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Kanpur News: आईआईटी-बीएसएनएल की तकनीक से बिना इंटरनेट चलेंगे स्मार्टफोन
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कानपुर। आईआईटी कानपुर और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ने दूरसंचार और डिजिटल तकनीकों के विकास के लिए गुरुवार को करार किया है। दोनों संस्थान नई तकनीकों के विकास के साथ स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देंगे। डायरेक्ट-टू-मोबाइल तकनीक पर काम करेंगे, जिसमें बिना इंटरनेट के मोबाइल से वीडियो और अन्य जानकारी भेजी जा सकेंगी।
शिक्षा, आपदा चेतावनी और सरकारी सूचनाएं लोगों तक तेजी से पहुंच सकेंगी। फोर जी, फाइव जी और आने वाली नई संचार तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करेंगे।
एमओयू पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल और बीएसएनएल के पीजीएम जितेंद्र गर्ग ने हस्ताक्षर किए। नीति आयोग के सदस्य डॉ. अभय करंदीकर, बीएसएनएल आईटीएस के सीएमडी ए रॉबर्ट जे रवि, बिसनौली सर्वोदय फाउंडेशन की सीईओ नंदिता बख्शी, बीईएस (आई) के अध्यक्ष सुनील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और शोधकर्ता उपस्थित रहे।
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अधिकारियों के मुताबिक आईआईटी कानपुर रिसर्च क्षमता और बीएसएनएल अपने देशभर के नेटवर्क के जरिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे। तकनीकों का परीक्षण, पायलट प्रोजेक्ट और फील्ड ट्रायल किए जाएंगे। यह सहयोग डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में मददगार साबित होगा। साथ ही, इससे देश में तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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शिक्षा, आपदा चेतावनी और सरकारी सूचनाएं लोगों तक तेजी से पहुंच सकेंगी। फोर जी, फाइव जी और आने वाली नई संचार तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम करेंगे।
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एमओयू पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल और बीएसएनएल के पीजीएम जितेंद्र गर्ग ने हस्ताक्षर किए। नीति आयोग के सदस्य डॉ. अभय करंदीकर, बीएसएनएल आईटीएस के सीएमडी ए रॉबर्ट जे रवि, बिसनौली सर्वोदय फाउंडेशन की सीईओ नंदिता बख्शी, बीईएस (आई) के अध्यक्ष सुनील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और शोधकर्ता उपस्थित रहे।
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अधिकारियों के मुताबिक आईआईटी कानपुर रिसर्च क्षमता और बीएसएनएल अपने देशभर के नेटवर्क के जरिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे। तकनीकों का परीक्षण, पायलट प्रोजेक्ट और फील्ड ट्रायल किए जाएंगे। यह सहयोग डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में मददगार साबित होगा। साथ ही, इससे देश में तकनीकी नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा।