{"_id":"5797b91f4f1c1b3a3721df9f","slug":"the-bank-paid-the-installment-of-their-manager","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने प्रबंधक की किस्त बैंक ने चुकाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपने प्रबंधक की किस्त बैंक ने चुकाई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन
एचडीएफसी ने शुरू किया देश का पहला एसएमई बैंक
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कानपुर। ब्रह्मावर्त कामर्शियल कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन का एक और कारनामा सामने आया है। बैंक की रतनलाल नगर स्थित शाखा के पूर्व प्रबंधक के लोन की दो किस्तें (करीब 87 हजार रुपये) बैंक के प्रॉफिट एंड लॉस एकाउंट से दी गईं। इसके बाद लोन एकाउंट को एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया। लोन की बची हुई रकम उनसे अभी तक वसूली नहीं जा सकी है।
रतनलाल नगर शाखा के प्रबंधक रहे केएस त्रिपाठी ने पत्नी सुषमा त्रिपाठी के नाम से 14 लाख रुपये का लोन लिया था। 15531 रुपये मासिक किस्त तय हुई। करीब साढ़े तीन लाख रुपये लोन अदा करने के बाद एक साल तक किस्तें जमा नहीं हुईं। लोन की रकम फिर से मूल राशि के बराबर आ गई।
इस दौरान बैंक में खेल हुआ। बैंक के प्रॉफिट एंड लॉस एकाउंट से दो किस्तें इस लोन एकाउंट में जमा हो गईं। पहली किस्त सितंबर 2010 में 26362 रुपये, जबकि डेढ़ साल बाद दूसरी किस्त 61000 रुपये जमा हुई। रिजर्व बैंक की जांच में यह खामी पकड़ी गई और कुछ समय बाद शाखा प्रबंधक केके त्रिपाठी को सस्पेेंड कर दिया गया। प्रबंधक को सस्पेंड करने के बाद प्रबंध समिति ने इनके एकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया। इस तरह पूर्व प्रबंधक का करीब आठ लाख रुपये बैंक पर बकाया है। नवनियुक्त रिकवरी अफसर सौरभ पांडेय इनसे भी लोन की राशि वसूल नहीं कर पाए हैं।
विज्ञापन
इन सवालों का जवाब दे ब्रह्मावर्त बैंक
a पूर्व प्रबंधक के लोन की किस्त बैंक के प्रॉफिट एंड लॉस एकाउंट से क्यों जमा कराई गई?
a पूर्व प्रबंधक से वसूली के लिए नव नियुक्त रिकवरी अफसर ने क्या प्रयास किए?
a ब्रह्मावर्त बैंक में अब कुल कितने खाते एनपीए हैं?
a खाताधारकों की जमा राशि वापस करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
a रिजर्व बैंक की रोक के बावजूद बेटे को रिकवरी अफसर क्यों बनाया गया?
a बैंक पर प्रतिबंध लगा है तो बेटे की नियुक्ति किस आधार पर हुई?
रतनलाल नगर शाखा के प्रबंधक रहे केएस त्रिपाठी ने पत्नी सुषमा त्रिपाठी के नाम से 14 लाख रुपये का लोन लिया था। 15531 रुपये मासिक किस्त तय हुई। करीब साढ़े तीन लाख रुपये लोन अदा करने के बाद एक साल तक किस्तें जमा नहीं हुईं। लोन की रकम फिर से मूल राशि के बराबर आ गई।
विज्ञापन
इस दौरान बैंक में खेल हुआ। बैंक के प्रॉफिट एंड लॉस एकाउंट से दो किस्तें इस लोन एकाउंट में जमा हो गईं। पहली किस्त सितंबर 2010 में 26362 रुपये, जबकि डेढ़ साल बाद दूसरी किस्त 61000 रुपये जमा हुई। रिजर्व बैंक की जांच में यह खामी पकड़ी गई और कुछ समय बाद शाखा प्रबंधक केके त्रिपाठी को सस्पेेंड कर दिया गया। प्रबंधक को सस्पेंड करने के बाद प्रबंध समिति ने इनके एकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया। इस तरह पूर्व प्रबंधक का करीब आठ लाख रुपये बैंक पर बकाया है। नवनियुक्त रिकवरी अफसर सौरभ पांडेय इनसे भी लोन की राशि वसूल नहीं कर पाए हैं।
विज्ञापन
इन सवालों का जवाब दे ब्रह्मावर्त बैंक
a पूर्व प्रबंधक के लोन की किस्त बैंक के प्रॉफिट एंड लॉस एकाउंट से क्यों जमा कराई गई?
a पूर्व प्रबंधक से वसूली के लिए नव नियुक्त रिकवरी अफसर ने क्या प्रयास किए?
a ब्रह्मावर्त बैंक में अब कुल कितने खाते एनपीए हैं?
a खाताधारकों की जमा राशि वापस करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
a रिजर्व बैंक की रोक के बावजूद बेटे को रिकवरी अफसर क्यों बनाया गया?
a बैंक पर प्रतिबंध लगा है तो बेटे की नियुक्ति किस आधार पर हुई?