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Kanpur News: रिटर्न दाखिल करने से पहले ही ठीक कर सकेंगे डाटा
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कानपुर। जीएसटीएन ने करदाताओं को बड़ी राहत दी है। अब रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाता डाटा में संशोधन कर सकेंगे। इससे वे रिटर्न निरस्त या नोटिस की कार्रवाई से बच सकेंगे। इस संंबंध में 16 मई को निर्देश जारी किए गए हैं।
जीएसटीएन ने जीएसटीआर-3बी की सूची 3.2 में बदलाव संबंधी निर्देश जारी किए हैं। फॉर्म जीएसटीआर-3बी एक सरलीकृत सारांश रिटर्न है। रिटर्न का उद्देश्य करदाताओं के लिए किसी विशेष कर अवधि के लिए अपनी सारांश जीएसटी देनदारियों की घोषणा करना होता है।
इसके साथ ही 3.2 सूची को भरना होता है। इस सूची में अंतरराज्यीय अपंजीकृत डीलर को की गई आपूर्ति (बिक्री) का विवरण देना होता है।
केसीएएस सीपीई स्टडी सर्किल के उप संयोजक सीए नितिन सिंह ने बताया कि जीएसटीएन ने पहले 11 अप्रैल 2025 को जारी एक निर्देश में कहा था कि अप्रैल 2025 कर अवधि (मई 2025 में दाखिल होने वाली रिटर्न) से सूची 3.2 में स्वतः भरे गए मूल्यों को संशोधित नहीं किया जा सकता है।
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करदाताओं की शिकायतों के बाद अब जीएसटीएन ने सूची में संशोधन करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित बदलावों को जीएसटी पोर्टल पर लागू करने से पहले करदाताओं को एक संदेश के माध्यम से सूचित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले सूची 3.2 में संशोधन की प्रकिया लंबी थी। सूची संशोधन की व्यवस्था से करदाता रिटर्न दाखिल करने से पहले ही डाटा को ठीक कर सकते हैं।
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जीएसटीएन ने जीएसटीआर-3बी की सूची 3.2 में बदलाव संबंधी निर्देश जारी किए हैं। फॉर्म जीएसटीआर-3बी एक सरलीकृत सारांश रिटर्न है। रिटर्न का उद्देश्य करदाताओं के लिए किसी विशेष कर अवधि के लिए अपनी सारांश जीएसटी देनदारियों की घोषणा करना होता है।
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इसके साथ ही 3.2 सूची को भरना होता है। इस सूची में अंतरराज्यीय अपंजीकृत डीलर को की गई आपूर्ति (बिक्री) का विवरण देना होता है।
केसीएएस सीपीई स्टडी सर्किल के उप संयोजक सीए नितिन सिंह ने बताया कि जीएसटीएन ने पहले 11 अप्रैल 2025 को जारी एक निर्देश में कहा था कि अप्रैल 2025 कर अवधि (मई 2025 में दाखिल होने वाली रिटर्न) से सूची 3.2 में स्वतः भरे गए मूल्यों को संशोधित नहीं किया जा सकता है।
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करदाताओं की शिकायतों के बाद अब जीएसटीएन ने सूची में संशोधन करने का निर्णय लिया है। प्रस्तावित बदलावों को जीएसटी पोर्टल पर लागू करने से पहले करदाताओं को एक संदेश के माध्यम से सूचित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पहले सूची 3.2 में संशोधन की प्रकिया लंबी थी। सूची संशोधन की व्यवस्था से करदाता रिटर्न दाखिल करने से पहले ही डाटा को ठीक कर सकते हैं।