इंतजार
Fri, 18 Sep 2026 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 18 Sep 2026 12:13 AM IST
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज अकबरपुर में इन दिनों बुखार और वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को ओपीडी में 1098 मरीज पहुंचे। बुखार के मरीजों को डॉक्टर खून की जांच कराए बिना परामर्श नहीं दे रहे हैं। ऐसे में जांच कराने के बाद रिपोर्ट के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। भीड़ अधिक होने पर कई मरीजों को रिपोर्ट दूसरे दिन मिल रही है।
मरीजों की परेशानी उस समय और बढ़ जाती है जब जांच रिपोर्ट दोपहर दो बजे के बाद मिलती है। रिपोर्ट हाथ में आने तक ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है। ऐसे में मरीज को डॉक्टर को दोबारा दिखाने के लिए अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ता है। इससे एक ही बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को दो-दो दिन अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या का असर वार्डों पर भी है। अस्पताल में काफी संख्या में मरीज भर्ती हैं। ओपीडी में जांच और परामर्श के लिए भीड़, जांच रिपोर्ट में देरी और दोबारा डॉक्टर को दिखाने की मजबूरी से मरीज और तीमारदार परेशान हैं। कई मरीजों का कहना है कि बीमारी के दौरान घंटों अस्पताल में रहने के बाद भी उसी दिन जांच और डॉक्टर का परामर्श पूरा नहीं हो पा रहा है।
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जांच के लिए पहुंच रहे 700 से अधिक सैंपल
पैथोलॉजी में इन दिनों प्रतिदिन 700 से अधिक मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें टायफाइड, सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, हीमोग्लोबिन, मलेरिया के अलावा अन्य जांच के लिए भी डॉक्टर परामर्श लिख रहे हैं। कर्मचारियों की मानें तो रूटीन की कुछ जांच करने में ही दो बज जा रहा है। यदि किसी मरीज के एक-दो जांच हुई तो उसे समय से रिपोर्ट मिल जा रही है वरना शाम तक रिपोर्ट तैयार हो पाती है। यही वजह है कि मरीज को अगले दिन आईपीएचएल लैब के पास से रिपोर्ट दी जाती है।
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भर्ती मरीजों की जांच में प्राथमिकता
पैथोलॉजी के कर्मचारियों की मानें 24 घंटे जांच की जा रही है। इनमें सुबह ओपीडी के मरीजों के अलावा, जनरल वार्ड, ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज, गर्भवती महिलाओं की जांच पहले की जा रही है। इसके साथ ही ओपीडी से आने वाले मरीजों के सैंपल जांच के लिए लगाए जाते हैं। इस वजह से भी ओपीडी में आने वाले मरीजों को दोपहर बाद ही रिपोर्ट मिल पा रही है। आंकड़ों की बात करें तो प्रतिदिन दो बजे तक 200 से 250 जांच रिपोर्ट तैयार हो पा रही है।
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टोकन जनरेट होने के साथ बन रहा पर्चा
मरीजों की पर्चा बनवाने में लगने वाली लाइन कम करने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत मरीज को काउंटर पर आधार कार्ड या आधार से लिंक मोबाइल नंबर बताना होगा। इसके आधार पर आभा आईडी बनाई जाएगी। पहले से आभा आईडी होने पर मरीज को आधार और मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद टोकन जनरेट होगा और पर्चा बन जाएगा। इससे पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन से राहत मिलने की उम्मीद है।
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केस-1
डेरापुर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को बुखार से पीड़ित होने पर दिखाने के लिए अस्पताल आए थे। समय से पर्चा बन गया ओपीडी में फिजिशियन से परामर्श भी ले लिया लेकिन उन्हें जांच के लिए दोपहर एक बजे तक रुकना पड़ा। जब वह जांच रिपोर्ट लेने पहुंचे तो बताया गया कि उनकी कुछ जांच रह गई हैं। इस पर शुक्रवार को रिपोर्ट लेने के लिए कहा गया।
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केस-2
रनियां निवासी सुमन ने बताया कि उन्हें कई दिन से पेट में जलन और बुखार की समस्या थी। शरीर में दर्द भी हो रहा था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने दवा लिखने के साथ ही खून की जांच कराने के लिए पैथोलॉजी भेजा। सैंपल देने में करीब आधे घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद उन्हें दोपहर दो बजे के बाद रिपोर्ट मिली। अब वह अगले दिन आकर डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाएंगी।
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बयान......
इन दिनों अस्पताल में सुविधा बढ़ी है तो मरीज भी बढ़े हैं। दोपहर दो बजे तक पैथोलॉजी में सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट भी बीच-बीच में दी जाती है। कोशिश की जा रही है कि किसी भी मरीज को सैंपल व जांच के लिए परेशान न होना पड़े। समय से सभी को रिपोर्ट मिले। इसके लिए जल्द ही व्यवस्था बेहतर की जाएगी। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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मरीजों की परेशानी उस समय और बढ़ जाती है जब जांच रिपोर्ट दोपहर दो बजे के बाद मिलती है। रिपोर्ट हाथ में आने तक ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है। ऐसे में मरीज को डॉक्टर को दोबारा दिखाने के लिए अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ता है। इससे एक ही बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को दो-दो दिन अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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बुखार के मरीजों की बढ़ती संख्या का असर वार्डों पर भी है। अस्पताल में काफी संख्या में मरीज भर्ती हैं। ओपीडी में जांच और परामर्श के लिए भीड़, जांच रिपोर्ट में देरी और दोबारा डॉक्टर को दिखाने की मजबूरी से मरीज और तीमारदार परेशान हैं। कई मरीजों का कहना है कि बीमारी के दौरान घंटों अस्पताल में रहने के बाद भी उसी दिन जांच और डॉक्टर का परामर्श पूरा नहीं हो पा रहा है।
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जांच के लिए पहुंच रहे 700 से अधिक सैंपल
पैथोलॉजी में इन दिनों प्रतिदिन 700 से अधिक मरीजों के ब्लड सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें टायफाइड, सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, हीमोग्लोबिन, मलेरिया के अलावा अन्य जांच के लिए भी डॉक्टर परामर्श लिख रहे हैं। कर्मचारियों की मानें तो रूटीन की कुछ जांच करने में ही दो बज जा रहा है। यदि किसी मरीज के एक-दो जांच हुई तो उसे समय से रिपोर्ट मिल जा रही है वरना शाम तक रिपोर्ट तैयार हो पाती है। यही वजह है कि मरीज को अगले दिन आईपीएचएल लैब के पास से रिपोर्ट दी जाती है।
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भर्ती मरीजों की जांच में प्राथमिकता
पैथोलॉजी के कर्मचारियों की मानें 24 घंटे जांच की जा रही है। इनमें सुबह ओपीडी के मरीजों के अलावा, जनरल वार्ड, ट्रामा सेंटर, इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज, गर्भवती महिलाओं की जांच पहले की जा रही है। इसके साथ ही ओपीडी से आने वाले मरीजों के सैंपल जांच के लिए लगाए जाते हैं। इस वजह से भी ओपीडी में आने वाले मरीजों को दोपहर बाद ही रिपोर्ट मिल पा रही है। आंकड़ों की बात करें तो प्रतिदिन दो बजे तक 200 से 250 जांच रिपोर्ट तैयार हो पा रही है।
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टोकन जनरेट होने के साथ बन रहा पर्चा
मरीजों की पर्चा बनवाने में लगने वाली लाइन कम करने के लिए टोकन व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत मरीज को काउंटर पर आधार कार्ड या आधार से लिंक मोबाइल नंबर बताना होगा। इसके आधार पर आभा आईडी बनाई जाएगी। पहले से आभा आईडी होने पर मरीज को आधार और मोबाइल नंबर की जानकारी देनी होगी। मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद टोकन जनरेट होगा और पर्चा बन जाएगा। इससे पर्चा बनवाने के लिए लंबी लाइन से राहत मिलने की उम्मीद है।
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केस-1
डेरापुर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को बुखार से पीड़ित होने पर दिखाने के लिए अस्पताल आए थे। समय से पर्चा बन गया ओपीडी में फिजिशियन से परामर्श भी ले लिया लेकिन उन्हें जांच के लिए दोपहर एक बजे तक रुकना पड़ा। जब वह जांच रिपोर्ट लेने पहुंचे तो बताया गया कि उनकी कुछ जांच रह गई हैं। इस पर शुक्रवार को रिपोर्ट लेने के लिए कहा गया।
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केस-2
रनियां निवासी सुमन ने बताया कि उन्हें कई दिन से पेट में जलन और बुखार की समस्या थी। शरीर में दर्द भी हो रहा था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने दवा लिखने के साथ ही खून की जांच कराने के लिए पैथोलॉजी भेजा। सैंपल देने में करीब आधे घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद उन्हें दोपहर दो बजे के बाद रिपोर्ट मिली। अब वह अगले दिन आकर डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाएंगी।
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बयान......
इन दिनों अस्पताल में सुविधा बढ़ी है तो मरीज भी बढ़े हैं। दोपहर दो बजे तक पैथोलॉजी में सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट भी बीच-बीच में दी जाती है। कोशिश की जा रही है कि किसी भी मरीज को सैंपल व जांच के लिए परेशान न होना पड़े। समय से सभी को रिपोर्ट मिले। इसके लिए जल्द ही व्यवस्था बेहतर की जाएगी। - डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज