{"_id":"582b5b614f1c1b55368ff397","slug":"spices-jewelery-textiles-market-meltdown","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर की बाजारों को 800 करोड़ की चोट- मसाला, ज्वैलरी, कपड़ा मार्केट ‘धड़ाम’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर की बाजारों को 800 करोड़ की चोट- मसाला, ज्वैलरी, कपड़ा मार्केट ‘धड़ाम’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 16 Nov 2016 12:34 AM IST
विज्ञापन
कानपुर की बाजार में आई भारी गिरावट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी से मुस्लिम बहुल इलाकों का सोना कारोबार भी ठप हो गया है। बेकनगंज, चमनगंज, तलाक महल, हीरामन पुरवा, कर्नलगंज आदि मुस्लिम बहुल इलाकों में ज्वेलरी का कारोबार पिछले साल की तुलना में पांच प्रतिशत बेहद मुश्किल से हुआ है। इन इलाकों में सोनारों की दुकानें शादी विवाह में जेवरात की बिक्री से ही चलती हैं। बेकनगंज स्वर्णकार संघ के पदाधिकारी और थोक कारोबारी नवेद अनवर
नद्दू ने बताया कि एक्साइज ड्यूटी लगाने के विरोध में छह से सात महीने व्यापार ठप रहा और कुछ संभला तो एक हजार और पांच सौ रुपये की नोटों की बंदी ने कमर तोड़ दी है।
कर्नलगंज में चल रहे रेडीमेड गारमेंट्स के कारोबार पर नोटबंदी के फैसले से एक सप्ताह में 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यहां हर महीने करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है लेकिन नोटबंदी के बाद सभी कारखाने बंद हैं। कर्नलगंज छिपियाना के 250 कारखानों को कर्नलगंज गारमेंट्स मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वसीम राइडर ने बताया कि किसी तरह से लोगों के पास रुपये आएं तो वह आर्डर दें।
विज्ञापन
नोटबंदी का असर गल्ला कारोबार पर भी पड़ा है। हालत यह है कि आढ़तियों ने किसानों ने मूंगफली, सफेद तिल्ली और अरहर की दाल समेत कोई भी आनाज गल्ला मंडी में लेकर आने से रोक दिया है। आढ़तियों का कहना है कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार नवंबर महीने में आवाक 10 फीसदी है। ऐसा छोटे और फुटकर कारोबियों की यहां से आनाज की बिक्री न होना बताया जा रहा है। आढ़तियों का मानना है कि यह हालात अभी आगे कितने दिन रहेंगे, यह कह पाना मुश्किल है।
मंगलवार को नयागंज थोक किराना बाजार में बंदी जैसा माहौल महसूस करा रहा है। इस बाजार से पूर्वांचल के गोरखपुर,देवरिया,बनारस,इलाहाबाद,आजमगढ़ में गरम मसालों की सप्लाई होती है। प्रदेश में गरम मसालों की सबसे बड़ी शहर के नयागंज में है। व्यापारियों का कहना है ठंड और सहालग शुरू होते ही गरम मसालों(काली मिर्च,सोंठ आदि) की अच्छी बिक्री होती है। व्यापारी परेशान हैं कि ठंड का आगाज तो हो गया है,गरम मसालो का बाजार ठंडा है। इस बाजार के धंधे में 90 प्रतिशत की गिरावट आई है।
अब तक कानपुर का कारोबार करीब 800 करोड़ की चोट खा चुका है। हजार व पांच सौ के नोट न होने से सिर्फ थोक ही नहीं शहर का फुटकर कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित है। यही स्थिति रही तो फुटकर बाजार में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो सकती है। दरअसल फुटकर व्यापारी की सारी खरीद कैश पर निर्भर थी। बड़े नोटों की बंदी से रुपयों की किल्लत है और फुटकर व्यापारी या दुकानदार माल नहीं खरीद पा रहा है। आप भी जानिए किन थोक और फुटकर बाजारों पर पड़ा असर।गल्ला मंडी में बीते चार दिन से राजमा, उरद, मूंग व चना की आवक ठप है। यहां इन जिंसों के रोजाना 50 ट्रक आते थे। नोट बंदी की वजह से झांसी मंडी भी बंद हो गई है।
विज्ञापन
नद्दू ने बताया कि एक्साइज ड्यूटी लगाने के विरोध में छह से सात महीने व्यापार ठप रहा और कुछ संभला तो एक हजार और पांच सौ रुपये की नोटों की बंदी ने कमर तोड़ दी है।
विज्ञापन
कर्नलगंज में चल रहे रेडीमेड गारमेंट्स के कारोबार पर नोटबंदी के फैसले से एक सप्ताह में 25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यहां हर महीने करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार होता है लेकिन नोटबंदी के बाद सभी कारखाने बंद हैं। कर्नलगंज छिपियाना के 250 कारखानों को कर्नलगंज गारमेंट्स मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वसीम राइडर ने बताया कि किसी तरह से लोगों के पास रुपये आएं तो वह आर्डर दें।
विज्ञापन
नोटबंदी का असर गल्ला कारोबार पर भी पड़ा है। हालत यह है कि आढ़तियों ने किसानों ने मूंगफली, सफेद तिल्ली और अरहर की दाल समेत कोई भी आनाज गल्ला मंडी में लेकर आने से रोक दिया है। आढ़तियों का कहना है कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार नवंबर महीने में आवाक 10 फीसदी है। ऐसा छोटे और फुटकर कारोबियों की यहां से आनाज की बिक्री न होना बताया जा रहा है। आढ़तियों का मानना है कि यह हालात अभी आगे कितने दिन रहेंगे, यह कह पाना मुश्किल है।
मंगलवार को नयागंज थोक किराना बाजार में बंदी जैसा माहौल महसूस करा रहा है। इस बाजार से पूर्वांचल के गोरखपुर,देवरिया,बनारस,इलाहाबाद,आजमगढ़ में गरम मसालों की सप्लाई होती है। प्रदेश में गरम मसालों की सबसे बड़ी शहर के नयागंज में है। व्यापारियों का कहना है ठंड और सहालग शुरू होते ही गरम मसालों(काली मिर्च,सोंठ आदि) की अच्छी बिक्री होती है। व्यापारी परेशान हैं कि ठंड का आगाज तो हो गया है,गरम मसालो का बाजार ठंडा है। इस बाजार के धंधे में 90 प्रतिशत की गिरावट आई है।
अब तक कानपुर का कारोबार करीब 800 करोड़ की चोट खा चुका है। हजार व पांच सौ के नोट न होने से सिर्फ थोक ही नहीं शहर का फुटकर कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित है। यही स्थिति रही तो फुटकर बाजार में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो सकती है। दरअसल फुटकर व्यापारी की सारी खरीद कैश पर निर्भर थी। बड़े नोटों की बंदी से रुपयों की किल्लत है और फुटकर व्यापारी या दुकानदार माल नहीं खरीद पा रहा है। आप भी जानिए किन थोक और फुटकर बाजारों पर पड़ा असर।गल्ला मंडी में बीते चार दिन से राजमा, उरद, मूंग व चना की आवक ठप है। यहां इन जिंसों के रोजाना 50 ट्रक आते थे। नोट बंदी की वजह से झांसी मंडी भी बंद हो गई है।