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Kanpur News: पौधों को मोबाइल दिखाते ही पता चलेगा उसका नाम और पहचान
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कानपुर। अब फूल समेत अन्य पौधों के नाम, पहचान, गुण-दोष और कुल की जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ की तलाश नहीं करनी होगी। बस उसे मोबाइल दिखाते ही कुछ सेकेंड में सारी डिटेल सामने आ जाएगी। यह व्यवस्था पीपीएन डिग्री कॉलेज में हुई है। यहां के पौधों की क्यूआर कोडिंग कराई गई है, जिसको मोबाइल से स्कैन करते ही सब कुछ पता चल जाएगा।
प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल छात्रों को ज्ञान के आधुनिक स्वरूप से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। क्यूआर कोड के माध्यम से छात्रों, शोधार्थियों और आगंतुकों को पौधों की वैज्ञानिक, औषधीय और पर्यावरणीय जानकारी उपलब्ध होगी। यह प्रयास न केवल वनस्पति विज्ञान के अध्ययन को सरल बनाएगा, बल्कि छात्रों में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
फ्लोरा समिति की संयोजक डॉ. अलका रानी ने बताया कि प्रत्येक पौधे पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उसका वैज्ञानिक नाम, स्थानीय नाम, कुल (फैमिली), वानस्पतिक विवरण, आर्थिक और औषधीय महत्व, पारंपरिक उपयोग और पारिस्थितिक महत्ता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां तुरंत उपलब्ध होंगी। पौधों से जुड़े रोचक तथ्य भी छात्रों को सीखने के लिए प्रेरित करेंगे।
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क्यूआर कोड से संबंधित सामग्री के संकलन, सत्यापन और डिजिटलीकरण में फ्लोरा समिति के सदस्य डॉ. अनूप कुमार सिंह और डॉ. विनोद कुमार का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने गहन अध्ययन के बाद प्रमाणिक जानकारी तैयार की। डॉ. सुमन सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. चंचल शर्मा, डॉ. कीर्ति चौहान, सुनील कुशवाहा और योगेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल छात्रों को ज्ञान के आधुनिक स्वरूप से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगी। क्यूआर कोड के माध्यम से छात्रों, शोधार्थियों और आगंतुकों को पौधों की वैज्ञानिक, औषधीय और पर्यावरणीय जानकारी उपलब्ध होगी। यह प्रयास न केवल वनस्पति विज्ञान के अध्ययन को सरल बनाएगा, बल्कि छात्रों में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।
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फ्लोरा समिति की संयोजक डॉ. अलका रानी ने बताया कि प्रत्येक पौधे पर लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर उसका वैज्ञानिक नाम, स्थानीय नाम, कुल (फैमिली), वानस्पतिक विवरण, आर्थिक और औषधीय महत्व, पारंपरिक उपयोग और पारिस्थितिक महत्ता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां तुरंत उपलब्ध होंगी। पौधों से जुड़े रोचक तथ्य भी छात्रों को सीखने के लिए प्रेरित करेंगे।
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क्यूआर कोड से संबंधित सामग्री के संकलन, सत्यापन और डिजिटलीकरण में फ्लोरा समिति के सदस्य डॉ. अनूप कुमार सिंह और डॉ. विनोद कुमार का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने गहन अध्ययन के बाद प्रमाणिक जानकारी तैयार की। डॉ. सुमन सिंह, डॉ. एके सिंह, डॉ. चंचल शर्मा, डॉ. कीर्ति चौहान, सुनील कुशवाहा और योगेश सिंह आदि मौजूद रहे।