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1 अरब 38 करोड़ का होश उड़ाने वाला बजट, इस विभाग ने किसी खास वजह से किया है तैयार
Mon, 04 Feb 2019 03:58 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 04 Feb 2019 03:58 PM IST
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डेमो
उन्नाव जिले में अगले वित्तीय वर्ष में ग्रामीणों को कृषि कार्य से इतर रोजगार दिलाने के लिए ग्राम्य विकास विभाग ने भारीभरकम लेबर बजट तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। सरकार ने इसे मंजूरी दी तो गांव के मनरेगा जॉबकार्डधारकों को रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जॉबकार्डधारक को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। एक दिन के काम को एक मानव दिवस के रूप में जोड़ा जाता है। केंद्र सरकार के आदेश पर ग्राम्य विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए अभी से लेबर बजट तैयार किया है।
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मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जॉबकार्डधारक को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। एक दिन के काम को एक मानव दिवस के रूप में जोड़ा जाता है। केंद्र सरकार के आदेश पर ग्राम्य विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए अभी से लेबर बजट तैयार किया है।
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लेबर बजट गांव के लोगों की सहभागिता से तैयार किया जाता है। इसमें निर्माण सामग्री और मानवदिवस को मिलाकर बजट तैयार किया गया है। अधिकारियों ने गांवों में जाकर लोगों से रोजगार की जानकारी ली है।
मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा ने बताया कि एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में 4732787 मानवदिवस सृजन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण सामग्री और मानवदिवस सृजन मिलाकर 1 अरब 38 करोड़ का बजट तैयार करके मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से काम शुरू कराया जाएगा।
इस वित्तीय वर्ष 2018-19 में अब तक करीब 200 मजदूरों की 20 लाख की मजदूरी लंबित हैं। काम करने के कई दिन बाद भी इन्हें पैसा नहीं मिल पाया है। हालांकि मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा का कहना है कि सरकार ने पैसा जारी कर दिया है। मजदूरों के खातों में पैसा पहुंचने भी लगा होगा। बताया कि अब तक 34.30 लाख मानवदिवस लक्ष्य के सापेक्ष 30.82 लाख मानवदिवस पूरे हो चुके हैं।
मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा ने बताया कि एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में 4732787 मानवदिवस सृजन करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण सामग्री और मानवदिवस सृजन मिलाकर 1 अरब 38 करोड़ का बजट तैयार करके मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से काम शुरू कराया जाएगा।
इस वित्तीय वर्ष 2018-19 में अब तक करीब 200 मजदूरों की 20 लाख की मजदूरी लंबित हैं। काम करने के कई दिन बाद भी इन्हें पैसा नहीं मिल पाया है। हालांकि मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा का कहना है कि सरकार ने पैसा जारी कर दिया है। मजदूरों के खातों में पैसा पहुंचने भी लगा होगा। बताया कि अब तक 34.30 लाख मानवदिवस लक्ष्य के सापेक्ष 30.82 लाख मानवदिवस पूरे हो चुके हैं।