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किडनी का मरीज बता अवैतनिक अवकाश पर नौकरी करता रहा फर्जी शिक्षक, प्रधानचार्य ने दर्ज कराई रिपोर्ट

Thu, 02 Jul 2020 03:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 02 Jul 2020 03:16 PM IST
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Telling a kidney patient, fake teacher continued to work on unpaid leave
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश में हरदोई के एक माध्यमिक विद्यालय में स्थानांतरण होकर आए सहायक अध्यापक का फर्जी शिक्षक के रूप में खुलासा हुआ है। अपर शिक्षा निदेशक के निर्देश पर प्रधानाचार्य ने शिक्षक के खिलाफ मंगलवार की देर शाम कोतवाली शहर में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। स्कूल प्रबंधक की मानें तो स्थानांतरण आदेश देने व तैनाती के बाद वह किडनी का मरीज खुद को बताकर गायब रहता था।
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वैदिक विद्या मंदिर इंटर कालेज के प्रधानाचार्य सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि जुलाई 2019 को पीलीभीत के सरदार बल्लभ भाई पटेल इंटर कालेज अमृतखास से स्थानांतरित होकर उनके विद्यालय में तैनाती करवाने सहायक अध्यापक के रूप में एक शिक्षक आया था। उसने अपना नाम उत्कर्ष झा व निवासी कानपुर बेनाझाबर कालोनी बताया।
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बकौल प्रधानाचार्य वह जो स्थानांतरण आदेश लाया था उसमें निदेशक के हस्ताक्षर थे। तैनाती के बाद दो तीन दिन रुक कर वह फिर किडनी की बीमारी बताकर करीब साढ़े तीन माह अवैतनिक अवकाश पर चला गया। फरवरी माह में जब आया तो सर्विस बुक भी ले आया लेकिन उसके लाने से पहले ही अपर शिक्षा निदेशक ने पत्र जारी कर उन्हें अवगत करा दिया था कि कोई भी वेतन आदि न जारी किया जाए उसकी जांच चल रही है।
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इधर 23 जून को अपर शिक्षा निदेशक ने उसके सारे अभिलेख फर्जी बताए। उसकी किसी कालेज में तैनाती न होने की जानकारी मिली है। प्रधानाचार्य ने मंगलवार की देर शाम कोतवाली में तहरीर देकर इस फर्जी शिक्षक के खिलाफ 420 व धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करवाया है। कोतवाली प्रभारी शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

डीआईओएस वीके दुबे ने बताया कि फरवरी माह में निदेशक की ओर से सूचना दी गई थी कि उसके प्रपत्रों की जांच की जा रही है। जांच होने तक वेतन न जारी किया जाए। इसके बाद मंगलवार शाम उसके फर्जी होने की पुष्टि हुई। जिसके बाद देर रात प्रधानाचार्य ने रिपोर्ट दर्ज कराई।

जेडी व लेखाधिकारी के साइन से लाया दस्तावेज
प्रधानाचार्य ने बताया कि उसके जो भी दस्तावेज आए वह सभी बखूबी उसी पैटर्न पर बने आते थे। यहां तक कि लेखाधिकारी से लेकर जेडी तक के साइन मिलते-जुलते बने थे। निश्चित रूप से किसी तरह के गैंग से उसका वास्ता रहा होगा।
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