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सोमवती अमावस कल, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sun, 21 Dec 2014 03:14 AM IST
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यदि गुरु के खराब प्रभाव से बचना है और पितृदोष से मुक्ति पानी है तो 22 दिसंबर को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या के दिन गंगा स्नान कर महादेव की पूजा-अर्चना करें।
साथ ही पितरों को तिल मिलाकर जल अर्पित करें। इससे आपको इन सभी से मुक्ति मिलेगी और सोमवती अमावस्या का विशेष फल भी प्राप्त होगा।
यदि आप गंगा में स्नान करने नहीं जा सकते हैं तो घर में जल में कुश डालकर स्नान करें। तब भी आपको वही फल प्राप्त होगा।’
पंडित केए दुबे पदमेश का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृदोष, पितराें के आशीष एवं पितरों के दान के लिए अमावस्या के मुहूर्त को ही विशेष फलदायी माना जाता है।
हिंदू शास्त्रों के अनुसार पितृदोष के कारण घर में अशांति, विवाह में विलंब और कारोबार में काफी परेशानी उठानी पड़ी है। बताया कि इस बार सोमवती अमावस्या 22 दिसंबर को पड़ रही है।
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सोमवार होने के कारण इसका महत्व और अधिक हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सोमवती अमावस्या का फल प्राप्त होता है। विद्वानों के मुताबिक इस दिन हल्दी और तेल खाने से बचना चाहिए।
आचार्य दीपक पांडेय का कहना है कि इस वर्ष ऐसा संयोग है कि अमावस्या राहु काल से पूर्व समाप्त हो रही है। यह संयोग 54 वर्ष बाद पड़ रहा है जो कि शनि पीड़ित लोगों के लिए अत्याधिक फायदेमंद होगा।
जिनकी जन्म पत्री में गुरु वक्री है या गुरु से संबंधित दोष उत्पन्न होते हैं। उन लोगों को इस दिन पांच हल्दी गंगाजी में प्रवाहित करनी चाहिए। साथ ही पांच तांबे सिक्के भी प्रवाहित करें। यदि बेहतर हो तो पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें।
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साथ ही पितरों को तिल मिलाकर जल अर्पित करें। इससे आपको इन सभी से मुक्ति मिलेगी और सोमवती अमावस्या का विशेष फल भी प्राप्त होगा।
यदि आप गंगा में स्नान करने नहीं जा सकते हैं तो घर में जल में कुश डालकर स्नान करें। तब भी आपको वही फल प्राप्त होगा।’
पंडित केए दुबे पदमेश का कहना है कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृदोष, पितराें के आशीष एवं पितरों के दान के लिए अमावस्या के मुहूर्त को ही विशेष फलदायी माना जाता है।
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हिंदू शास्त्रों के अनुसार पितृदोष के कारण घर में अशांति, विवाह में विलंब और कारोबार में काफी परेशानी उठानी पड़ी है। बताया कि इस बार सोमवती अमावस्या 22 दिसंबर को पड़ रही है।
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सोमवार होने के कारण इसका महत्व और अधिक हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सोमवती अमावस्या का फल प्राप्त होता है। विद्वानों के मुताबिक इस दिन हल्दी और तेल खाने से बचना चाहिए।
आचार्य दीपक पांडेय का कहना है कि इस वर्ष ऐसा संयोग है कि अमावस्या राहु काल से पूर्व समाप्त हो रही है। यह संयोग 54 वर्ष बाद पड़ रहा है जो कि शनि पीड़ित लोगों के लिए अत्याधिक फायदेमंद होगा।
जिनकी जन्म पत्री में गुरु वक्री है या गुरु से संबंधित दोष उत्पन्न होते हैं। उन लोगों को इस दिन पांच हल्दी गंगाजी में प्रवाहित करनी चाहिए। साथ ही पांच तांबे सिक्के भी प्रवाहित करें। यदि बेहतर हो तो पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें।