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Teachers Day: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को टीचर ने दी थी ये सलाह
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 06 Sep 2017 12:23 AM IST
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के टीचर सुमन निगम
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आज टीचर डे है। रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने पर उनके टीचर ने उन्हें सलाह दी थी। आइए जानते हैं राष्ट्रपति के टीचर ने उन्हें क्या सलाह दी थी...
भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (1952 - 1962) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (5 सितम्बर 1888 – 17 अप्रैल 1975) की जयंती पर मनाये जाने वाले शिक्षक दिवस पर हम आज अपने देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उस टीचर के बारे में बात करते हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले अपने शिष्य को खास सुझाव दिया था। कानपुर देहात के परौंख गांव में जन्मे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर के डीसी लॉ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। उनके अध्यापक सुमन निगम ने उन्हें एक सुझाव दिया था। निगम चाहते हैं कि उनके शिष्य सबसे पहले गौ रक्षा के नाम पर होने वाली कथित हत्याओं पर लगाम लगाएं। साथ ही निगम का यह भी कहना है कि कोविंद को सरकार को वैसे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो।
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भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (1952 - 1962) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (5 सितम्बर 1888 – 17 अप्रैल 1975) की जयंती पर मनाये जाने वाले शिक्षक दिवस पर हम आज अपने देश के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के उस टीचर के बारे में बात करते हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले अपने शिष्य को खास सुझाव दिया था। कानपुर देहात के परौंख गांव में जन्मे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर के डीसी लॉ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। उनके अध्यापक सुमन निगम ने उन्हें एक सुझाव दिया था। निगम चाहते हैं कि उनके शिष्य सबसे पहले गौ रक्षा के नाम पर होने वाली कथित हत्याओं पर लगाम लगाएं। साथ ही निगम का यह भी कहना है कि कोविंद को सरकार को वैसे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो।
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कई फैसले देश के लिए ठीक नहीं
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के टीचर सुमन निगम
सुमन निगम ने कोविंद के राष्ट्रपति बनने पर कहा था कि सरकार के कई फैसले देश के लिए ठीक नहीं है। एक ताजा उदाहरण है जीएसटी। गरीब आदमी, जैसे सब्जी बेचने वाला भी इसके दायरे में आ गया है। कोविंद को सरकार को अच्छे सुझाव देने चाहिए जिससे सबका भला हो।
मुझे उम्मीद है कोविंद जाति, धर्म से ऊपर उठ कर वैसे कदम उठाएंगे जिससे हर आदमी सुखी होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई कानपुर से की है। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से बी. कॉम की डिग्री हासिल की। उसके बाद जुलाई, 1966 में उन्होंने डीसी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया।
निगम कहते हैं कि उन दिनों लॉ की पढ़ाई दो साल की होती थी। मैं उस दौरान कोविंद का अध्यापक था। निगम 88 साल के हैं और कानपुर के सिविल लाइन्स मोहल्ले में रहते हैं। ज्यादा उम्र की वजह से बहुत ज्यादा लोगों से मिलते नहीं हैं। निगम के अनुसार कॉलेज में सैकड़ों छात्र थे। वे किसी को भी नहीं पहचानते थे। लेकिन एक छोटी सी घटना की वजह से वो कोविंद को पहचानने लगे।
मुझे उम्मीद है कोविंद जाति, धर्म से ऊपर उठ कर वैसे कदम उठाएंगे जिससे हर आदमी सुखी होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई कानपुर से की है। उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से बी. कॉम की डिग्री हासिल की। उसके बाद जुलाई, 1966 में उन्होंने डीसी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया।
निगम कहते हैं कि उन दिनों लॉ की पढ़ाई दो साल की होती थी। मैं उस दौरान कोविंद का अध्यापक था। निगम 88 साल के हैं और कानपुर के सिविल लाइन्स मोहल्ले में रहते हैं। ज्यादा उम्र की वजह से बहुत ज्यादा लोगों से मिलते नहीं हैं। निगम के अनुसार कॉलेज में सैकड़ों छात्र थे। वे किसी को भी नहीं पहचानते थे। लेकिन एक छोटी सी घटना की वजह से वो कोविंद को पहचानने लगे।
तब निगम को ध्यान आया कि वो उन्हीं के छात्र थे
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के टीचर सुमन निगम
निगम पुराने दिनों की बातें बताते-बताते उसी जमाने में खो गए। उन्होंने बताया कि एक बार स्कूल के रजिस्टर पर कोविंद की जगह गोविन्द चढ़ गया था और वह काफी दिनों तक रहा। फिर एक दिन ये बात सामने आई।
भूल सुधार किया गया और रजिस्टर में गोविन्द को कोविंद किया गया। उसके बाद से कोविंद मेरी नजरों में आ गए। उनके अनुसार कोविंद लॉ कॉलेज में शुरू से ही दूसरे छात्रों से अलग थे और उनमे पढ़ाई के प्रति लगन बहुत ज्यादा थी। निगम ने कहा मैं क्लास में लेक्चर दिया करता था।
डिक्टेट नहीं करता था। कोविंद के अलावा कोई दूसरा छात्र उन नोट्स को अपनी कॉपी में लिखता नहीं था। कोविंद रोज कॉलेज आया करते थे। कॉलेज की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन से महंगी किताबें देने के लिए मिन्नतें करते थे और फिर वह उन किताबों से नोट्स बनाया करते थे। लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद निगम और कोविंद के बीच संपर्क नहीं रहा। जब कोविंद बिहार के राज्यपाल बने तो निगम को ध्यान आया की वो उन्हीं के छात्र थे।
भूल सुधार किया गया और रजिस्टर में गोविन्द को कोविंद किया गया। उसके बाद से कोविंद मेरी नजरों में आ गए। उनके अनुसार कोविंद लॉ कॉलेज में शुरू से ही दूसरे छात्रों से अलग थे और उनमे पढ़ाई के प्रति लगन बहुत ज्यादा थी। निगम ने कहा मैं क्लास में लेक्चर दिया करता था।
डिक्टेट नहीं करता था। कोविंद के अलावा कोई दूसरा छात्र उन नोट्स को अपनी कॉपी में लिखता नहीं था। कोविंद रोज कॉलेज आया करते थे। कॉलेज की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन से महंगी किताबें देने के लिए मिन्नतें करते थे और फिर वह उन किताबों से नोट्स बनाया करते थे। लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद निगम और कोविंद के बीच संपर्क नहीं रहा। जब कोविंद बिहार के राज्यपाल बने तो निगम को ध्यान आया की वो उन्हीं के छात्र थे।