ऑनलाइन गेम में हारा, छापने लगा नकली नोट: यूट्यूब से सीखा जाली नोट बनाना, तीन माह में लाखों बाजार में खपाए
पतारा कस्बे से पुलिस ने 10वीं फेल नाबालिग संग नकली नोट छाप रहे पॉलीटेक्निक छात्र को गिरफ्तार किया है। बर्रा स्थित किराए के कमरे से 41 हजार के 100-100 के नकली नोट और प्रिंटर बरामद हुआ है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
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कानपुर के घाटमपुर की एक निजी पॉलीटेक्निक का छात्र अपने 10 वीं फेल नाबालिग के साथ मिलकर 100-100 के नकली नोट छाप रहा था। दोनों पतारा कस्बे की एक दुकान में नोट चलाए पहुंचे थे। व्यापारी की सूचना पर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। तीन माह में करीब चार लाख के नकली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं। नाबालिग एक गेमिंग एप में छह लाख रुपये हार गया था, तो दूसरे को कम समय में ज्यादा रुपये कमाने थे।
पुलिस ने बर्रा थाना क्षेत्र के एक घर से किराए के कमरे से 41 हजार रुपये के नकली नोट, प्रिंटिंग मशीन समेत अन्य उपकरण बरामद किए हैं। उनके साथियों की तलाश की जा रही है। एसपी आउटर तेज स्वरूप सिंह ने बताया कि शुक्रवार सुबह पतारा कस्बा स्थित एक किराना दुकान में पहुंचे बाइक सवार दो युवकों ने सामान खरीदने के बाद 100-100 के नकली नोट दिए। व्यापारी की सूचना पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। एक युवक की पहचान कानपुर नगर के वरुण बिहार, बर्रा-8 निवासी विभू यादव के रूप में हुई।
वहीं, दूसरा नाबालिग निकला। कड़ाई से पूछताछ में 100-100 के नकली नोट छापकर बाजार में चलाने की बात का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुकदमा दर्ज एक आरोपी को जेल भेज दिया, जबकि नाबालिग को संबंधी कोर्ट में भेजा गया। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर बर्रा थाना क्षेत्र के एक मकान के किराए के कमरे से 41 हजार रुपये के नकली नोट, भारी मात्रा में अधबने नोट, एक प्रिंटिंग मशीन व नोट छापने की डाई समेत अन्य सामान बरामद कर लिया। नकली नोटों को जांच के लिए देवास लैब भेजा गया है।
कम समय में रुपये कमाने को छापने लगे नोट
एसपी आउटर तेज स्वरूप सिंह ने बताया कि 10वीं फेल नाबालिग ने ऑनलाइन गेमिंग एप में सट्टेबाजी में मां के खाते से करीब छह लाख रुपये की रकम गवां दी। वहीं, निजी पॉलीटेक्निक में मैकेनिकल ब्रांच में प्रथम वर्ष के छात्र विभू को महंगे शौक थे। दोनों को कम समय रुपये कमाना चाहते थे। एक दोस्त ने उन्हें नकली नोट छापने की सलाह दी थी। बर्रा थाना क्षेत्र स्थित एक घर में किराए का कमरा लेकर नकली नोट छापना शुरू कर दिया। विभू के पिता इनकम टैक्स ऑफिसर की गाड़ी चलाते हैं।
यूट्यूब से सीखा जाली नोट बनाना
विभू ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने करीब एक महीने के प्रयास के बाद नकली नोट बनाना सीखा। नकली नोट छापने के लिए किस्त पर प्रिंटर लिया। साथ ही नोट छापने की डाई, कागज समेत अन्य सामान जुटाया गया। वह रात को यू-ट्यूब पर देखकर अभ्यास करता था। एक महीने बाद 100 के पुराने हूबहू असली जैसे नकली नोट बनाने लगा था। दोनों रात में नोट छापने के बाद खुद ही ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों में जाकर नकली नोट चलाते थे। आरोपी हर महीने 30 से 35 हजार रुपये तक के नकली नोट छापकर बाजार में चलाते थे। यह सिलसिला तीन महीने से चल रहा था।
तीन माह से छाप रहे, लाखों बाजार में खपाए
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि करीब तीन माह से 100-100 के पुराने नकली नोट छाप रहे थे, क्योंकि छोटा नोट चलाने में दिक्कत नहीं होती है। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर तीन माह में करीब चार लाख रुपये के नकली नोट शहर के साथ कानपुर आउटर, कानपुर देहात, हमीरपुर, औरैया समेत आसपास जनपदों में नकली नोट चलाए हैं। छोटे नोट होने की वजह से दुकानदार ज्यादा जांच पड़ताल नहीं करते थे, जिससे इतने दिनों तक पकड़ में नहीं आए। युवकों की प्लानिंग आगामी त्यौहारों में आसपास क्षेत्र में लाखों के नोट खपाने की थी।