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UP: आसमान से बरस रही आग, पौने तीन लाख पेड़ झुलसे, तेंदू पत्ते सूखने से बीड़ी उद्योग को लगा झटका
Sun, 22 May 2022 06:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 22 May 2022 06:55 PM IST
सार
भीषण गर्मी से तेंदू के पत्ते सूखने लगे हैं। इससे बीड़ी उद्योग से जुड़े करीब 1.50 लाख परिवार बेरोजगार होने के कगार पर हैं। वहीं, सरकार को करीब 80 लाख का नुकसान होने की बात कही जा रही है।
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भीषण गर्मी में सूखा पेड़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बुंदेलखंड में फरवरी से शुरू हुई गर्मी और बीते दिनों 47 से 50 डिग्री के बीच रहे तापमान का असर पेड़ पौधों पर पड़ा है। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन के जंगलों में तेंदू, कंजी, ढाक, चिरौल, शीशम, सागौन, नीम, पीपल, अर्रु, चिरौल सहित कई प्रजातियों के पेड़ सूख रहे हैं। सबसे अधिक तेंदू के पेड़ प्रभावित हुए हैं।
तेंदू पत्ते बुरी तरह झुलस गए हैं और बीड़ी उद्योग के लायक नहीं बचे हैं। देश भर में पूरा बुंदेलखंड तेंदू पत्ता के लिए जाना जाता है। तेंदू पत्ते का इस्तेमाल बीड़ी बनाने में होता है। इस पत्ते की नीलामी वन निगम की ओर से की जाती है। बीड़ी कंपनियों को पत्ता आपूर्ति करने वाले ठेकेदार नीलामी में हिस्सा लेते हैं।
हर साल तेंदू पत्ते की 19 से 20 लाख गड्डी तैयार हो जाती हैं। एक गड्डी में 100 पत्ते होते हैं। मगर इस बार हालात कुछ और हैं। पेड़ से साफ सुथरा तेंदू पत्ता नहीं निकल रहा है। अधिकतर पेड़ झुलस गए हैं। इस वजह से तेंदू पत्ते की तुड़ान कम हो रही है। तेंदू पत्ता तोड़ने वालों के सामने रोजगार का संकट भी पैदा हो गया है।
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तेंदू पत्ते बुरी तरह झुलस गए हैं और बीड़ी उद्योग के लायक नहीं बचे हैं। देश भर में पूरा बुंदेलखंड तेंदू पत्ता के लिए जाना जाता है। तेंदू पत्ते का इस्तेमाल बीड़ी बनाने में होता है। इस पत्ते की नीलामी वन निगम की ओर से की जाती है। बीड़ी कंपनियों को पत्ता आपूर्ति करने वाले ठेकेदार नीलामी में हिस्सा लेते हैं।
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हर साल तेंदू पत्ते की 19 से 20 लाख गड्डी तैयार हो जाती हैं। एक गड्डी में 100 पत्ते होते हैं। मगर इस बार हालात कुछ और हैं। पेड़ से साफ सुथरा तेंदू पत्ता नहीं निकल रहा है। अधिकतर पेड़ झुलस गए हैं। इस वजह से तेंदू पत्ते की तुड़ान कम हो रही है। तेंदू पत्ता तोड़ने वालों के सामने रोजगार का संकट भी पैदा हो गया है।
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हरा सोना है तेंदू पत्ता
बुंदेलखंड में तेंदू पत्ता हरा सोना कहा जाता है। ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के जंगल में यह पाया जाता है। पत्ते को मोड़कर इसमें तंबाकू भरकर बीड़ी बनाई जाती है। मई से जून तक पेड़ से इस पत्ते की तोड़ाई होती है। इन दो महीने में ही करीब 1.50 लाख लोेगों को रोजगार मिलता है।
कत्थे का स्वाद हो जाएगा फीका
बुंदेलखंड में खैर के पेड़ बड़ी संख्या में हैं। खैर की लकड़ी काफी कीमती मानी जाती है। खैर की लकड़ी का इस्तेमाल कत्था बनाने में होता है। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठान में भी इस लकड़ी का प्रयोग होता है। चूंकि बुंदेलखंड में पानी का संकट रहता है और इस बार अधिक तापमान बढ़ने से खैर के भी पेड़ सूखने लगे हैं। इस वजह से इस बार कत्थे का स्वाद भी फीका रह सकता है।
बुंदेलखंड में तेंदू पत्ता हरा सोना कहा जाता है। ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट के जंगल में यह पाया जाता है। पत्ते को मोड़कर इसमें तंबाकू भरकर बीड़ी बनाई जाती है। मई से जून तक पेड़ से इस पत्ते की तोड़ाई होती है। इन दो महीने में ही करीब 1.50 लाख लोेगों को रोजगार मिलता है।
कत्थे का स्वाद हो जाएगा फीका
बुंदेलखंड में खैर के पेड़ बड़ी संख्या में हैं। खैर की लकड़ी काफी कीमती मानी जाती है। खैर की लकड़ी का इस्तेमाल कत्था बनाने में होता है। इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठान में भी इस लकड़ी का प्रयोग होता है। चूंकि बुंदेलखंड में पानी का संकट रहता है और इस बार अधिक तापमान बढ़ने से खैर के भी पेड़ सूखने लगे हैं। इस वजह से इस बार कत्थे का स्वाद भी फीका रह सकता है।
2.70 लाख हरे पेड़ पौधे झुलसे
प्रभागीय वन अधिकारी वीके मिश्रा का कहना है कि उनके सर्वे के मुताबिक बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी की वजह से सभी तरह के करीब 2.70 लाख हरे पेड़ झुलस गए हैं। ये कुल पेड़ों का 48 फीसदी हैं। कई साल बाद इतनी अधिक गर्मी पड़ रही है। इसका व्यापक असर पेड़ों पर पड़ा है। तेंदू के सबसे अधिक प्रभावित हैं।
बुंदेलखंड में जंगल का क्षेत्रफल वर्ग किलोमीटर में
जालौन- 247.39
बांदा-101.91
महोबा- 170
हमीरपुर-227
चित्रकूट-631.69
प्रभागीय वन अधिकारी वीके मिश्रा का कहना है कि उनके सर्वे के मुताबिक बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी की वजह से सभी तरह के करीब 2.70 लाख हरे पेड़ झुलस गए हैं। ये कुल पेड़ों का 48 फीसदी हैं। कई साल बाद इतनी अधिक गर्मी पड़ रही है। इसका व्यापक असर पेड़ों पर पड़ा है। तेंदू के सबसे अधिक प्रभावित हैं।
बुंदेलखंड में जंगल का क्षेत्रफल वर्ग किलोमीटर में
जालौन- 247.39
बांदा-101.91
महोबा- 170
हमीरपुर-227
चित्रकूट-631.69