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Kanpur News: हैलट में दवाओं का संकट, महीने भर का स्टाॅक बचा
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माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट और संबद्ध अस्पतालों पर दवाओं के संकट का खतरा मंडरा रहा है। हैलट के दवाओं के स्टाॅक में मुश्किल से महीने भर की दवाएं हैं। इसके बाद जीवन रक्षक दवाओं के साथ ही सामान्य रोगों में दी जाने वाली दवाएं भी खत्म हो जाएंगी। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इस आशय का पत्र शासन को लिखा है। इसमें कहा गया कि यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन दवाएं नहीं दे पा रहा है। कॉरपोरेशन की दवाएं घटिया भी होती हैं।
डॉ. संजय ने बताया कि मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को एक साल में 9.1 करोड़ रुपये दवाओं के मद में भुगतान किया गया है लेकिन एक करोड़ की ही दवा मिली है। दवाओं की गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि एक महीने के बाद दवाओं का संकट होगा। अस्पताल से रोगियों को दवाएं नहीं मिल पाएंगी। उन्होंने बताया कि दवाओं का जो बजट मिलता है उसमें 80 फीसदी से कॉरपोरेशन से दवाएं खरीदी जाती हैं। 20 फीसदी वह रेट कॉन्टैक्ट पर खरीदते हैं। यह बजट जल्दी खत्म हो जाता है। पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि 60 फीसदी बजट से रेट कॉन्टैक्ट पर दवा खरीदने की अनुमति दी जाए। डॉ. काला ने बताया कि दवाएं पनकी स्थित कॉरपोरेशन के सेंटर से लानी पड़ती है। दवाएं अस्पताल तक नहीं पहुंचाई जातीं।
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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हैलट और संबद्ध अस्पतालों पर दवाओं के संकट का खतरा मंडरा रहा है। हैलट के दवाओं के स्टाॅक में मुश्किल से महीने भर की दवाएं हैं। इसके बाद जीवन रक्षक दवाओं के साथ ही सामान्य रोगों में दी जाने वाली दवाएं भी खत्म हो जाएंगी। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इस आशय का पत्र शासन को लिखा है। इसमें कहा गया कि यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन दवाएं नहीं दे पा रहा है। कॉरपोरेशन की दवाएं घटिया भी होती हैं।
डॉ. संजय ने बताया कि मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन को एक साल में 9.1 करोड़ रुपये दवाओं के मद में भुगतान किया गया है लेकिन एक करोड़ की ही दवा मिली है। दवाओं की गुणवत्ता भी ठीक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि एक महीने के बाद दवाओं का संकट होगा। अस्पताल से रोगियों को दवाएं नहीं मिल पाएंगी। उन्होंने बताया कि दवाओं का जो बजट मिलता है उसमें 80 फीसदी से कॉरपोरेशन से दवाएं खरीदी जाती हैं। 20 फीसदी वह रेट कॉन्टैक्ट पर खरीदते हैं। यह बजट जल्दी खत्म हो जाता है। पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि 60 फीसदी बजट से रेट कॉन्टैक्ट पर दवा खरीदने की अनुमति दी जाए। डॉ. काला ने बताया कि दवाएं पनकी स्थित कॉरपोरेशन के सेंटर से लानी पड़ती है। दवाएं अस्पताल तक नहीं पहुंचाई जातीं।
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