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नवरात्र में इस बार बन रहे सर्वार्थ सिद्धि के तीन योग, जानिए किससे मिलेगा लाभ और किससे होगा नुकसान
Sat, 17 Oct 2020 04:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 17 Oct 2020 04:27 PM IST
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शारदीय नवरात्र
- फोटो : गूगल
शारदीय नवरात्र आज यानी 17 अक्तूबर से शुरू हो रहे हैं। इस बार मां अश्व पर आ रहीं हैं। पहले दिन कलश स्थापना कर मां शैलपुत्री का पूजन-अर्चन किया जाएगा। इस बार नवरात्र पर कलश स्थापना के कई मुहूर्त हैं।
पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि सुबह 8:16 बजे से 10:31 तक का मुर्हूत कलश स्थापना के लिए काफी शुभ है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में अपराह्न 11:36 से 12:24 बजे तक, दोपहर 2:24 बजे से 03:59 बजे तक और शाम 7:13 बजे से रात 9:12 बजे तक भी कलश स्थापना का लग्न है।
इस बार बन रहे सर्वार्थ सिद्धि के तीन योग
आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि के योग 18 अक्तूबर, 19 अक्तूबर और 23 अक्तूबर को बन रहे हैं। वहीं, एक त्रिपुष्कर योग 18 अक्तूबर को बन रहा है। इस नवरात्र में गुरु व शनि स्वगृही रहेंगे जो बेहद ही शुभ है। इस नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के साथ-साथ दुर्गा चालीसा का पाठ करना लाभकर होगा। इस दौरान झूठ, फरेब व व्यसन से बचें। कन्या पूजन के साथ-साथ नौ वर्ष से नीचे की कन्याओं को उपहार भी देना चाहिए।
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25 को नवमी और दशमी
आचार्य मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि साल में चार बार नवरात्र का त्योहार आता है। जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्र शामिल हैं। नवरात्र के नौ दिन में मां के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस बार नवमी और दशमी 25 अक्तूबर को ही पड़ेगी। 25 को अपराह्न 11:14 बजे तक नवमी रहेगी और इसके बाद विजय दशमी का त्योहार मनाया जाएगा।
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पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि सुबह 8:16 बजे से 10:31 तक का मुर्हूत कलश स्थापना के लिए काफी शुभ है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में अपराह्न 11:36 से 12:24 बजे तक, दोपहर 2:24 बजे से 03:59 बजे तक और शाम 7:13 बजे से रात 9:12 बजे तक भी कलश स्थापना का लग्न है।
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इस बार बन रहे सर्वार्थ सिद्धि के तीन योग
आचार्य पवन तिवारी ने बताया कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि के योग 18 अक्तूबर, 19 अक्तूबर और 23 अक्तूबर को बन रहे हैं। वहीं, एक त्रिपुष्कर योग 18 अक्तूबर को बन रहा है। इस नवरात्र में गुरु व शनि स्वगृही रहेंगे जो बेहद ही शुभ है। इस नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के साथ-साथ दुर्गा चालीसा का पाठ करना लाभकर होगा। इस दौरान झूठ, फरेब व व्यसन से बचें। कन्या पूजन के साथ-साथ नौ वर्ष से नीचे की कन्याओं को उपहार भी देना चाहिए।
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25 को नवमी और दशमी
आचार्य मनोज कुमार द्विवेदी का कहना है कि साल में चार बार नवरात्र का त्योहार आता है। जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्र शामिल हैं। नवरात्र के नौ दिन में मां के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस बार नवमी और दशमी 25 अक्तूबर को ही पड़ेगी। 25 को अपराह्न 11:14 बजे तक नवमी रहेगी और इसके बाद विजय दशमी का त्योहार मनाया जाएगा।