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Kanpur News: अकेले खड़े थे, नहीं सह पाए तेज हवाओं के झोंके
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कानपुर। बीते कुछ दिनों में चली आंधी के कारण शहर में कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ धराशाही हो गए थे। पादप वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एकल खड़े पेड़ के लिए अकेले दम पर हवा के झटके झेलना मुश्किल होता है। जंगल में पास-पास लगे पेड़ हवा का प्रभाव कम हो जाता, इसलिए भी नहीं उखड़ते हैं। साथ ही शहरी इलाकों में लगे पेड़ जंगलों की अपेक्षा अधिक कमजोर हैं। पौधों को लगाते समय कुछ जरूरी बातें का ध्यान नहीं रखा जाता है। इस वजह से पेड़ों की शाखाओं के बीच के जोड़ का कोण छोटा हो जाता है और वे मजबूत नहीं हो पाती। इस कारण पेड़ पेड़ भी जड़ से उखड़ जाते हैं।
बीते शनिवार को हवाएं आधा घंटे तक सर्वाधिक तेज 37.9 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं। इतनी हवा में बड़े-बड़े पेड़ उखड़कर जमींदोज हो गए। शाखाएं टूटकर गिरने लगीं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक हवा की इतनी रफ्तार आंधी की श्रेणी में भी नहीं आती। ऐसे में पेड़ों के गिरने और शाखाओं के इतनी संख्या में टूटने पर विज्ञानी चौंक गए। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के उद्यान विभाग पेड़ों की सेहत के संबंध में अध्ययन कर चुका है। विज्ञानियों का अनुमान है कि मिट्टी की गिरती सेहत भी पेड़ों के उखड़ने के प्रमुख कारणों में से एक है।
अधिष्ठाता उद्यान संकाय एवं निदेशक प्रसार प्रोफेसर विवेक कुमार त्रिपाठी का अनुमान है कि घरों के आसपास, लॉन, रिसॉर्ट में पौधों को लगाने के समय लोग शाखाओं के बीच के कोण का ध्यान नहीं रखते। डालों के बीच का जोड़ अगर चौड़ा होगा तो डाल नहीं टूटेगी। दो शाखाओं के बीच जोड़ का कोण 90 डिग्री होना चाहिए। कम होने पर दबाव पड़ने से शाखाएं टूट जाती हैं। इसके अलावा पौधा लगाने के लिए बीज आधा फीट गड्ढे में दबाना चाहिए। ऊपर रखने से जड़ें गहराई में नहीं जातीं। मिट्टी के अंदर ऊपर की तरफ ही फैली रहती हैं। इस पर तेज हवा में भी पेड़ उखड़कर गिर जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि एकल खड़े पेड़ के लिए अकेले दम पर हवा के झटके झेलना मुश्किल होता है। जंगल में पास-पास लगे पेड़ अपनी ऊंचाई से छह गुना दूरी तक हवा का प्रभाव रोकते हैं। इसलिए बागों के उत्तर-पश्चिम में शीशम, नीम, देसी आम आदि के पेड़ लगाने चाहिए।
ऐसे कमजोर हो रही मिट्टी
विज्ञानियों ने बताया कि मिट्टी में जीवांश पदार्थ, जिंक, बोरान, कैल्शियम, मैग्नीजियम, फास्फोरस, पोटेशियम, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व होने चाहिए। इनकी निरंतर मिट्टी में कमी हो रही है। पोषक तत्वों की कमी से पेड़ों, पौधों में कुपोषण जैसी स्थिति विकसित होने लगती है।
डीएवी कॉलेज के पादप आणविक जैवकीय विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि शहरी इलाकों के पेड़ों को मिट्टी के पोषक तत्व अधिक नहीं मिल पाती। पत्तियां पेड़ों के पास मिट्टी में सड़-गल नहीं पातीं। इन्हें साफकर फेंक दिया जाता है। पत्तियों के सड़ने से मिट्टी को पोषक तत्व मिलते हैं। इनकी कमी से सालों तक बने रहने से पेड़ों की संरचना पर दुष्प्रभाव आता है।
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ऐसे लगाए जाने चाहिए पौधे
पौधे जब बड़े होने लगे तो उनकी शाखाओं में डोरी बांधकर उसे खूंटे से बांध दिया जाता है। इससे तनाव होता है और शाखाओं के बीच का कोण बड़ा हो जाता है। इस तरह पेड़ लंबा होने के साथ डोरी बड़ी की जाती है। जब पेड़ बड़ा हो जाता है तो शाखाएं छांटते रहना चाहिए।
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आंधी-तूफान की श्रेणी
आंधी: जब हवा की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से अधिक हो जाती है तो वह आंधी की श्रेणी में आती है।
हल्की आंधी: जब हवा की गति 40 किमी प्रति घंटा तक हो।
मध्यम आंधी: हवा की रफ्तार 40-61 किमी प्रति घंटा के बीच होती है। इसमें पेड़ जोर से हिलने लगते हैं और पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
भीषण आंधी: हवा के झोंकों की गति 62-87 किमी प्रति घंटा के बीच पहुंच जाती है।
तूफान: हवा की गति 62 किमी से 118 किमी प्रति घंटा के बीच होती है।
गंभीर तूफान: हवा की निरंतर गति 119 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक हो।
सुपर साइक्लोन: हवा की गति 221 किमी प्रति घंटा से ऊपर निकल जाए।
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बीते शनिवार को हवाएं आधा घंटे तक सर्वाधिक तेज 37.9 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलीं। इतनी हवा में बड़े-बड़े पेड़ उखड़कर जमींदोज हो गए। शाखाएं टूटकर गिरने लगीं। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक हवा की इतनी रफ्तार आंधी की श्रेणी में भी नहीं आती। ऐसे में पेड़ों के गिरने और शाखाओं के इतनी संख्या में टूटने पर विज्ञानी चौंक गए। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के उद्यान विभाग पेड़ों की सेहत के संबंध में अध्ययन कर चुका है। विज्ञानियों का अनुमान है कि मिट्टी की गिरती सेहत भी पेड़ों के उखड़ने के प्रमुख कारणों में से एक है।
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अधिष्ठाता उद्यान संकाय एवं निदेशक प्रसार प्रोफेसर विवेक कुमार त्रिपाठी का अनुमान है कि घरों के आसपास, लॉन, रिसॉर्ट में पौधों को लगाने के समय लोग शाखाओं के बीच के कोण का ध्यान नहीं रखते। डालों के बीच का जोड़ अगर चौड़ा होगा तो डाल नहीं टूटेगी। दो शाखाओं के बीच जोड़ का कोण 90 डिग्री होना चाहिए। कम होने पर दबाव पड़ने से शाखाएं टूट जाती हैं। इसके अलावा पौधा लगाने के लिए बीज आधा फीट गड्ढे में दबाना चाहिए। ऊपर रखने से जड़ें गहराई में नहीं जातीं। मिट्टी के अंदर ऊपर की तरफ ही फैली रहती हैं। इस पर तेज हवा में भी पेड़ उखड़कर गिर जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि एकल खड़े पेड़ के लिए अकेले दम पर हवा के झटके झेलना मुश्किल होता है। जंगल में पास-पास लगे पेड़ अपनी ऊंचाई से छह गुना दूरी तक हवा का प्रभाव रोकते हैं। इसलिए बागों के उत्तर-पश्चिम में शीशम, नीम, देसी आम आदि के पेड़ लगाने चाहिए।
ऐसे कमजोर हो रही मिट्टी
विज्ञानियों ने बताया कि मिट्टी में जीवांश पदार्थ, जिंक, बोरान, कैल्शियम, मैग्नीजियम, फास्फोरस, पोटेशियम, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व होने चाहिए। इनकी निरंतर मिट्टी में कमी हो रही है। पोषक तत्वों की कमी से पेड़ों, पौधों में कुपोषण जैसी स्थिति विकसित होने लगती है।
डीएवी कॉलेज के पादप आणविक जैवकीय विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि शहरी इलाकों के पेड़ों को मिट्टी के पोषक तत्व अधिक नहीं मिल पाती। पत्तियां पेड़ों के पास मिट्टी में सड़-गल नहीं पातीं। इन्हें साफकर फेंक दिया जाता है। पत्तियों के सड़ने से मिट्टी को पोषक तत्व मिलते हैं। इनकी कमी से सालों तक बने रहने से पेड़ों की संरचना पर दुष्प्रभाव आता है।
ऐसे लगाए जाने चाहिए पौधे
पौधे जब बड़े होने लगे तो उनकी शाखाओं में डोरी बांधकर उसे खूंटे से बांध दिया जाता है। इससे तनाव होता है और शाखाओं के बीच का कोण बड़ा हो जाता है। इस तरह पेड़ लंबा होने के साथ डोरी बड़ी की जाती है। जब पेड़ बड़ा हो जाता है तो शाखाएं छांटते रहना चाहिए।
आंधी-तूफान की श्रेणी
आंधी: जब हवा की रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा से अधिक हो जाती है तो वह आंधी की श्रेणी में आती है।
हल्की आंधी: जब हवा की गति 40 किमी प्रति घंटा तक हो।
मध्यम आंधी: हवा की रफ्तार 40-61 किमी प्रति घंटा के बीच होती है। इसमें पेड़ जोर से हिलने लगते हैं और पैदल चलना मुश्किल हो जाता है।
भीषण आंधी: हवा के झोंकों की गति 62-87 किमी प्रति घंटा के बीच पहुंच जाती है।
तूफान: हवा की गति 62 किमी से 118 किमी प्रति घंटा के बीच होती है।
गंभीर तूफान: हवा की निरंतर गति 119 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक हो।
सुपर साइक्लोन: हवा की गति 221 किमी प्रति घंटा से ऊपर निकल जाए।