सफलता की एक कहानी ऐसी भी: क्रिकेट की ऐसी दीवानगी, घर से अकेला ही निकल पड़ा खुद को तराशने
चकेरी सनिगवां निवासी कुमार कार्तिकेय सिंह ने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता का मुकाम हासिल किया है, वो किसी को भी प्रेरित कर सकता है। वो महज 15 साल की उम्र में सीतापुर से कानपुर क्रिकेट सीखने आए थे और इसी सप्ताह मुंबई आईपीएल टीम में शामिल हुए हैं।
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इसे क्रिकेट की प्रति दीवानगी ही कहेंगे, जो महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट सीखने सीतापुर से अकेला ही कानपुर आ गया। खुद को तराशा और सफल होकर दिखाया। हम बात कर रहे हैं, तेज गेंदबाज कुमार कार्तिकेय सिंह की। रणजी प्लेयर कार्तिकेय को इसी सप्ताह मुंबई आईपीएल टीम में शामिल किया गया है। मुंबई ने उन्हें बेस प्राइस 20 लाख रुपये में खरीदा है।
चकेरी सनिगवां निवासी हेड कांस्टेबल पिता श्यामनाथ सिंह ने बताया कि बात तब की है, जब वे सीतापुर में थे। यहीं पर 2007 से बेटे कार्तिकेय ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। तब उसकी उम्र महज 11 साल थी। बेटे का खेल देख लोगों ने उसे कानपुर भेजने की सलाह दी। बेटा छोटा था, तो उसे अकेले भेजने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी। जब वह 15 साल का हुआ, तो उसका कमला क्लब में दाखिला कराया। वह यहां अकेला ही रहता था। यहां शशिकांत खांडेकर की देखरेख में उसने क्रिकेट के गुर सीखे और यूपी-16 टीम में चयन हुआ।
हालांकि एसोसिएशन की कुछ टेक्निकल दिक्कतों के कारण टीम के साथ नहीं जा सका। इसके बाद श्यामनगर 37 बटालियन में तैनात क्रिकेट कोच रोहन कन्हाई ने कार्तिकेय का प्रदर्शन देखा, तो उसे अपने साथ दिल्ली ले गए और लाल बहादुर स्टेडियम में प्रवेश करा दिया। यहां कार्तिकेय गौतम गंभीर जैसे दिग्गज बल्लेबाज उसे अभ्यास कराते थे।
प्रशिक्षक एसएन भरद्वाज से गेंदबाजी के टिप्स लेता था। उसका प्रदर्शन देख कोच भरद्वाज ने फीस भी माफ कर दी थी। इसके बाद उन्होंने कार्तिकेय को 2017 में मध्यप्रदेश भेज दिया। यहां उसका चयन एमपी की अंडर-23 टीम में हो गया। एक-दो मैच खेलने के बाद वह रणजी टीम में शामिल हो गया। पिछले तीन सालों से वह रणजी टीम का हिस्सा है। कार्तिकेय अभी तक नौ प्रथम श्रेणी के मैचों में 35, वनडे में 18 और टी-20 में नौ विकेट चटकाए हैं।
बेटे की वजह से छोड़ा सीतापुर, कानपुर में खरीदा घर
कार्तिकेय जब कानपुर आया, तो वहां परिवार का मन नहीं लग रहा था। इसलिए पिता श्यामनाथ ने अधिकारियों से कह-सुनकर अपनी तैनाती कानपुर करा ली। इसके बाद उन्होंने यहां पर मकान खरीदा और परिवार के साथ रहने लगे। श्यामनाथ वर्तमान में झांसी में तैनात हैं।