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Cyber Crime: युवाओं को नौकरी का लालच देकर ठगने वाले गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार, पुलिस कमिश्नर ने किया खुलासा

Mon, 20 Jul 2026 02:49 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Mon, 20 Jul 2026 02:49 PM IST
सार

Kanpur News: पुलिस की साइबर टीम, क्राइम ब्रांच और हनुमंत विहार थाना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रुपये वसूलता था।

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Six held in Kanpur for duping job seekers with fake recruitment and registration fee scam
जानकारी देते पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर जिले में बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न राज्यों के युवाओं को मोटी तनख्वाह वाली नौकरी का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के 6 शातिर सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

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इस बड़ी कामयाबी को साइबर टीम, क्राइम ब्रांच और हनुमंत विहार थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया है। यह गिरोह फर्जी आयुर्वेदिक कंपनियों के नाम पर युवाओं को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है।

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इन फर्जी आयुर्वेदिक कंपनियों के नाम पर चल रहा था खेल

इस सनसनीखेज मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पकड़े गए शातिर ठगों की पहचान रवींद्र यादव, कमलेश कुमार, रोहित शाव, मंगल शाक्य, राजू कुमार और संतोष पासवान के रूप में हुई है।

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यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था। आरोपियों ने 'विन मेकर आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड' और 'धनवंतरी आयुर्वेदा' नाम से फर्जी कंपनियां बना रखी थीं। वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इन कंपनियों में बंपर वैकेंसियों का झूठा विज्ञापन फैलाते थे और नौकरी की तलाश में भटक रहे सीधे-साधे युवाओं को अपने चंगुल में फंसा लेते थे।

20-25 हजार की नौकरी का झांसा देकर वसूलते थे मोटी फीस

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि ये आरोपी युवाओं को शुरुआत में ही 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह की आकर्षक नौकरी देने का लालच देते थे। जैसे ही कोई युवा इनके झांसे में आ जाता था, तो आरोपी उससे फाइल चार्ज, मेडिकल टेस्ट, सिक्योरिटी मनी और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के नाम पर 15 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक की रकम वसूल लेते थे।

रकम ऑनलाइन ट्रांसफर कराने के बाद ये आरोपी युवाओं को फर्जी जॉइनिंग लेटर थमा देते थे या फिर उनके नंबर ब्लॉक कर देते थे। इस तरह इस गिरोह ने तीन राज्यों के सैकड़ों युवाओं को अपनी ठगी का शिकार बनाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए हैं।

भारी मात्रा में मोबाइल और ठगी से जुड़ी चैट बरामद, जांच जारी

पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जब इन आरोपियों को घेराबंदी करके दबोचा, तो इनके पास से ठगी के धंधे में इस्तेमाल होने वाले 6 एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। इन मोबाइलों को जब साइबर विशेषज्ञों ने खंगाला, तो उसमें ठगी का शिकार हुए दर्जनों युवाओं के साथ की गई व्हाट्सएप चैट के अलावा कई महत्वपूर्ण ऑडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो साक्ष्य के रूप में मिले हैं, जिससे इनके अपराध की पुष्टि होती है।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि पकड़े गए सभी 6 आरोपियों के खिलाफ हनुमंत विहार थाने में धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जा रहा है। पुलिस अब इनके बैंक खातों को फ्रीज कराने की कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही गिरोह के कुछ अन्य सक्रिय सदस्यों और इनके मददगारों का पता लगाया जा रहा है, जिन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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