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मेनोपॉज के बाद डायबिटिक महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा दोगुना: डॉ. सुशील मोदी
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मेनोपॉज कार्यक्रम में पुरस्कार वितरण करतीं डाॅ. किरण पांडेय, डाॅ. अंजू जैन, डाॅ. रेनू गुप्ता, ड
- फोटो : संवाद
कानपुर। मेनोपॉज के बाद अगर महिला को शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल है तो हार्ट अटैक का खतरा पुरुषों के मुकाबले दोगुना हो जाता है। बचाव के लिए 46 की आयु के बाद महिलाएं हृदय संबंधी जांचें नियमित कराएं। ये जानकारी दिल्ली से आए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशील मोदी ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी की ओर से चल रहे तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंतिम दिन रविवार को दी।
डॉ. सुशील ने 46 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं को समय रहते रूटीन सुधार लेने की सलाह दी। कहा कि मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाती हैं। इससे महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। महिलाएं सही पोषण, भरपूर नींद, व्यायाम और नियमित जांचें कराती रहें। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आयुर्वेदाचार्य वंदना पाठक ने दीप प्रज्वलित कर किया।
मेनोपॉज पब्लिक फोरम में हड्डी, टीकाकरण, कार्डियोवैस्कुलर और मानसिक सेहत पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञों डॉ. मिलिंद साह, डॉ. मीता, डॉ. अर्चना द्विवेदी, डॉ. साधना गुप्ता, डॉ. सुनील मोदी, डॉ. नीरज पांडे, डॉ. अर्चना झा, डॉ. अनिल महाजन, डॉ. मीरा राघवन ने महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी।
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कार्यक्रम के अंतिम दिन सीआईएमपी कॉन्वोकेशन का आयोजन किया गया। परीक्षा में कानपुर मेनोपॉज सोसाइटी डॉ. हिमानी ने पहला, डॉ. दीप्ति को दूसरा और डॉ. प्रीति त्यागी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। डॉ. सपना सिंह, डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी के निर्देशन में गर्भाशय का कैंसर, रक्तस्त्राव संबंधी बीमारियां, 50 के बाद गर्भधारण करना और मेनोपॉज के बाद महिलाओं को होने वाली समस्याओं पर शोध पत्रों को प्रस्तुत करने की प्रतियोगिता कराई गई।
देश के विभिन्न प्रांतों से आए डाॅक्टरों ने इसमें हिस्सा लिया। जोधपुर से गायनी में एमडी करने वाली शहर की डॉ. अंशवी राजे को शोध पत्र प्रस्तुत करने पर पहला पुरस्कार दिया गया। मुंबई से आए डॉ. मिलिंद ने बताया कि 46 की आयु के बाद मेनोपॉज के कारण ही महिलाओं में चिड़चिड़ेपन की शिकायत होती है। मेनोपॉज में हार्मोन की कमी से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ता है। बचाव के लिए महिलाएं 40 साल के बाद ही अपना खानपान सुधारें।
व्यायाम और आठ घंटे की नींद जरूर लें। ऐसा करके इस खतरे को कम किया जा सकता है। सूरत से आईं डॉ. अनीता ने बताया कि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद मोटापा भी बढ़ जाता है, इसलिए उसे पहले रोकें। जम्मू कश्मीर से आईं डॉ. सुधा शर्मा ने कहा कि समाज में मेनोपॉज को लेकर भी काम होना चाहिए।
महिलाओं को अच्छा खानपान मिले। परिवार का सहयोग मिले। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनीता शाह, राष्ट्रीय सचिव डॉ. बिपाशा सेन, डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. किरन पांडे, सचिव डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. कल्पना दीक्षित, डॉ. नीलम मिश्रा मौजूद रहे।
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डॉ. सुशील ने 46 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं को समय रहते रूटीन सुधार लेने की सलाह दी। कहा कि मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी हो जाती हैं। इससे महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। महिलाएं सही पोषण, भरपूर नींद, व्यायाम और नियमित जांचें कराती रहें। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आयुर्वेदाचार्य वंदना पाठक ने दीप प्रज्वलित कर किया।
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मेनोपॉज पब्लिक फोरम में हड्डी, टीकाकरण, कार्डियोवैस्कुलर और मानसिक सेहत पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञों डॉ. मिलिंद साह, डॉ. मीता, डॉ. अर्चना द्विवेदी, डॉ. साधना गुप्ता, डॉ. सुनील मोदी, डॉ. नीरज पांडे, डॉ. अर्चना झा, डॉ. अनिल महाजन, डॉ. मीरा राघवन ने महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी।
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कार्यक्रम के अंतिम दिन सीआईएमपी कॉन्वोकेशन का आयोजन किया गया। परीक्षा में कानपुर मेनोपॉज सोसाइटी डॉ. हिमानी ने पहला, डॉ. दीप्ति को दूसरा और डॉ. प्रीति त्यागी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। डॉ. सपना सिंह, डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी के निर्देशन में गर्भाशय का कैंसर, रक्तस्त्राव संबंधी बीमारियां, 50 के बाद गर्भधारण करना और मेनोपॉज के बाद महिलाओं को होने वाली समस्याओं पर शोध पत्रों को प्रस्तुत करने की प्रतियोगिता कराई गई।
देश के विभिन्न प्रांतों से आए डाॅक्टरों ने इसमें हिस्सा लिया। जोधपुर से गायनी में एमडी करने वाली शहर की डॉ. अंशवी राजे को शोध पत्र प्रस्तुत करने पर पहला पुरस्कार दिया गया। मुंबई से आए डॉ. मिलिंद ने बताया कि 46 की आयु के बाद मेनोपॉज के कारण ही महिलाओं में चिड़चिड़ेपन की शिकायत होती है। मेनोपॉज में हार्मोन की कमी से महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर पड़ता है। बचाव के लिए महिलाएं 40 साल के बाद ही अपना खानपान सुधारें।
व्यायाम और आठ घंटे की नींद जरूर लें। ऐसा करके इस खतरे को कम किया जा सकता है। सूरत से आईं डॉ. अनीता ने बताया कि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद मोटापा भी बढ़ जाता है, इसलिए उसे पहले रोकें। जम्मू कश्मीर से आईं डॉ. सुधा शर्मा ने कहा कि समाज में मेनोपॉज को लेकर भी काम होना चाहिए।
महिलाओं को अच्छा खानपान मिले। परिवार का सहयोग मिले। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनीता शाह, राष्ट्रीय सचिव डॉ. बिपाशा सेन, डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. किरन पांडे, सचिव डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. कल्पना दीक्षित, डॉ. नीलम मिश्रा मौजूद रहे।