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UP: ‘क्यों, हो गया ईमानदारी से काम?' पैसा तय करता था फाइलों की रफ्तार, फिक्स थे हर काम के रेट, कानपुर आरटीओ

Tue, 25 Aug 2026 08:40 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 25 Aug 2026 08:40 AM IST
सार

Kanpur News: आरटीओ कार्यालय में एसओजी और प्रशासन की संयुक्त टीम ने औचक कार्रवाई कर बाबू-दलाल गठजोड़ का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि कार्यालय के बाहर छाते के नीचे बैठने वाले दलाल और अंदर बैठे बाबू मिलकर फाइलों के रेट तय करते थे। फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट के नाम पर अवैध वसूली की जा रही थी।

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SOG conducts series of raids at Kanpur RTO office clerk tout nexus exposed with fixed rates for every service
kanpur rto raid - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में आरटीओ कार्यालय में सोमवार को एसओजी और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई ने कार्यालय के भीतर और बाहर चल रहे बाबू-दलाल नेटवर्क की परतें खोल दीं। कार्रवाई से पहले एसओजी की टीम करीब एक सप्ताह तक आरटीओ परिसर और आसपास सक्रिय रही। इस दौरान टीम को पता चला कि वाहन स्वामियों के काम के लिए कार्यालय के बाहर सक्रिय दलाल और अंदर बैठे बाबू मिलकर फाइलों के रेट तय करते हैं।

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बिना भुगतान फाइल में आपत्ति लगाकर आवेदक को चक्कर कटवाया जाता है। ऐसे मामलों की तीन शिकायतों के बाद सोमवार को कार्रवाई की गई। आरटीओ में करीब दो दर्जन बाबू अलग-अलग पटलों पर तैनात हैं। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे रहने के कारण कई बाबुओं का दलालों के साथ नेटवर्क मजबूत है। जांच के दौरान टीम को पता चला कि वाहन स्वामी की फाइल किस बाबू के पास जाएगी।

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सभी काम के रेट पहले से तय थे
कितना भुगतान करना होगा और काम कितने समय में कराया जाएगा इसकी जानकारी दलालों के पास रहती थी। सभी काम के रेट पहले से तय थे। जैसे व्यावसायिक वाहन की फिटनेस के नाम पर प्रति वाहन चार से पांच हजार रुपये, स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए छह हजार रुपये, परमिट के लिए दो हजार रुपये, व्यावसायिक वाहन की एनओसी के लिए 2500 रुपये।

दो से तीन हजार रुपये लिए जाने की भी शिकायतें मिलीं
वाहन सत्यापन के लिए करीब 1200 रुपये लिए जाने की शिकायतें भी सामने आईं। दूसरे प्रदेश से ट्रांसफर होकर आए वाहन के फिर पंजीकरण के लिए भी 1200 रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई। सबसे बड़ा खेल पुराने परमिट पर नई गाड़ी के पंजीकरण में मिला। इसके लिए 20 हजार रुपये तक लिए जा रहे थे। टैक्स की पेनाल्टी कम कराने के नाम पर दो से तीन हजार रुपये लिए जाने की भी शिकायतें मिलीं।

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छाते के नीचे चलता था दलालों का ‘दफ्तर’
आरटीओ कार्यालय के बाहर सड़क किनारे छाते के नीचे लैपटॉप, प्रिंटर और फोटो कॉपी मशीन लगाकर बैठे दलाल इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी बताए जा रहे हैं। वाहन स्वामी से कागजात लेकर फाइल तैयार कराने से लेकर उसे संबंधित पटल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं की होती थी। आरोप है कि दलाल वाहन स्वामी से एकमुश्त रकम लेते और इसके बाद कार्यालय के अंदर संबंधित बाबू से काम कराने का भरोसा देते थे।

नगर निगम की दुकानों में भी सन्नाटा पसर गया
किस काम के लिए कौन-सा दस्तावेज चाहिए, किस पटल पर फाइल जाएगी और प्रक्रिया में कहां दिक्कत आ सकती है इसकी जानकारी दलालों को रहती थी। इस कारण सामान्य वाहन स्वामी को सीधे कार्यालय की प्रक्रिया समझने के बजाय दलाल के जरिये काम कराने के लिए मजबूर होना पड़ता था। कार्रवाई के दौरान कार्यालय के आसपास बनी नगर निगम की दुकानों में भी सन्नाटा पसर गया। वहां बैठे कई दलाल पुलिस टीम को देखते ही गायब हो गए।

आईपीएस के साथी से भी बोले दलाल- क्यों, हो गया ईमानदारी से काम
आरटीओ में कथित दलाली के नेटवर्क की स्थिति का अंदाजा इस से भी लगाया जा सकता है कि अधिकारियों के मुताबिक करीब 10 दिन पहले एक आईपीएस अधिकारी को अपनी गाड़ी के कागजात ट्रांसफर कराने थे। उन्होंने अपने एक साथी को लगातार चार दिन आरटीओ कार्यालय भेजा। वहां कुछ दलालों ने उनसे संपर्क किया और कागजात ट्रांसफर कराने के नाम पर रकम मांगी। आईपीएस के साथी को कार्यालय में कई दिन भटकते देखकर दो-तीन दलालों ने कथित तौर पर तंज कसा -क्यों, हो गया ईमानदारी से काम। उन्होंने कहा कि कुछ रुपये दे दिए होते तो इस तरह भटकना नहीं पड़ता।

दफ्तर में नहीं है नीलामी के रुपयों का कोई रिकार्ड
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बाबुओं के पास मौजूद कैश और चालान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की। वाहनों की नीलामी से मिलने वाली रकम का भी हिसाब तलाशा गया। पुलिस के मुताबिक नीलामी से मिलने वाली रकम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। संबंधित बाबू के पास करीब 94 हजार रुपये मिले लेकिन उसका हिसाब नहीं बताया जा सका।

स्रोत और संबंधित रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा
पुलिस के अनुसार नीलामी में शामिल होने वालों से टोकन मनी के नाम पर रकम लेकर उन्हें एक पर्ची देने की बात भी सामने आई है। पर्ची खो जाने की स्थिति में नीलामी की प्रक्रिया में शामिल होने में परेशानी होने की शिकायतें हैं। इसके अलावा पकड़े गए संदिग्ध दलालों की तलाशी के दौरान एक व्यक्ति के पास करीब 50 हजार रुपये मिलने की बात पुलिस ने कही है। इन रुपयों का स्रोत और संबंधित रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा है।

कुछ जिम्मेदारों के जवाब नहीं मिले संतोषजनक
कार्रवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने सिर्फ बाहर सक्रिय दलालों से पूछताछ तक खुद को सीमित नहीं रखा। अलग-अलग पटलों के जिम्मेदार कर्मचारियों से भी सवाल किए गए। अधिकारियों के मुताबिक कुछ सवालों के जवाब संबंधित जिम्मेदारों के पास स्पष्ट नहीं थे। पूछताछ और जांच के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार कर पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

करीब चार घंटे चली कार्रवाई
इसके बाद जिन कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सारथी भवन में स्क्रूटनी काउंटरों की भी जांच की गई। कंप्यूटर ऑपरेटरों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों और पहचान संबंधी कागजात का सत्यापन हुआ। करीब चार घंटे चली कार्रवाई के दौरान सामान्य कामकाज प्रभावित रहा।

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