Stand Operator Murder: स्टैंड में पार्टनर बनाकर हटाया तो कर दी हत्या, छह साल से तमंचा लेकर घूम रहा था आरोपी
Kanpur News: सौरभ अपनी वैनों का टोकन मनी 50 रुपये और महीने के एक हजार रुपये भी नहीं दे रहा था। इसको लेकर अक्तूबर में हुई मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें तत्कालीन नौबस्ता के ट्रैफिक सबइंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा ने बीचबचाव किया था। इसी खुन्नस में उसने शुक्रवार को हरिकरन की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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कानपुर के नौबस्ता बाईपास चौराहे पर शुक्रवार सुबह अवैध स्टैंड संचालक की गोली मारकर हत्या वैन चालक ने पार्टनर न बनाने की खुन्नस में की थी। करीब सात महीने में कई बार संचालक और हत्यारोपी के बीच मारपीट हो चुकी है। दो बार पुलिस ने शांतिभंग की कार्रवाई भी की। पुलिस ने शनिवार को हत्यारोपी को जेल भेज दिया।
मूलरूप से साढ़ के कुड़नी गाजीपुर गांव निवासी हरिकरन सिंह (55) परिजनों के साथ हनुमंत विहार के ताजनगर स्थित मकान में रहते थे। वह नौबस्ता चौराहे पर अवैध वैन स्टैंड संचालित करते थे। इस वक्त स्टैंड से 100 से ज्यादा वैन के चालकों से करीब ढाई लाख रुपये प्रतिमाह वसूली होती है। वैन चालक रेउना के दहेली गांव निवासी सौरभ सचान अवैध स्टैंड के संचालन में पार्टनर बनना चाहता था।
उसने हरिकरन से अलग से 20 वैन को इसी स्टैंड पर लगवाकर ज्यादा वसूली कराने का लालच देकर पार्टनर बनने का प्रस्ताव दिया था। हरिकरन ने उसकी बात मान ली थी, लेकिन मात्र दो-तीन वैन ही लगने पर उसे हटा दिया था। इससे सौरभ खुन्नस रखने लगा था। कुछ चालकों का आरोप है कि सौरभ और हरिकरन के बीच 40 हजार रुपये का लेनदेन भी था, लेकिन हरिकरन नहीं दे रहा था।
मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था
सौरभ अपनी वैनों का टोकन मनी 50 रुपये और महीने के एक हजार रुपये भी नहीं दे रहा था। इसको लेकर अक्तूबर में हुई मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था। इसमें तत्कालीन नौबस्ता के ट्रैफिक सबइंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा ने बीचबचाव किया था। इसी खुन्नस में उसने शुक्रवार को हरिकरन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। नौबस्ता थाना प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि सौरभ को जेल भेज दिया गया है।
थाने-चौकी के सामने चल रहे अवैध स्टैंड
नौबस्ता बाईपास ही नहीं पूरे कानपुर शहर में अवैध स्टैंड संचालित हैं। फजलगंज, कल्याणपुर, मूलगंज, चकेरी, जाजमऊ, सीसामऊ, बजरिया, कर्नलगंज, जूही आदि थानों के पास ही अवैध स्टैंड संचालित हैं। यहां पर पुलिस के सामने ही सवारियों को बैठाने में छीनाझपटी होती है। लेकिन वसूली के खेल के कारण पुलिस चुप रहती है। इन स्टैंड पर कई बार मारपीट और बवाल हो चुका है। इसके बाद भी अवैध स्टैंड हटाने का अभियान नहीं चलाया गया।
इन अवैध स्टैंडों से लगता है जाम
परेड, बड़ा चौराहा, माल रोड, घंटाघंर, मूलगंज, डिप्टी का पड़ाव, टाटमिल, जरीब चौकी, पीरोड, बजरिया, कल्याणपुर, रावतपुर, विजयनगर, फजलगंज, किदवईनगर, गोविंदनगर, बारादेवी, नौबस्ता, बर्रा, गुजैनी आदि अवैध स्टैंडों के कारण जाम की स्थिति रहती है।
30 से 100 रुपये तक की होती है वसूली
प्रत्येक स्टैंड से हर सवारी वाहनों से वसूली का रेट अलग-अलग है। इनमें ई-रिक्शा, ऑटो, टेंपो से प्रतिदिन 30 से 40 रुपये, ओमनी और जीप से 50 से 70 रुपये और प्राइवेट बसों से 100 रुपये प्रति दिन के हिसाब से वसूली की जाती है।
सवारी वाहनों की अनुमानित संख्या
- ई-रिक्शा: 60-70 हजार
- ऑटो: 20-25 हजार
- टेंपो: 18-20 हजार
- जीप: 700-900
- ओमनी: 1000-1200
- प्राइवेट बसें: 200-300
अवैध रूप से संचालित स्टैंडों को व्यवस्थित कराने के लिए जनवरी में नगर विकास विभाग को पत्र लिखा गया था। राजस्व का नुकसान न हो और जाम भी न लगे। शनिवार को भी स्टैंडों को लेकर मंडलायुक्त से वार्ता की गई है। -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर
अवैध स्टैंडों की समस्या गंभीर है। पुलिस विभाग से कोई प्रस्ताव मिलता है, तो इस समस्या के समाधान का प्रयास शुरू किया जाएगा। -मो. आवेश खान, अपर नगर आयुक्त