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Kanpur News: पेट नहीं, फेफड़े के संक्रमण से हुई थी महिला की मौत
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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की जिस डॉक्टर पर लापरवाही से ऑपरेशन करने का आरोप लगाकर आईजीआरएस में शिकायत की गई है वह ऑपरेशन के दिन छुट्टी पर थीं। ये बातें प्राचार्य डॉ. संजय काला ने शनिवार को कहीं। बताया कि महिला की मौत पेट में संक्रमण से नहीं हुई थी। रोगी की मौत फेफड़ों की धमनी में थक्के के कारण रक्तप्रवाह रुकने (पल्मोनरी एंबॉलिज्म) से हुई है। लिखित शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. काला ने कहा कि अगर पेट में कॉटन होता तो रोगी की मौत पेट के संक्रमण से होती। तीमारदारों को पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। अगर पेट में कुछ होने की बात स्क्रीनिंग में पता चल जाती। महिला अस्पताल में दोबारा भर्ती हुई थी। वह कहीं और से ऑपरेशन करवाकर हैलट आई थीं। महिला को खून और दवाएं दी गईं। महिला की मौत हैलट में ही हुई है। विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि स्वरूप नगर पुलिस से शिकायत की जानकारी मिली है। जिस डॉक्टर पर आरोप है वह ऑपरेशन के दिन छुट्टी पर थीं। सर्जरी हमारे यहां ही हुई है। स्वरूप नगर इंस्पेक्टर सूर्यबली पांडेय ने बताया कि सीएम पोर्टल पर आई शिकायत की जांच की जा रही है। निजी अस्पताल के जिस डॉक्टर ने पेट में कॉटन होने की बात परिजनों से कही थी वह शनिवार को अस्पताल नहीं आईं। रविवार को फिर अस्पताल जाएंगे।
ये हैं आरोप
सुल्तानपुर निवासी रामखिलावन पांडेय के मुताबिक उनकी पत्नी ममता के पेट में तकलीफ थी, जिसके चलते स्त्री रोग विभाग में दो जनवरी को भर्ती कराया था। जांच में बच्चेदानी की झिल्ली में समस्या पाई जाने पर महिला डॉक्टर ने सर्जरी की और नौ जनवरी को ममता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। 20 दिन बाद ममता के पेट में फिर से दर्द होने लगा। काकादेव के निजी अस्पताल में दिखाया तो एक्सरे में पता चला कि पेट में ऑपरेशन के बाद कॉटन छूट गया है। इस वजह से असहनीय दर्द हो रहा था। छह महीने तक प्राइवेट अस्पताल में ममता का इलाज कराया। आर्थिक तंगी के कारण फिर से हैलट के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। 20 अगस्त को पत्नी की मौत हो गई। रामखिलावन ने स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर पर पेट में कॉटन छोड़ने का आरोप लगाया है।
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डॉ. काला ने कहा कि अगर पेट में कॉटन होता तो रोगी की मौत पेट के संक्रमण से होती। तीमारदारों को पोस्टमार्टम कराना चाहिए था। अगर पेट में कुछ होने की बात स्क्रीनिंग में पता चल जाती। महिला अस्पताल में दोबारा भर्ती हुई थी। वह कहीं और से ऑपरेशन करवाकर हैलट आई थीं। महिला को खून और दवाएं दी गईं। महिला की मौत हैलट में ही हुई है। विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि स्वरूप नगर पुलिस से शिकायत की जानकारी मिली है। जिस डॉक्टर पर आरोप है वह ऑपरेशन के दिन छुट्टी पर थीं। सर्जरी हमारे यहां ही हुई है। स्वरूप नगर इंस्पेक्टर सूर्यबली पांडेय ने बताया कि सीएम पोर्टल पर आई शिकायत की जांच की जा रही है। निजी अस्पताल के जिस डॉक्टर ने पेट में कॉटन होने की बात परिजनों से कही थी वह शनिवार को अस्पताल नहीं आईं। रविवार को फिर अस्पताल जाएंगे।
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ये हैं आरोप
सुल्तानपुर निवासी रामखिलावन पांडेय के मुताबिक उनकी पत्नी ममता के पेट में तकलीफ थी, जिसके चलते स्त्री रोग विभाग में दो जनवरी को भर्ती कराया था। जांच में बच्चेदानी की झिल्ली में समस्या पाई जाने पर महिला डॉक्टर ने सर्जरी की और नौ जनवरी को ममता को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। 20 दिन बाद ममता के पेट में फिर से दर्द होने लगा। काकादेव के निजी अस्पताल में दिखाया तो एक्सरे में पता चला कि पेट में ऑपरेशन के बाद कॉटन छूट गया है। इस वजह से असहनीय दर्द हो रहा था। छह महीने तक प्राइवेट अस्पताल में ममता का इलाज कराया। आर्थिक तंगी के कारण फिर से हैलट के सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। 20 अगस्त को पत्नी की मौत हो गई। रामखिलावन ने स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर पर पेट में कॉटन छोड़ने का आरोप लगाया है।
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