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Kanpur: सिर नहीं खोलेंगे…नाक के रास्ते होगी ब्रेन सर्जरी, रोगियों का हॉस्पिटल स्टे होगा कम, ये होंगे लाभ

Wed, 17 Jul 2024 12:32 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 17 Jul 2024 12:32 PM IST
सार

Kanpur News: न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी मिलाकर औसत सात रोगी प्रत्येक ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा अस्पताल में दो-ढाई सौ न्यूरो रोगी अस्पताल में बराबर भर्ती रहते हैं। 18 जिले के रोगी विभाग में इलाज के लिए आ रहे हैं। हर महीने 20-25 गंभीर रोगियों की सर्जरी होती है।

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The head will not be opened, brain surgery will be done through nose, hospital stay of patients will be less
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मस्तिष्क के निचले हिस्से के ट्यूमर को निकालने के लिए अब चीरा लगाकर सिर खोलने की जरूरत नहीं है। नाक के रास्ते न्यूरो इंडोस्कोप से ट्यूमर निकाल दिया जाता है। इसके साथ ही अन्य ट्यूमर के लिए रोबोटिक सर्जरी भी शुरू होगी। इसमें सर्जन के हाथ में कंपन हो जाने और दूसरी मानवीय चूक की गुंजाइश नहीं रहेगी। सटीक सर्जरी होगी और जिन कोशिकाओं को काटना है, वही कटेंगी।

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इसके लिए हैलट के न्यूरो साइंसेस विभाग में एक करोड़ 65 लाख रुपये का न्यूरो नेवीगेशन सिस्टम आ गया है।  रोबोट के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। सीएसआर फंड से भी इसकी व्यवस्था हो सकती है। बिना चीरा लगाए सर्जरी की वजह से न्यूरो रोगियों की रिकवरी बेहतर होने के साथ ही उन्हें अस्पताल में कम रुकना पड़ रहा है। कम से कम दो सप्ताह का रुकना अब दो-तीन दिन का रह गया।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि उच्चीकृत उपकरण आने से इलाज की गुणवत्ता कई गुना बढ़ी है। रोबोटिक सर्जरी जल्दी ही शुरू की जाएगी।  उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र में ट्यूमर सर्जरी के जिस इलाज में रोगी को कम से कम ढाई-तीन लाख रुपये खर्च आता है। वही सर्जरी हैलट में चार सौ रुपये सरकारी फीस में रोगियों को मिल जा रही है।

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अंग के अंदर की थ्री डायमेंशनल इमेज दिखाई पड़ती है
न्यूरो इंडोस्कोप से पिटीट्यूरी ट्यूमर और मस्तिष्क के निचले हिस्से की गांठों के साथ ही स्पाइनल कॉर्ड की डिस्क भी निकाली जा रही है। इसमें चीरा नहीं लगता पांच एमएम का छेद करके डिस्क निकाल ली जाती है।  रोगी को बेहोश भी नहीं किया जाता। इसी तरह स्क्रू भी लगा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रोबोट के साथ ही ओ आर्म का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसमें मस्तिष्क के अलावा स्पाइनल कॉर्ड की सर्जरी में भी आसानी होगी। ओ आर्म आने से स्क्रू और प्लेट लगाने में आसानी होती है। इसमें अंग के अंदर की थ्री डायमेंशनल इमेज दिखाई पड़ती है, जिससे सर्जरी आसानी होती है।

ओपीडी सात सौ, आईपीडी ढाई सौ रोगी
न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि न्यूरो सर्जरी और न्यूरोलॉजी मिलाकर औसत सात रोगी प्रत्येक ओपीडी में आते हैं। इसके अलावा अस्पताल में दो-ढाई सौ न्यूरो रोगी अस्पताल में बराबर भर्ती रहते हैं। 18 जिले के रोगी विभाग में इलाज के लिए आ रहे हैं। हर महीने 20-25 गंभीर रोगियों की सर्जरी होती है। रोगियों की संख्या अधिक होेने की वजह से मस्तिष्क और स्पाइन सर्जरी में महीने-डेढ़ महीने की वेटिंग रहती है।

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